Uttarakhand: वर्टिकल ड्रिलिंग से कैसे होगा काम आसान, जानिए अब कितने घंटे में टनल से बाहर आ सकते हैं फंसे मजदूर

Uttarkashi Silkyara Tunnel Accident Rescue सिलक्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए जिन 6 नए तरीकों से काम शुरू हुआ है। इनमें वर्टिकल ड्रिलिंग का सबसे अहम रोल माना जा रहा है। इस विकल्प से रेस्क्यू टीमें और परिजनों को सबसे ज्यादा आस जगी है। वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए भी दो तरीके के विकल्प पर काम शुरू हो गया है।

Uttarkashi work become easier vertical drilling know how many hours trapped laborers come out tunnel.

वर्टिकल ड्रिलिंग के भी दो तरीकों पर काम
पहला काम सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) को सौंपा गया है। जो कि सुरंग के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग का काम शुरू करेगा। इसके लिए जरुरी मशीनें पहुंचनी शुरू हो गई है। इससे पूर्व सुरंग के ऊपर सड़क बनाने का काम बीआरओ की तरफ से जारी है। जो कि आधे से ज्यादा काम पूरा कर चुका है।

दिन रात एक कर युद्ध स्तर पर काम
इसके साथ ही वर्टिकल का दूसरा विकल्प दूसरे छोर से ओएनजीसी वर्टिकल होल करेगा। जिससे पाइप भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि अगर ये मिशन पूरा हुआ तो इस तरह से 30 से 40 घंटे में मजदूरों को बाहर निकालने का काम शुरू हो जाएगा। सारी टीमें दिन रात एक कर मजदूरों को बचाने और बाहर निकालने में जुटी है।

जारी रहेगा पहले वाला रेस्क्यू
बताया गया है कि जिस रेस्क्यू अभियान में पहले दिन से एनएचआईडीसीएल सिल्क्यारा छोर से ड्रिलिंग कर रहा है, वह काम भी जारी रखा जाएगा। इसके अलावा पीछे यानि बड़कोट छोर और सुरंग के ऊपर, दाएं, बाएं हर तरफ से काम रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को बताया कि अब तक 60 मीटर में से लगभग 40 मीटर की ड्रिलिंग पूरी हो चुकी है।

कहां फंसे हैं मजदूर
जिस इलाके में मजदूर फंसे हैं वह 8.5 मीटर ऊंचा और 2 किलोमीटर लंबा है। यहां सुरंग काम लगभग पूरा हो चुका है। कंक्रीटिंग का काम पूरा होने के साथ ही इस हिस्से में बिजली और पानी भी उपलब्ध है। यह सुरंग का निर्मित हिस्सा है, जहां मजदूरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कंक्रीटिंग का काम किया गया है। सुरंग के इस हिस्से में बिजली और पानी भी उपलब्ध है।

ये पांच एजेंसियां रेस्क्यू में जुटी
तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी), सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएनएल), रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल), राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल), और टेहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ( टीएचडीसीएल) इस अभियान के रेस्क्यू टीमों में शामिल की गई है।

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