यूक्रेन में MBBS की पढ़ाई करने क्यों जाते हैं छात्र, जानिए कितनी सस्ती है यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई भारत से कई गुना सस्ती
देहरादून, 26 फरवरी। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण कई उत्तराखंड के छात्र भी वहां फंसे हुए हैं। जिनमें अधिकतर छात्र यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे हैं। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई भारत से सस्ती होने के कारण छात्र यूक्रेन में जाकर एमबीबीएस की पढ़ाई करते हैं। जो कि भारत और उत्तराखंड से कई गुना सस्ती पड़ती है। अभी तक उत्तराखंड के 188 बच्चों के यूक्रेन में फंसने की पुष्टि हो पाई है।

4 लाख तक है सालाना फीस
यूक्रेन में युद्ध के कारण संकट खड़ा हो जाने से भारतीय लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिसमें उत्तराखंड के भी 100 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं। इनमें अधिकतर बच्चे मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जाते हैं। देहरादून के प्रतिष्ठित बलूनी क्लासेस के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी ने बताया कि उत्तराखंड की तुलना में यूक्रेन में फीस कई गुना कम है। जिस कारण मजबूरन बच्चों को दूसरे देशों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर उत्तराखंड में मेडिकल की पढ़ाई सस्ती हो जाए और सीटें बढ़ जाए तो बच्चों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि बच्चे मेडिकल की पढ़ाई के लिए रसिया, चायना आदि देशों में जाते हैं। यूक्रेन में मेडिकल की फीस सालाना 4 लाख रुपए तक है। जबकि उत्तराखंड में निजी मेडिकल कॉलेज में ये फीस 17 से 20 लाख तक बैठती है।

भारत और यूक्रेन की मेडिकल की पढ़ाई में अंतर
साफ है कि जितने में यूक्रेन में बच्चे का मेडिकल पूरा हो सकता है। उतने में बच्चे की उत्तराखंड में एक साल की फीस भरनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि भारत में मेडिकल करने के इच्छुक छात्र को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) को अच्छे स्कोर के साथ पास करना पड़ता है। जिसमें से हर किसी छात्र को सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं मिल सकता है। ऐसे में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले छात्रों को विदेश का रुख करना पड़ता है। विदेशों की मेडिकल डिग्री भारत और अन्य देशों में भी मान्य है। भारत में प्रेक्टिस करने के लिए छात्रों को विदेश में एमबीबीएस के बाद एफएमजीई-फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा पास करनी होती है। यह परीक्षा भारत में मेडिकल की प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी है। दुनिया में ऐसे कई देश हैं जो भारतीय छात्रों के लिए विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए आदर्श माने जाते हैं। इनमें एम्स, पीजीआई जैसे संस्थान शामिल हैं। इसके साथ ही भारत में छात्र करीब साढ़े 5 साल में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। जिसमें प्रशिक्षण या इंटर्नशिप अवधि (12 महीने) शामिल है। वहीं रूस, चीन या यूक्रेन जैसे देश इंटर्नशिप सहित 6 साल में कोर्स पूरा करवाते हैं।

उत्तराखंड के 188 छात्र फंसे
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उत्तराखंड के कुल 188 छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। जिनके लिए हम विदेश मंत्रालय और भारत सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं। सीएम धामी ने छात्रों के माता-पिता को उनके बच्चों को सुरक्षित निकालने का आश्वासन भी दिया है। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि हमें उत्तराखंड के 188 लोगों के यूक्रेन में फंसे होने की सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि कि उत्तराखंड का हेल्पलाइन नंबर 112 है।












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