कौन हैं पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता, जो हैं अंकिता भंडारी हत्याकांड के दोषी, जानिए इनसाइड स्टोरी
Ankita bhandari murder case उत्तराखंड के सबसे बहुचर्चित हत्याकांड अंकिता भंडारी केस में तीनों आरोपियों पर आरोप सिद्ध हो चुका है। कोर्ट ने तीनों को दोषी करार दिया है। अंकिता केस में करीब दो साल आठ माह बाद फैसला आया है।
अंकिता केस में वनंतरा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य के साथ रिसॉर्ट मैनेजर 35 वर्षीय सौरभ भास्कर और 19 वर्षीय कर्मचारी अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया है। यह केस पहले ही दिन से हाईप्रोफाइल बन गया था। जानते हैं इस हत्याकांड के दोषियों के बारे में।

आरोपियों का राजनीतिक पृष्ठभूमि का परिवार
पहाड़ की 19 साल की बेटी का रिजॉर्ट से गायब होना और उसके बाद उसका शव बरामद होना। लोगो में काफी गुस्सा था। साथ ही जब लोगों को पता चला कि मुख्य आरोपी के परिजन किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं तो फिर लोगों को ये शक हुआ कि कहीं ये मामला भी ठंडे बस्ते में न डाल दिया जाए। ऐसे में लोग सड़कों पर उतरे और आखिरकार तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। धामी सरकार ने भी इस मामले में पहले ही दिन से काफी संजीदगी दिखाई। कोर्ट में मजबूती से पैरवी हो सके इसके लिए पूरी कोशिश की गई।
पुलकित आर्य है मुख्य आरोपी
उत्तराखंड की पौड़ी जिले के डोभ श्रीकोट की अंकिता भंडारी यमकेश्वर के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थी। जो कि 18 सितंबर 2022 को अचानक लापता हो गई थी। इसके बाद एसडीआरएफ ने 24 सितंबर को चीला पॉवर हाउस नहर से अंकिता भण्डारी का शव बरामद किया। 19 साल की अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में उत्तराखंड के पूर्व मंत्री और पूर्व में भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य को मुख्य आरोपी बनाया गया।
पुलकित के अलावा रिजॉर्ट के दो कर्मचारी
इस मामले में पुलकित आर्य के साथ रिसॉर्ट मैनेजर 35 वर्षीय सौरभ भास्कर और 19 वर्षीय कर्मचारी अंकित गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया। पुलकित आर्य ऋषिकेश के पास यमकेश्वर में वनंतरा रिसॉर्ट के मालिक थे। पुलकित आर्य के पिता विनोद आर्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं। जो कि भाजपा ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और यूपी के सह प्रभारी हैं और पूर्व राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। उनके दूसरे बेटे अंकित आर्य राज्य मंत्री रहे।
कोर्ट में पेशी से पहले जमकर पिटाई
अंकिता भंडारी के गुमशुदगी की शिकायत के आधार पर तीन दिन बाद 21 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। लोगों को इस घटना को लेकर कितना गुस्सा था। ये तब सामने आया जब ऋषिकेश से पुलिस पुलकित आर्य, अंकित, सौरभ भास्कर को गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश करने के लिए कोटद्वार ले जा रही थी, तो इसी दौरान सैकड़ों ग्रामीणों ने उनकी गाड़ी रोककर आरोपियों को पिटाई कर दी। इस दौरान आरोपियों के कपड़े भी फाड़ दिए गए थे। इसके बाद पुलिस ने किसी तरह आरोपियों को वहां से कोर्ट तक पहुंचाया। बाद में पुलिस ने तीनों की सुरक्षा बढ़ा दी और अलग अलग जेलों में शिफ्ट किया।
22 दिन की नौकरी और स्पेशल सर्विस का दबाव
अब तक अंकिता हत्याकांड को लेकर जो उत्तराखंड पुलिस की ओर से जानकारी दी गई उसके अनुसार अंकिता रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नोकरी करने आई थी। जो 22 दिन ही नौकरी कर पाई। अंकिता के परिजनों का आरोप था कि अंकिता के साथ रिजॉर्ट में गलत व्यवहार होने लगा था। आरोप था कि अंकिता पर वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने का दबाव बनाया जाने लगा था। जिसके लिए अंकिता ने मना किया और उसे जान से हाथ धोना पड़ा। अंकिता से विवाद के बाद तीनों आरोपियों ने पीड़िता को चिल्ला नहर के में धकेल दिया था।
एसआईटी ने की जांच
शुरूआत में पुलिस ने युवती के लापता होने का मामला दर्ज किया जिसे शव मिलने के बाद हत्या के मामले में बदल दिया गया है। आरोपियों के खिलाफ हत्या और सबूत छिपाने, आईपीसी की धारा 302 और 201 की धाराएं लगाई गई। मामले की जांच के लिए एसआईटी की टीम का भी गठन किया गया। एसआईटी ने 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई। अब कोर्ट ने अभियुक्त पुलकित आर्य को धारा 302 / 201 / 354 ए आईपीसी व धारा 3(1)d आईटीपीए एक्ट में दोषसिद्ध और अभियुक्त सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता को धारा 302 / 201 आईपीसी व3(1)d आईटीपीए एक्ट में दोषसिद्ध किया है।
दो सवालों के नहीं मिले जबाव
अंकिता केस में जिन सवालों को लेकर सबसे ज्यादा बवाल और सियासत हुई वह है पहला आखिर वीआईपी कौन था। जिसको स्पेशल सर्विस देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था और इसके साथ ही रिजॉर्ट में घटना के बाद बुलडोजर किसने चलाया इसको लेकर भी खूब सियासत देखी गई, जिसके जबाव पुलिस जांच में ही साफ हो सकते हैं।












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