उत्तराखंड में 5 लोकेशन पर विकसित होंगी गोट वैली, जानिए इससे किस किस को होगा लाभ
उत्तराखंड में बकरी पालन को बढ़ावा देने बनेंगी गोट वैली
देहरादून, 27 जुलाई। उत्तराखंड में बकरी पालन को बढ़ावा देने और पर्यटकों के लिहाज से गोट वैली बनाई जाएंगी। प्रदेश सरकार ने 5 लोकेशन का चिह्रित किया है। जहां बकरी पालन की संभावना ज्यादा है। ऐसे में एक तरफ किसानों की आय बढ़ेगी दूसरे तरफ पर्यटन को भी इससे जोड़ा जाएगा। इसको टूरिस्ट के हिसाब से डेवलप किया जाएगा।

अल्मोड़ा के सोमेश्वर, बागेश्वर के पिंडर व गरुड़, रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि और पौड़ी के थलीसैंण चिह्रिनत
प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कई अनूठे प्रयोग कर रही है। इसी दिशा में राज्य सरकार का पशुपालन विभाग गोट वैली विकसित करने के प्लान पर काम कर रही है। प्रदेश के अल्मोड़ा के सोमेश्वर बागेश्वर के पिंडर व गरुड़ रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि और पौड़ी के थलीसैंण को गोट वैली के लिए चिह्रिनत किया गया है। पशुपालन विभाग का दावा है कि इसका उद्देश्य बकरी दूध का उत्पादन बढ़ाना है। इन घाटियों को पर्यटन के लिहाज से भी विकसित किया जाएगा। देहरादून में हुई बैठक में पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस संबंध में अधिकारियों को दिशा.निर्देश भी दिए हैं। एक्सपर्टस का दावा है कि बकरी का दूध प्री.बायोटिकए एंटी इंफेक्शन और एंटी.ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। डेंगू के फैलने पर प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले प्रोडेक्ट के तौर पर भी इसे पहचाना जाता है। बकरी के दूध की डिमांड बीते समय में बढ़ी है। खासकर डेंगू और अन्य बीमारियों में भी इसके दूध को लेकर डिमांड देखी गई है। इसी दिशा में राज्य सरकार एक नए प्रोजेेक्ट पर काम कर रही है। पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा है कि इसी को देखते हुए उत्तराखंड में बकरी पालन की काफी अच्छी संभावनाएं हैं। विभाग ने 5 वैली को गोट वैली के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इससे रोजगार व पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।












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