गैरसेंण में आखिरी ओवर में धामी करेंगे धाकड़ बल्लेबाजी, कांग्रेस टिकाऊ प्रत्याशी को देगी टिकट
गैरसेंण में आखिरी ओवर में धामी करेंगे धाकड़ बल्लेबाजी, कांग्रेस टिकाऊ प्रत्याशी को देगी टिकट
देहरादून, 26 नवंबर। उत्तराखंड में अब भाजपा और कांग्रेस पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुके हैं। इस हफ्ते उत्तराखंड में तेजी से घटनाक्रम घटा है। जिसमें भाजपा और कांग्रेस ने घोषणा पत्र से लेकर टिकट बंटवारे को लेकर कसरत तेज हो गई है। सरकार के कामकाज की बात करें तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के आखिरी सत्र को गैरसेंण में आयोजित कर आखिरी ओवर में धाकड़ बल्लेबाजी के जरिए चुनाव में जाने की तैयारी में जुटे हैं। क्या कुछ खास चल रहा है उत्तराखंड की राजनीति में आइए जानते हैं।

कांग्रेस का जिताऊ से ज्यादा टिकाऊ पर फोकस
सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस इस बार रणनीति को कमजोर साबित नहीं होने देगी। इसके लिए टिकट बंटवारे में कांग्रेस इस बार किसी तरह की कमजोर कड़ी को साबित नहीं करेगी। इसके लिए पार्टी हाईकमान की और से जिताऊ से ज्यादा टिकाऊ पर फोकस करने की रणनीति पर फोकस करने के लिए कहा गया है। कोई भी पार्टी ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारना चाहती है जो कि जिताऊ हो, यानि ऐसा व्यक्ति जो जीतने की गारंटी रखता हो। लेकिन जिताऊ के साथ ही प्रत्याशी का टिकाऊ होना भी जरूरी है। उसका कारण है चुनाव के बाद किसी तरह की परिस्थिति में पार्टी के साथ मजबूती से खड़ा रहना। कांग्रेस इस बार ऐसे किसी प्रत्याशी को चुनावी मैदान में नहीं उतारना चाहती जो कि कमजोर कड़ी हो, साफ है कि चुनाव जीतने के बाद अगर जोड़ तोड़ की राजनीति शुरू हो तो कांग्रेस का सिपाही मजबूत बनकर कांग्रेस के साथ खड़ा नजर आए।

गैरसेंण होगा आखिरी ओवर, धामी पर सिक्सर का दबाव
भाजपा इतिहास रचने के लिए मिशन 60 प्लस पर फोकस कर रही है, जिसके लिए पुष्कर सिंह धामी को आखिरी ओवर में उतारने के बाद कई सिक्सर की दरकिनार है। ऐसे में मुख्यमंत्री को हर वर्ग और हर बड़े मुद्दों को चुनाव से पहले सुलझाना होगा। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए आखिरी ओवर गैरसेंण सत्र साबित होगा। गैरसेंण में दो दिन 7 और 8 दिसंबर को विधानसभा का सत्र होगा। इसमें पुष्कर सिंह धामी की कोशिश होगी, उन सभी बड़े मुद्दों को छुंए, जिनके कारण चुनाव में भाजपा को किसी तरह के विरोध का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए सबसे बड़ा चेलेंज है, देवस्थानम बोर्ड। सूत्रों का दावा है कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर सरकार जल्द ही फैसला लेने जा रही है। लेकिन सत्र के अंदर धामी सरकार को इस एक्ट को भी खत्म करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो चुनाव में भाजपा को तीर्थ पुरोहितों के भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा। दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा है जिला बनाओ संघर्ष समिति का आंदोलन। 4 जिलों की मांग को लेकर अपने-अपने मुख्यालयों में स्थानीय लोगों का आंदोलन चल रहा है। ऐसे में धामी सरकार को सत्र में जिला पुर्नगठन को लेकर जरुरी कार्रवाई करनी होगी। जिससे चुनाव में जाने से पहले 4 जिलों की मांग कर रहे स्थानीय लोगों के विरोध का भाजपा को विरोध न झेलना पड़े। इसके अलावा गैरसेंण समेत 3 नए मंडल बनाए जाने की पूर्व त्रिवेंद्र सरकार के फैसले पर आगे रणनीति बनाकर इसे स्थगित करने की दिशा में सरकार को आगे कदम बढ़ाना पडेगा। जिससे जनता को इस तरह का कोई कन्फ्यूजन न रहे। इसके अलावा भू कानून के मुद्दे पर भी सरकार को अपना स्टैंड क्लियर करना होगा।

टिकट बांटने में कांग्रेस, भाजपा से होगी आगे
चुनाव मैदान सजने के बाद अब भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी टिकट बंटवारे पर फोकस करने लगी है। दिसंबर में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की पहली सूची जारी हो सकती है। भाजपा की और से टिकट बंटवारे में समय लग सकता है। ऐसे में कांग्रेस टिकट बंटवारे में आगे निकल सकती है। इसके लिए 22 से ज्यादा दावेदारों की सूची लगभग कांग्रेस के अंदर तय मानी जा रही है। जिनके नाम दिल्ली में एक बार हाईकमान की मीटिंग होने के बाद तय हो जाएंगे। जिन नामों पर किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं है, उनके नाम पहली सूची में ही शामिल किए जाएंगे। जिनमें सिटिंग विधायक भी शामिल है। कांग्रेसी सूत्रों का दावा है कि किसी भी सिटिंग विधायक का टिकट नहीं काटा जाएगा।












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