Uniform civil code लागू करने में कहां फंसा पेंच,जानिए क्या उठाया गया कदम... और कितना इंतजार
Uniform civil code: समान नागरिक संहिता यूसीसी को उत्तराखंड में राज्य स्थापना दिवस पर लागू किए जाने की चर्चा थी, लेकिन फिलहाल इसमें अभी समय लग सकता है। इस समय यूसीसी नियमावली विधायी के पास है। ऐसे में इसके सभी तरह के तकनीकी पेंच को सुलझाने में लगी है।
विधायी द्वारा यूसीसी के तकनीकी पक्षों पर विचार जारी है। समान नागरिक संहिता अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्व आईएएस शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में चार सदस्यीय क्रियान्वयन समिति का गठन किया गया है।

यह समिति यूसीसी लागू करने से संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों व कर्मियों के प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, पोर्टल आदि में मार्गदर्शन और परामर्श सहायता देगी। लेकिन विधायी द्वारा यूसीसी के तकनीकी पक्षों पर अभी विचार जारी है।
समिति में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़, अपर पुलिस महानिदेशक अमित सिन्हा और स्थानीय आयुक्त अजय मिश्रा शामिल हैं। समिति के सदस्य ड्राफ्ट और नियमावली तैयार करने में अहम भूमिका निभा चुकी है। ऐसे में अब विधायी कार्य में सहायता मिलेगी। नियमावली का ड्राफ्ट सरकार को सौंपने के बाद माना जा रहा था कि राज्य स्थापना दिवस पर इसे लागू किया जाएगा।
लेकिन विधायी अभी इसका बारीकी से परीक्षण करा रही है। माना जा रहा है कि केदारनाथ उपचुनाव निपटने के बाद ही इस पर फैसला होगा। ऐसे में नए साल तक का इंतजार भी करना पड़ सकता है। 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा की दोबारा सरकार आने पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की बात की। सरकार बनते ही सीएम धामी ने पहली कैबिनेट की बैठक में समान नागरिक संहिता बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया और 27 मई 2022 को उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय समिति गठित की।
इसके लिये 43 जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किये जाने पर समिति को विभिन्न माध्यमों से लगभग 2.33 लाख सुझाव प्राप्त हुए। प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर समिति ने उनका रिकॉर्ड समय में विश्लेषण कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट 02 फरवरी 2024 को सरकार को सौंपी तथा 7 फरवरी को विधान सभा द्वारा पारित कर 11 मार्च को राष्ट्रपति द्वारा इसे स्वीकृति प्रदान की है। इसके बाद नियमावली के लिए समिति का गठन किया गया। जो कि अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुके हैं। अब विधायी के सारे पक्ष समझने के बाद ही यूसीसी लागू होने का इंतजार हो रहा है।












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