अब उत्तराखंड में लंपी बीमारी की दस्तक, पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो रही बीमारी, अलर्ट पर राज्य सरकार

उत्तराखंड हरिद्वार मेें लंपी बीमारी से अब तक 35 पशुओं की मौत

देहरादून, 11 अगस्त। उत्तराखंड में लंपी बीमारी के दस्तक देने से हड़कंप मच गया है। हरिद्वार जिले मेें लंपी बीमारी से अब तक 35 पशुओं की मौत हो चुकी है। जिसके बाद सरकार ने अलर्ट जारी किया है। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने सभी जिलों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को रोकथाम व बचाव के लिए कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। मंत्री ने उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जिले में मच्छरों व मक्खियों की रोकथाम के लिए दवाईयों का छिड़काव करने के निर्देश दिए।

Uttarakhand lampi the disease is proving fatal for the animals, the state government on alert

हरिद्वार जिले में गाय व भैंस में लंपी बीमारी तेजी से फैल रही

हरिद्वार जिले में गाय व भैंस में लंपी बीमारी तेजी से फैल रही है। यहां अब तक 35 पशुओं की बीमारी से मौत हुई है। 454 से अधिक पशुओं का 26 कैंपों के माध्यम से इलाज किया गया है। बीमार पशुओं के इलाज के लिए 30 हजार गोट पॉक्स वैक्सीन हरिद्वार जिले को उपलब्ध कराई गई हैं। फिलहाल दूसरे जिलों में इस बीमारी के कोई केस सामने नहीं आए हैं। पशुपालन विभाग ने अब सभी जिलों को दिशा.निर्देश जारी किए हैं। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने दूसरे राज्यों की सीमा से सटे गांवों में पशुओं का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि सभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों की ओर से टीकों की मांग विभाग को भेजी जाए। एक्सपर्ट का कहना है कि लंपी संक्रमण मच्छरों व मक्खियों से फैल रहा है। मंत्री ने उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जिले में मच्छरों व मक्खियों की रोकथाम के लिए दवाईयों का छिड़काव करने के निर्देश दिए।

क्या है लंपी स्किन बीमारी
लंपी स्किन बीमारी एक वायरल बीमारी है, जिसमें गाय भैंस या बैल के शरीर पर गांठे होने लगती है। ये गांठें मुख्य रुप से इन पशुओं के जननांगों सिर और गर्दन पर होती है। उसके बाद वो पूरे शरीर में फैलती है। फिर धीरे धीरे ये गांठें बड़ी होने लगती है। वक्त के साथ ये गांठें घाव का रुप ले लेती है। इस पीड़ा से ज्यादातर पशुओं को बुखार आने लगता है। दूधारु पशु दूध देना बंद कर देते है। कई गायों का इस पीड़ा से गर्भपात भी हो जाता है और कई बार मौत भी हो जाती है।

अफ्रीकन स्वाइन फीवर से सुअरों की मौत
इधर अफ्रीकन स्वाइन फीवर फैलने से पौड़ी, देहरादून व नैनीताल जिलों में 715 सुअरों की मौत हुई है। जबकि रोग से संक्रमित 53 सुअरों को मारा गया है। पशुपालन मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वाइन फीवर से हुई सुअरों की मौत पर प्रभावित लोगों को मुआवजा देने के लिए उचित कार्यवाही करें।

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