एक्सप्रेस-वे तैयार करने में हो रहे पेड़ों के कटान को लेकर सामाजिक संस्थाओं का अनोखा विरोध, जानिए पूरा प्रकरण
मोहंड के इलाके में एक्सप्रेस हाईवे का कार्य प्रगति पर
देहरादून, 5 अप्रैल। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे के लिए आशारोड़ी रेंज में पेड़ों के कटान के विरोध में कई सामाजिक संस्थाओं का विरोध प्रदर्शन जारी है। सड़क के लिए पेड़ों के कटान करने के खिलाफ विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता मोहंड के जंगल पहुंचकर जनगीत और दूसरे माध्यम से विरोध जता रहे हैं। बीते दिनों पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच इसको लेकर काफी कहासूनी भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने अलग तरह से प्रदर्शन करते हुए काटकर गिराये गये पेड़ों की जिस भी शाखा पर ठेकेदार के मजदूरों ने कुल्हाड़ी चलाने का प्रयास किया, प्रदर्शनकारी उन शाखाओं पर बैठ गये। यह सिलसिला कई घंटों तक चलता रहा। बाद में कई घंटे तक प्रदर्शन करने के बाद प्रदर्शनकारी लौट गए और इसके बाद फिर से पेड़ों को गिराने का काम शुरू कर दिया गया।
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एलिवेटेड रोड का होना है निर्माण
देहरादून के पास मोहंड के इलाके में एक्सप्रेस हाईवे का कार्य प्रगति पर है। देहरादून क्षेत्र में परियोजना की कुल लंबाई 19.38 किमी है। इसमें उत्तर प्रदेश की सीमा में परियोजना की लंबाई करीब 16 किमी है। दावा किया जा रहा है कि यहां पर निकट भविष्य में एलिवेटेड रोड के माध्यम से गाड़ियों को किसी तरह के जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा। लेकिन इस बीच पड़ रहे जंगल में पेड़ों का कटान भी किया जा रहा है। जिसका कुछ सामाजिक संस्थाएं विरोध कर रही हैं। ये विरोध शुूरूआत में भी हुआ था। जो कि चिपको आंदोलन की तर्ज पर किया जा रहा है। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात युवाओं का इस आंदोलन से जुड़ना है। जो कि पोस्टर बैनर और जनगीत के जरिए सरकार को जगाने में जुटे हैं।
ढाई घंटे में दून-दिल्ली
वरिष्ठ पत्रकार और प्रदर्शनकारी त्रिलोचन भट्ट का कहना है कि यह कटान दिल्ली से देहरादून के सफर का समय कम करने के नाम पर किया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने के बाद दिल्ली से देहरादून ढाई घंटे में पहुंच जाएंगे। यह एक्सप्रेस हाईवे 3 किमी देहरादून की सीमा में और 8 किमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की सीमा घने जंगलों से होकर गुजरेगी, जो शिवालिक पहाड़ियों का हिस्सा है। शिवालिक पहाड़ियों के जंगल अपनी जैव विविधता के लिए मशहूर हैं। यहां सबसे ज्यादा संख्या में साल और सागौन के पेड़ हैं। ज्यादातर पेड़ों की उम्र सौ वर्ष से ज्यादा है। सड़क चौड़ी करने के लिए करीब 14 हजार पेड़ काटे जाने की बात कही गई है। लेकिन, इस गिनती में सिर्फ बड़े पेड़ ही शामिल किये गये हैं। छोटे और मझोले पेड़ कितने काटे जाएंगे, इसकी कोई गिनती रखने की जरूरत नहीं समझी गई।
आरोप-हाईवे पर्यटन उद्योग साबित होने का झांसा
आशोरोड़ी और मोहंड का यह क्षेत्र राजाजी नेशनल पार्क का हिस्सा है। यह हाथियों का गलियारा है और टाइगर व चीते सहित सैकड़ों प्रजाति के वन्य जीव, पक्षी और तितली प्रजाति की हजारों स्पीशीज का यह इलाका पसंदीदा निवास है। प्रदर्शन की अगुवाई कर रही संस्था सिटीजन फाॅर ग्रीन दून के हिमांशु अरोड़ा कहते हैं, दिल्ली से देहरादून वापस लौटते हुए घुमावदार पहाड़ियां शुरू होते ही पहाड़ों का खुशनुमा एहसास मन को तरोताजा कर देता है। अरोड़ा कहते हैं कि यह चौड़ी सड़क देहरादून आने वालों से यह खुशनुमा एहसास छीन लेगी। सौ किमी प्रति घंटे की रफ्तार से भागने वाली गाड़ियों में बैठे लोगों को यह सब देखने और महसूस करने का समय ही नहीं मिल पाएगा। सोशल एक्टिविस्ट इरा चौहान कहती हैं, इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने से दो-ढाई घंटे में दिल्ली पहुंचने और यह हाईवे पर्यटन उद्योग साबित होने का झांसा दिया गया है। इसके खतरों से अनजान भोली-भाली जनता इस तथाकथित विकास के प्रचार-प्रसार में शामिल हो गई है, वह नहीं समझ पा रही है कि हम देहरादून को देश के तमाम अन्य शहरों की तरह एक गर्म, दुर्गम, प्रदूषित और भीड़भाड़ वाले शहर में बदलने की राह पर चल पड़े हैं।












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