''कई बार ऐसे लोगों पर भार आ जाता है जो उसे उठाने के लायक नहीं होते'', पूर्व सीएम का किस पर है निशाना?

सोशल मीडिया में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र ने कहा है कि लोकतंत्र में कई बार ऐसे लोगों पर भार आ जाता है जो उसे उठाने के लायक नहीं होते।

Viral VIDEO statement former CM Trivendra Singh Rawat burden falls people who not capable lifting it

जोशीमठ में भू धंसाव और दरारों के बीच सियासत भी गरमा गई है। इस बीच भाजपा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के एक वायरल बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। वायरल वीडियो में पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत जोशीमठ भूधंसाव पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहते नजर आ रहे हैं कि लोकतंत्र में सभी लोगों पर जिम्मेदारी होती है लेकिन कुछ लोग इस जिम्मेदारी को उठाने में सक्षम नहीं होते और समस्याएं पैदा हो जाती हैं। पूर्व सीएम के इस बयान के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं। इस बयान को जहां अपनी ही सरकार पर कटाक्ष के रुप में माना जा रहा हैं तो वहीं विपक्ष को एक बार फिर भाजपा पर हमला करने का मौका मिल गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का एक बयान तेजी से वायरल

सोशल मीडिया में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का एक बयान तेजी से वायरल हो रहा है। पूर्व सीएम से मीडिया द्वारा जोशीमठ प्रकरण में जिला विकास प्राधिकरण की भूमिका पर एक सवाल किया गया तो त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस पर सियासी बयान देकर राजनीति गरमा दी है। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र ने कहा है कि लोकतंत्र में कई बार ऐसे लोगों पर भार आ जाता है जो उसे उठाने के लायक नहीं होते। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी लोगों पर जिम्मेदारी होती है लेकिन कुछ लोग इस जिम्मेदारी को उठाने में सक्षम नहीं होते और समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

कई बार भार ऐसे लोगों पर आ जाता है, जो भार को उठाने के ​लायक नहीं होते हैं

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    हालांकि त्रिवेंद्र ने किसी नेता का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी लोगों पर जिम्मेदारी होती है, उसमें कोई बहुत बुद्धिमान होता है, कोई कम बुद्धिमान होता है और कोई और कम बुद्धिमान होता है। लोकतंत्र की यही विडंबना भी है, खूबसूरती भी है कि जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है, इसलिए कई बार जो भार है, ऐसे लोगों पर आ जाता है जो भार को उठाने के ​लायक नहीं होते हैं। तब इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि राज्य के भूकंपीय दृष्टि से बहुत अस्थिर होने के कारण विकास और निर्माण योजनाओं को नियोजित तरीके से संचालित करने के लिए ही विकास प्राधिकरण बनाए गए थे। मैं समझता हूं कि जो प्राधिकरण गठित किए गए थे, उनके पीछे यही सोच थी कि उत्तराखंड भूकंपीय दृष्टि से बहुत ज्यादा 'अस्थिर' है। उन्होंने कहा कि यहां व्यवस्थित और नियोजित तरीके से निर्माण तथा विकास की योजनाएं संचालित हो सकें, इस दृष्टि से विकास प्राधिकरण बनाए गए थे, उन्होंने प्राधिकरण समाप्त किए। कहा, तकलीफ तो होती है, कष्ट होता है। बता दें कि पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत की सरकार में जिला विकास प्राधिकरण बनाए गए थे, लेकिन त्रिवेंद्र के हटने के बाद तीरथ सरकार ने इस फैसले को पलट दिया।

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