Uttarakhand glacier burst:नंदा देवी में कैसे टूटा ग्लेशियर, DRDO ने असल बात बताई
देहरादून: उत्तराखंड में रविवार को ग्लेशियर फटने की घटना को लेकर डीआरडीओ ने एक चौंकाने वाली जानकारी दी है। डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने नंदा देवी इलाके के मुआयना के बाद संभावना जताई है कि मुख्य ढांचे से लटक रहे ग्लेशियर के टूटने के चलते उत्तराखंड में इस दशक की सबसे बड़ी और सदी की दूसरी सबसे बड़ी त्रासदी आई है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के विशेषज्ञों की एक टीम सोमवार को उत्तराखंड के चमोली जिले के उस इलाके का हवाई सर्वे किया है, जो रविवार को ग्लेशियर टूटने की वजह से तबाह हो गया है। डीआरडीओ की ओर से कहा गया है कि उसने जो डेटा जमा किए हैं, उसे आगे विश्लेषण किया जाएगा और उसके बाद ही इस प्राकृतिक आपदा की सही वजह ज्यादा अच्छे से समझी जा सकेगी।

मुख्य ग्लेशियर से टूटकर गिरा लटक रहा ग्लेशियर-डीआरडीओ
उत्तराखंड के चमोली में आपदा प्रभावित इलाकों का सोमवार को जायजा लेने के बाद डीआरडीओ के डिफेंस जियो-इंफोर्मेटिक्स रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट के डायरेक्टर डॉक्टर एलके सिन्हा ने कहा है, 'चमोली में जिस जगह पर घटना हुई, वहां के ग्लेशियर का हमारी टीम ने एरियल सर्वे किया है। शुरुआती तौर पर ऐसा लगता है कि लटक रहा ग्लेशियर मुख्य ग्लेशियर से टूट कर अलग हो गया और संकरी घाटी में आकर गिरा।' उनके मुताबिक. 'घाटी में इसकी वजह से एक झील का निर्माण हुआ जो बाद में फट गया और इसी के चलते तबाही मची। हमारे वैज्ञानिक डेटा का विस्तार से विश्लेषण कर रहे हैं और अगर जरूरी हुआ तो वो और ब्योरा जुटाने के लिए फिर से जाएंगे।'
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रविवार को चमोली जिले में आई थी तबाही
बता दें कि भारत की दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी नंदा देवी के ग्लेशियर टूटने की वजह से उत्तराखंड के चमोली जिले के कई इलाकों में रविवार को भयंकर तबाही हुई। सबसे पहले ऋषिगंगा में छोटा हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट बह गया और उसके नीचे धौलीगंगा नदी में बन रहा एनटीपीसी का बड़ा प्रोजेक्ट भी तबाह गया। जानकारी के मुताबिक इस हाइड्रो प्रोजेक्ट का करीब 60 फीसदी काम पुरा हो गया था, लेकिन इस आफत ने इतना नुकसान किया है कि उसके आंकलन में भी काफी वक्त लगेगा। पहाड़ से आई सैलाब का जोर इतना भयावह था कि रास्ते में आए कम से कम पांच पुल और कंस्ट्रक्शन से जुड़े उपकरण भी बह गया।

13 गांवों का संपर्क टूटा-आईटीबीपी
लापता लोगों की तलाश और घायलों को बचाने के काम में आईटीबीपी के जवान एनडीआरएफ, एडीआरएफ, सेना और उत्तराखंड पुलिस की मदद कर रहे हैं। आईटीबीपी के मुताबिक इस घटना के चलते 13 गांवों का संपर्क टूट चुका है। जोशीमठ में आईटीबीपी के एडीजी मनोज रावत ने कहा, 'रैनी गांव में ग्लेशियर फटने की घटना के दौरान पुल ढहने से करीब 13 गांवों का संपर्क मलारी और घंसाली जैसे पास के इलाकों से कट गया है।' उनके मुताबिक आपदा प्रभावित दो गांवों लता और रैनी में खाने की चीजें गिराने का कार्य जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि ग्लेशियर फटने के बाद से करीब 203 लोग लापता हैं। ज्यादातर लोग उन दोनों हाइड्रो प्रोजेक्ट में काम करने वाले मजदूर हैं।

48 घंटे जारी रह सकता है बचाव का काम
राहतकर्मी एनटीपीसी के तपोवन विष्णुगढ़ हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के पास 2.5 किलोमीटर लंबी सुरंग को ड्रिल करके रास्ता बनाने और फंसे हुए लोगों को तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। यह सुरंग 5 किलोमीटर नीचे की ओर था और एनडीआरएफ और दूसरे बचावकर्मी को लगता है कि सुरंग में अभी भी 30 लोग फंसे हुए हैं। सोमवार को एनडीआरएफ की ओर से कहा गया कि बचाव का काम 48 घंटे तक जारी रह सकता है।












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