राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को लेकर बवाल,कांग्रेस ने बताया तानाशाही, भाजपा बोली-हताशा और बौखलाहट
राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज कनक चौक में विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र की भाजपा सरकार का पुतला फूंका। कांग्रेस भवन से कार्यकर्ता जुलूस की शक्ल में कनक चौक पर पहुंचे और यहां गृहमंत्री और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया।
इसके बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ता कनक चौक से भाजपा महानगर कार्यालय की तरफ बढ़ने लगे जिनको पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोका। यहां पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि भाजपा खुले रूप से तानाशाही पर उतर आई है।

पहले अडानी मामले पर प्रधानमंत्री के घिरने पर उन्होंने इतनी उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र यानी संसद में पचास हजार रुपये की गड्डी रखवा दी और आरोप कांग्रेस सांसद पर लगा दिया लेकिन कोई सबूत या सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाई। डॉ जसविंदर सिंह गोगी महानगर अध्यक्ष ने कहा अब गृह मंत्री अमित शाह के बाबासाहब पर दिए अपमानजनक बयान पर घिरे तो ध्यान बंटाने के लिए ये धक्कामुक्की की नौटंकी शुरू कर दी। इस घटना का भी कोई सबूत नहीं है, कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाया जा रहा है।
यह केवल गृहमंत्री में बयान से ध्यान हटाने का स्तरहीन प्रयास है। खुद भाजपा के सांसदों ने एक सुनियोजित पटकथा के तहत विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं को सदन में प्रवेश नहीं करने दिया, उनका रास्ता रोका और धक्कामुक्की की। राहुल गांधी को धक्का दे रहे सांसद को जब उन्होंने हटाया तो यह सब कहानी फैलाई जा रही है ताकि अमित शाह के बयान पर सदन में चर्चा न हो सके। कांग्रेस न तो बाबासाहब के खिलाफ गृहमंत्री के बयान मामले में भाजपा को बचने का रास्ता देगी न राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दायर होने से दबाव में आने वाली है। कांग्रेस का जन्म ही संघर्ष के बीच और संघर्ष के लिए हुए है।
आने वाले समय में यह मामले और जोरशोर से उठाए जाएंगे। भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल राहुल गाँधी पर हुई एफआईआर के विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन को उनकी हताशा और बौखलाहट बताया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि सरेआम सांसदों पर हमला और महिला सांसद के साथ किया दुर्व्यवहार कांग्रेस का असली संविधान विरोधी चेहरा है। मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा चौहान ने कहा कि वीरवार को जो कुछ संसद परिसर में हुआ वह आपातकाल के बाद कांग्रेस द्वारा कूटरचित एक और काला अध्याय था।
नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद की गरिमा को गिराते हुए राहुल गांधी ने एनडीए सांसदों पर हमला किया। इतना ही नहीं घायल बुजुर्ग सांसद का हाल पूछे या खेद जताए बिना राहुल ने दोबारा आकर अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया। इसी तरह नागालैंड से आने वाली एक महिला एसटी सांसद के साथ भी उन्होंने दुर्व्यवहार किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेसी युवराज की अकड़ और घमंड चूर नहीं हुआ है । यही वजह है कि सांसदों को भी वे अपनी प्रजा के समान दुर्व्यवहार करने को अपना पुश्तैनी अधिकार मानते हैं। लेकिन यह उनका दुर्भाग्य है कि देश में कानून का राज है और कानून की नजर में सभी बराबर हैं। बेहतर होता कि राहुल अपने कृत्य के लिए माफी मांगते, लेकिन वे जिस तरह से अपराध के बाद भी वह आचरण कर रहे हैं उसके बाद कानूनी कार्यवाही होना तो लाजिमी है।












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