उत्तराखंड: 'हम ये समझ पाते कि क्या हो रहा है उससे पहले ही नदी ने...', गांववालों ने सुनाई तबाही की कहानी

उत्तराखंड: 'हम ये समझ पाते कि क्या हो रहा है उससे पहले ही नदी ने...', गांववालों ने सुनाई तबाही की कहानी

Uttarakhand Glacier Burst Update News: उत्तराखंड के चमोली के जोशीमठ में रविवार (07 फरवरी) को नंदादेवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से धौली गंगा और ऋषिगंगा नदी में अचानक भीषण बाढ़ आ गई। इस आपदा ने इलाके में भारी तबाही मचाई। 13 गांवों के पुल टूट गए हैं। हादसे में अबतक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। ग्लेशियर के टूटने से इलाके में पॉवर प्रोजेक्ट भी नष्ट हो चुके हैं। ऋषिगंगा पॉवर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे लगभग 202 मजदूर अब भी लापता हैं। सोमवार को प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य जारी है और राज्य के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा है कि स्थिति नियंत्रण में है। जैसे-जैसे अब स्तिथि सही हो रही है लोग इस हादसे के बारे में जानकारी दे रहे हैं और आपबीती सुना रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड के रैणी गांव के रहने वाले 50 वर्षीय धरम सिंह ने कहा कि जब तक हम ये समझ पाते कि क्या हो रहा है तब तक ऋषिगंगा के कीचड़ वाले पानी ने सबकुछ तबाह कर दिया।

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    'कुछ समझ में आता इससे पहले ही सब तहस-नहस हो गया'

    'कुछ समझ में आता इससे पहले ही सब तहस-नहस हो गया'

    50 वर्षीय धरम सिंह ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा, हर दिन की तरह रविवार की सुबह भी सबकुछ सामान्य था। लेकिन लगभग 10 बजे हमें जोरदार आवाज सुनाई दी, उस वक्त ऋषिगंगा नदी का पानी और कीचड़ तेजी से हमारी ओर बढ़ रहा था, हमें कुछ समझ में आता इससे पहले ही सारी चीजें तहस-नहस हो गई।

    'ऋषिगंगा नदी का ऐसा विकराल रूप कभी नहीं देखा था'

    'ऋषिगंगा नदी का ऐसा विकराल रूप कभी नहीं देखा था'

    रैणी गांव के ही एक शख्स ने कहा, हमेशा शांत सी दिखने वाली ऋषिगंगा नदी का ऐसा विकराल रूप कभी नहीं देखा था। रविवार की सुबह सफेद धुंध के साथ हमें अचानक ऋषिगंगा मलबा लेकर आती दिखी। हम गांव वालों ने कभी भी ऐसे जलप्रलय के बारे में नहीं सोचा था। नाही कभी ये कल्पना की थी कि ऋषिगंगा ऐसी तबाही लेकर आएगा।

    'धुएं के साथ नदी का मलबा आते देख गांववाले घबरा गए'

    'धुएं के साथ नदी का मलबा आते देख गांववाले घबरा गए'

    रैणी गांव के रहने वाले उदय ने बताया, लगभग रविवार सुबह 9.30 से 10 के बीच हमें धुएं के साथ नदी मलबा लेकर आती दिखी। गांव के लोग घबरा गए थे। नदीं के तेज बहाव की आवाजें गांव में गूंज रही थी और देखते ही देखते नदी का पानी तेज बहाव से निचले क्षेत्र में पहुंच गया और सबकुछ बर्बाद कर चला गया।

    गांव के कुछ लोग हैं लापता

    गांव के कुछ लोग हैं लापता

    बता दें कि इस प्राकृतिक आपदा में रैणी और तपोवन की बिजली प्रोजेक्ट से जुड़े लोग ज्यादा प्रभावित हुए हैं। रैणी गांव के कुछ लोग भी इस हादसे के बाद से लापता हैं। इस गांव के तीन लोग त्रासदी के बाद से गायब हैं। जिसमें एक 75 वर्षीय महिला अमृता देवी हैं, हादसे के वक्त ये पुल के पास अपने खेत में काम कर रही थीं।

    वहीं 25 वर्षीय रंजीत भी गायब हैं, वो त्रासदी के वक्त ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। इसके अलावा वल्ली रानी के यशपाल भी गायब हैं, जो मवेशी को चराने ले गए थे। वहीं जुवा ग्वान गांव के संजय सिंह भी लापता हैं, ये भी त्रासदी के वक्त मवेशी चरा रहे थे।

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