UKSSSC पेपर लीक: रिजॉर्ट में रूकाकर याद कराए 80 प्रश्न, रातों रात छोड़े गए एग्जाम सेंटर, ऐसे तैयार हुआ गिरोह
UKSSC पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने 6 आरोपियों को धरा
देहरादून, 25 जुलाई। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा के पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने पेपर लीक करने वाले गिरोह का भांडाफोड किया है। एसटीएफ ने इस मामले में 6 आरोपियों को अरेस्ट किया है। जिसमें आयोग की गोपनीय कामों को करने वाली आउटसोर्स कंपनी का कंम्प्यूटर प्रोगामर मास्टरमांइड निकला है। जिसने पेपर लीक करने के एवज में 60 लाख रूपए लिए थे। इस गिरोह में आयोग से निष्कासित पूर्व पीआरडी कर्मचारी, कोचिंग सेंटर का डायरेक्टर भी शामिल था। एसटीएफ ने पेपर लीक मामले मेें 37.10 लाख रूपए कैश बरामद किए हैं। खास बात ये है कि परीक्षा से एक दिन पहले लाभ लेने वाले परीक्षाथियों को रामनगर के एक रिजॉर्ट में पेपर को हल करवाया गया और रातों रात परीक्षार्थियों को एग्जाम सेंटर तक भी पहुंचाया गया।

दिसंबर 2021 में हुई थी परीक्षा
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने दिसम्बर 2021 में स्नातक स्तर की परीक्षा आयोजित की थी। जिसमें अनियमितता और गड़बड़ी को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक शिकायत पहुंची। इसके बाद सीएम धामी ने डीजीपी अशोक कुमार को मुकदमा दर्ज करने को कहा। पुलिस ने रायपुर थाने में केस दर्ज कर मामले की पड़ताल की तो सारे मामले की सच्चाई सामने आ गई।

मास्टरमाइंड का आयोग से है कनेक्शन
उत्तराखंड डीआईजी एसटीएफ सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने बताया कि पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो पता चला कि अल्मोडा निवासी मनोज जोशी पुत्र बालकिशन जोशी वर्ष 2014, 2015 से वर्ष 2018 तक रायपुर स्थित अधीनस्थ चयन सेवा आयोग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पीआरडी के रूप में तैनात था। वर्ष 2018 में विभागीय शिकायत पर मनोज को आयोग से हटा दिया गया। इससे पूर्व यह कर्मचारी 12 वर्ष तक लखनऊ सूर्या प्रिंटिंग प्रेस में कार्य कर चुका था। दूसरा आरोपी देहरादून निवासी जयजीत दास पुत्र विमल दास निवासी पण्डितवाड़ी थाना कैण्ट आउटसोर्स कम्पनी आरएमएस टेक्नोसोल्यूसन इण्डिया प्रालि के माध्यम से कम्पयूटर प्रोग्रामर के रूप में वर्ष 2015 से कार्यरत था। यही कम्पनी अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के गोपनीय कार्य करती आ रही है। यहीं से जयजीत दास की जान पहचान मनोज जोशी से हुई थी।

ऐसे तैयार हुआ गिरोह
एसएससी आयोग कार्यालय में मनोज जोशी निवासी ग्राम पाटी जिला चम्पावत का भी परीक्षाओं के कार्यक्रम के सम्बन्ध में जानकारी के लिए आना जाना लगा रहता था जिस कारण इसकी पहचान मनोज जोशी से हुई। मनोज जोशी भी विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। जिस कारण उसका आरोपी कुलवीर सिंह चौहान निवासी चांदपुर बिजनौर उ0प्र0 से मुलाकात हुई जो कि करनपुर डालनवाला में संचालित डेल्टा डिफेन्स कोचिंग इन्स्टीटयूट एकेडमी सेन्टर में कोंचिग ले रहा था और बाद में वहा पढ़ाने का कार्य करने लगा।

60 लाख में तय हुई डील
60 लाख में तय हुई डील
डेल्टा डिफेन्स कोचिंग इन्स्टीटयूट एकेडमी सेन्टर में कुलबीर डायरेक्टर के पद पर था। डायरेक्टर कुलवीर के माध्यम से शूरवीर सिंह चौहान नि0 कालसी देहरादून की पहचान मनोज जोशी पुत्र रमेश जोशी से हुई। सितारगंज में गौरव नेगी नजीमाबाद किच्छा ऊधमसिंह नगर की मुलाकात मनोज जोशी से हुई थी जो कि किच्छा में ही प्राईवेट स्कूल में शिक्षक था और ग्रुप सी में स्नातक स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। शूरवीर व कुलवीर द्वारा अपने जान पहचान के परीक्षार्थियों के सम्बन्ध में मनोज जोशी को बताया था ।जिसपर मनोज जोशी ने दूसरे मनोज जोशी जोशी के साथ मिलकर कम्पयूटर प्रोग्रामर जयजीत दास से पेपर लीक कराने के सम्बन्ध में बताकर जयजीत दास को मनोज के माध्यम से 60 लाख रूपये दिये थे।

रिजॉर्ट में याद कराए गए प्रश्न, रातों रात हुआ खेल
जयजीत दास ने यूकेएसएससी में जाकर पेपरों की सेटिंग और अन्य तकनीकी कार्यों के कारण परीक्षा के प्रश्न एक्सट्रैक्ट कर लिए फिर उन प्रश्नों को मनोज जोशी के माध्यम से मनोज जोशी कोचिंग डायरेक्टर कुलवीर सिंह शूरवीर सिंह गौरव आदि के माध्यम से परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों को परीक्षा की तिथि से 01 दिन पहले रामनगर स्थित एक रिसोर्ट में मनोज के नाम से 03 कमरे बुक कराए गए। रिसोर्ट में उक्त लीक प्रश्नों को याद कराकर छात्रों को रातों रात एग्जाम सेंटर तक छोड़ दिया गया था। यह मामला सीएम के संज्ञान में लाने के बाद ही खुल पाया। दावा किया जा रहा है कि एक कैंडिडंेंट से 15-15 लाख रूपए लिए गए हैं।












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