दिव्यांग शिक्षक ने पेश की ऐसी मिसाल, दूसरे शिक्षकों के लिए बन गए प्रेरणा, टेक्नोलॉजी में हैं सबके गुरू
दिव्यांग प्रदीप नेगी का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन
देहरादून, 1 सितंबर। उत्तराखंड से हरिद्वार के शिक्षक प्रदीप नेगी का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। जो कि दिव्यांग होने के बाद भी दूसरे शिक्षकों के लिए मिसाल बन गए हैं। शिक्षक प्रदीप नेगी नवाचार में हर किसी को पीछे छोड़ चुके हैं। जिस वजह से वे छात्रों ही नहीं शिक्षकों को भी ऑनलाइन शिक्षण कार्य के मास्टर बने हुए हैं।

दो साल में ही पोलियो बीमारी ने अपना शिकार बना लिया
पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लॉक के भंडारी गांव के रहने वाले प्रदीप नेगी को दो साल में ही पोलियो बीमारी ने अपना शिकार बना लिया। लेकिन प्रदीप ने कभी इस बिमारी को अपने पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने बचपन से ही कुछ नया प्रयोग और नवाचार करने की ठानी। 1998 में प्रदीप का सहायक अध्यापक में पौड़ी के अति दुर्गम इलाके जयखाल गौरगांव में चयन हुआ। दिव्यांग होने के बाद भी वे दुर्गम पहाड़ी इलाके में शिक्षण कार्य करते रहे।

वर्तमान में वे राजकीय इंटर कॉलेज भेल हरिद्वार में कार्यरत
2006 में प्रदीप नेगी ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल की और वे अर्थशास्त्र विषय के प्रवक्ता बन गए। तब से अब तक उन्होंने शिक्षा में लगातार नए प्रयोग करते जा रहे हैं। वर्तमान में वे राजकीय इंटर कॉलेज भेल में कार्यरत हैं।

भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपना लोहा मनवाया
परिवार में माता, पिता के अलावा पत्नी और दो बच्चे हैं। पिता आर्मी से रिटायर हैं। जबकि माता ने शिक्षिका होने के बाद भी बच्चे की बीमारी को देखते हुए सरकारी नौकरी छोड़ दी। प्रदीप ने अपने परिजनों के इस त्याग और बीमारी दोनों को ध्यान में रखते हुए अथक परिश्रम से भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपना लोहा मनवाया है।

भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एक मात्र शिक्षक
प्रदीप का चयन 2018 में ग्लोबल टीचर अवॉर्ड के बेस्ट 50 में हो चुका है। जो कि भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एक मात्र शिक्षक रहे हैं। इस प्रतियोगिता में 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने आवेदन किया था। प्रदीप को 2014 में आईसीटी के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है।

शिक्षकों को भी ट्रेनिंग देते हैं प्रदीप
प्रदीप शिक्षा विभाग के शिक्षण प्रक्रिया को रूचिपूर्ण और तर्कपूर्ण बनाने के लिए हमेशा से ही प्रयोग करते आ रहे हैं। इसके लिए वे लगातार नवाचार के लिए काम करते रहते हैं। वे एससीईआरटी के साथ ही शिक्षा मंत्रालय के जितने भी आईसीटी के कार्यक्रम संचालित होते हैं, उन सबमें रिशोर्स के रूप में काम करते रहते हैं। साथ ही अपने साथ के शिक्षकों को भी ट्रेनिंग देते हैं।

दूसरों को भी जिदंगी में कुछ हटकर करने की प्रेरणा
इसके साथ ही ब्लॉग, मोबाइल एप, वेबसाइट, यूट्यूब चैनल जैसे नवाचार शिक्षा के वे मास्टर ट्रेनर हैं। वे ऑनलाइन क्लासेस, ई.सामग्री का निर्माण, ऑनलाइन क्विज, वीडियो कांफ्रेंस, वर्चुअल टूर,ग्लोबल प्रोजेक्ट, मोबाइल शिक्षा को लेकर नए प्रयोग करते रहते हैं और बच्चों को सिखाते रहते हैं। प्रदीप नेगी कई बार राज्य से लेकर नेशनल स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं। प्रदीप नेगी अपने एसेंबल स्कूटर से ही हर जगह आते जाते हैं। ऐसे में वे किसी पर निर्भर नहीं होने के साथ ही वे दूसरों को भी जिदंगी में कुछ हटकर करने की प्रेरणा देते आ रहे हैं।












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