उत्तराखंड कांग्रेस की नई थीम 'तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा' से कहीं बिगड़ ना जाए कांग्रेस का ही काम, जानिए कैसे
उत्तराखंड हिंदी समाचार
देहरादून, 4 दिसंबर। उत्तराखंड में सत्ता वापसी को लेकर कांग्रेस की रणनीति में अब नया हथियार सामने आया है। जो कि कांग्रेस का कैंपेन सांग है। इसकी थीम कांग्रेस ने रखी है 'तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा'। मतलब साफ है कि कांग्रेस के पास सत्ताधारी भाजपा के लिए सबसे बड़ा मुद्दा तीन मुख्यमंत्री बदलना है। लेकिन सवाल ये उठता है, कि क्या जनता तीन मुख्यमंत्रियों को बदलने के मुद्दे को सबसे बड़ा मुद्दा मान रही है। या फिर कांग्रेस जिस तरह से अब तक चुनावी मैदान में बड़े-बड़े मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही थी, वे सभी मुद्दे इस मुद्दे के पीछे कहीं छिप गए हैं। ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि कहीं कांग्रेस की ये थीम कांग्रेस का अब तक का ही काम न बिगाड़ दे।
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कैम्पेन सांग लॉन्च
उत्तराखंड में चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी ने कैम्पेन सांग लॉन्च किया है। राज्य में बार-बार सीएम बदले जाने, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्रित कांग्रेस का कैम्पेन सांग का नाम 'तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा' है। इसमें दो पूर्व मुख्यमंत्रियों और एक वर्तमान मुख्यमंत्री के चेहरे को जगह दी गई है। कांग्रेस का दावा है कि जनता सत्ता विरोधी लहर के लिए वोट करने जा रही है। कांग्रेस की ये थीम पार्टी का अब तक का सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा' कैम्पेन सॉन्ग में उत्तराखंड त्रासदी के दौरान बीजेपी की विफलता, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, लोकायुक्त की नियुक्ति न होना, पूर्ण कोविड टीकाकरण न होना जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि 'उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार फेल रही है। दो बार सीएम बदल दिए गए जो कि संसदीय परम्परा का अपमान है।' कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बीजेपी सरकार पर बदइंतजामी का आरोप लगाते हुए हरीश रावत ने कहा कि हमारे छोटे से राज्य में मृत्यु दर से सबसे ज्यादा थी और उसके बाद हरिद्वार में कुम्भ के दौरान 'कोरोना जांच' में घोटाला करके बीजेपी ने जहर भर दिया।

दूसरे मुद्दों पर कई बार हरदा ने किए हैं सवाल
कांग्रेस चुनाव अभियान की कमान संभाल रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चुनावी जंग में कूदने से पहले ही भ्रष्ट्राचार, रोजगार, महिलाओं के सम्मान, खनन, गैरसेंण, नए जिलों के पुर्नगठन, कर्मचारियों की समस्या आदि कई मु्द्दों को लेकर सोशल मीडिया और जनता के बीच जाकर उठाते आ रहे हैं। लेकिन अब कांग्रेस ने एक बड़े मु्द्दे पर ही केंद्रित किया है। भाजपा के पौने 5 साल के कार्यकाल में तीन-तीन मुख्यमंत्री बदलना कांग्रेस अपना सबसे बड़ा चुनावी हथियार मान रही है। प्रचंड बहुमत की सरकार में भाजपा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया। 4 साल का कार्यकाल पूरा करने से पहले ही त्रिवेंद्र सिंह रावत को कुर्सी से हटना पड़ा। इसके बाद तीरथ सिंह रावत भी 4 माह तक मुख्यमंत्री रहे। फिर पुष्कर सिंह धामी को कुर्सी सौंपी गई।

धामी की लोकप्रियता ने पीछे छोड़ा मुद्दा
बार-बार मुख्यमंत्री बदलने से भाजपा को खासा नुकसान होने का दावा भी किया गया। लेकिन जिस तरह से 5 माह के कार्यकाल में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने फैसले लिए हैं, वो कहीं न कहीं भाजपा के ग्राफ को उठाने में मददगार साबित हो रहे हैं। उत्तराखंड में चुनावी साल में जितने भी सर्वे सामने आ रहे हैं। उनमें पुष्कर सिंह धामी लोकप्रियता में पूर्व सीएम हरीश रावत से ज्यादा पीछे नहीं है। इतना ही नहीं सीटें भी भाजपा की कांग्रेस से ज्यादा ही दिखाई जा रही है। ऐसे में साफ है कि जनता को मुख्यमंत्री बदलने से भाजपा से कोई ज्यादा नाराजगी नहीं है। इसका ये कारण भी माना जा सकता है कि 21 साल में पहली निर्वाचित सरकार जो कि कांग्रेस की पूर्व सीएम एनडी तिवारी के नेतृत्व में रहीं, को छोड़कर किसी भी मुख्यमंत्री ने 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया। कांग्रेस की 2012 में सरकार में भी दो मुख्यमंत्री बदले। इस तरह से मुख्यमंत्री बदलने का मु्द्दा कांग्रेस के लिए बड़ा हथियार साबित होगा, ऐसा लगता नहीं है।












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