Uttarakhand By Election Results: मंगलौर व बदरीनाथ सीट कौन जीत रहा,कांग्रेस या भाजपा किसने बनाई बढ़त
Uttarakhand By Election Results उत्तराखंड में मंगलौर व बद्रीनाथ सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए आज मतगणना जारी है। दोनों सीटों पर रूझानों में कांग्रेस आगे चल रही है।
बता दें कि बदरीनाथ सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा था। लेकिन लोकसभा चुनाव में विधायक राजेंद्र भंडारी ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन की लेकिन इस बार उपचुनाव में वे भाजपा के टिकट पर लड़े और कांग्रेस प्रत्याशी लखपत बुटोला से पीछे चल रहे हैं।

मंगलौर सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी काजी निजामुद्दीन बसपा के प्रत्याशी से आगे चल रहे हैं। मंगलौर में भाजपा तीसरे स्थान पर चल रही है। मंगलौर में कांग्रेस के पूर्व विधायक काजी निजामुद्दीन के सामने भाजपा से करतार सिंह भड़ाना और बसपा से दिवंगत विधायक सरबत करीम अंसारी के बेटे उबेदुर्रहमान अंसारी से है।
10 जुलाई को हुए मतदान में बद्रीनाथ विधानसभा में मत प्रतिशत 51.43% रहा जबकि मंगलौर विधानसभा में मतदान 68.25% रहा। इस तरह बदरीनाथ में काफी कम वोट पड़े। 2022 के विधानसभा चुनाव में मंगलौर में 75.95 जबकि बदरीनाथ में 65. 65 मतदान हुआ था।
बदरीनाथ सीट भाजपा के लिए काफी अहम मानी जा रही है। यहां पर भाजपा ने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस विधायक राजेंद्र भंडारी को अपने पाले में लाकर बड़ा खेल किया। बाद में भंडारी ने विधायक से इस्तीफा दिया। उपचुनाव की घोषणा होते ही पार्टी ने फिर से भंडारी पर दांव खेला। कांग्रेस ने लखपत बुटोला को उतारकर भाजपा के लिए चुनौती बढ़ा दी है। लखपत बुटोला की छवि और लोगों में लोकप्रियता के चलते भाजपा के लिए ये चुनाव आसान नजर नहीं आ रहा है।
कांग्रेस ने चुनाव में राजेंद्र भंडारी को दलबदलू कहते हुए जनता से उन्हें सबक सिखाने की अपील की। अब देखना होगा कि जनता इसे कितना गंभीरता से लेती है। कम वोट पड़ने से दोनों दलों की चिंता भी बढ़ गई है। मंगलोर सीट भाजपा कभी जीत नहीं सकी। इस बार पार्टी ने भड़ाना को लाकर एक नई प्लानिंग की है।
मतदान के दौरान भी मंगलौर में जमकर बवाल हुआ। मंगलौर विधानसभा उपचुनाव के दौरान ग्राम लिब्बरहेड़ी गांव में बूथ संख्या 53/54 के बाहर दो पक्षों के बीच मतदान को लेकर तीखी बहस व मारपीट होने की बात सामने आई। इस सीट पर भी भाजपा की नजर टिकी हुई है। जो कि रुझानों में भी नजर आ रहा है। अगर यही परिणाम रहा तो धामी सरकार और प्रदेश संगठन के लिए आने वाले समय में चुनौती खड़ी हो सकती है।












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