Uttarakhand By Election: बद्रीनाथ सीट पर उपचुनाव में क्यों हारी भाजपा? क्या रही बड़ी वजह

Uttarakhand By Election Results Live Updates in Hindi: लोकसभा चुनाव में कई दिग्गज नेताओं के हारने के बाद उप चुनाव में भी ये सिलसिला जारी है। पश्चिम बंगाल में हार के बाद उत्तराखंड में भाजपा के निराशा हाथ लगी है। यहां बद्रीनाथ सीट से भाजपा हार गई। इससे पहले लोकसभा चुनाव में यूपी में अयोध्या सीट से बीजेपी हार गई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिस सनातन धर्म की सुरक्षा और बढ़ावा देने के उद्देश्य के धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भाजपा लगातार प्रयास कर रही है, वहीं से हार क्यों मिल रही है?

बीजेपी संगठनात्मक तौर पर काफी मजबूत पार्टी मानी जाती है। लेकिन अब जनता ने भी अपना मंडेट स्पष्ट कर दिया है। उत्तराखंड की बद्रीनाथ सीट पर भाजपा की हार ये साबित करती है। पहले अयोध्या और अब बद्रीनाथ सीट पर आखिर बीजेपी क्यों हार रही है। सबसे बड़ी बात जो सामने आई है कि यहां भाजपा जनता का मिजाज भांपने में विफल रही।

Uttarakhand By Election Results

दावा किया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में ही अंदरखाने बह रही हवा का वो आंकलन नहीं कर पाई और विधानसभा उपचुनाव में गलत प्रत्याशी पर दांव खेलने का खामियाजा हार के रूप में भुगतना पड़ा। शायद यही वजह रही की बीजेपी को यूपी में सबसे बड़ा नुकसान हुआ।

मास्टरस्ट्रोक भी काम नहीं आया
गढ़वाल क्षेत्र में बद्रीनाथ विधानसभा में एकमात्र कांग्रेस के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह भंडारी मोदी और भाजपा की प्रचंड लहर के बावजूद जीते थे। 2024 लोकसभा चुनाव से पहले गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राजेंद्र भंडारी को दिल्ली में भाजपा में शामिल कराया था। बीजेपी इस बदलाव को लोकसभा चुनाव के दौरान मास्टरस्ट्रोक मान रही थी। हलांकि उस चुनाव में सफलता जरूर मिली लेकिन उपचुनाव में फिर बीजेपी को हार गई।

बद्रीनाथ से क्यों हारी भाजपा?
बीजेपी के अंदरखाने में क्या चल रहा है, इसकी जानकारी कम ही निकल कर आती है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से उत्तराखंड में पार्टी के भीतर कुछ अलग स्थितियां जरूर बनी थीं। बताया ये जा रहा है कि राजेंद्र सिंह भंडारी भाजपा में शामिल हुए हैं तब से भाजपा के कार्यकर्ता खुद को असमंजस की स्थिति में थे। यही कारण था कि भाजपा को चुनावी अभियान में सफलता कम ही मिल पाई।

'भंडारी की कट्टर ठाकुरवादी छवि'

बात उत्तराखंड की कर रहे हैं तो यहां बीजेपी के चुनाव प्रचार में अधिकतर कैबिनेट मंत्री, गढ़वाल सांसद, कुमाऊ सांसद, राज्य मंत्रियों सहित खुद मुख्यमंत्री धामी के भी शामिल होने के बाद भी पार्टी कोई बड़ी जीत हासिल नहीं कर पाई। हालांकि राजेंद्र सिंह भंडारी बद्रीनाथ के बड़े नेता माना जाता है। उनके पास बीजेपी का एक बड़ा वोट बैंक भी है। लेकिन भंडारी की पहचान गढ़वाल क्षेत्र के कट्टर ठाकुरवादी की है।

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