उत्तराखंड में कांग्रेस की हार पर हुआ दो दिनों तक मंथन, मुस्लिम तुष्टीकरण पर फोड़ा हार का ठीकरा
चुनाव में कांग्रेस की करारी हार को लेकर मंथन पूरा
देहरादून, 23 मार्च। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार को लेकर मंथन पूरा हो चुका है। जिसमें सीनियर नेताओं ने हार का ठीकरा भाजपा का आखिर में पोलराइजेशन करने, मुस्लिम तुष्टिकरण पर फोड़ा है। इसके साथ ही टिकटों के वितरण, आपसी कलह आदि कई मुद्दों को भी हार का कारण माना गया है। हार की समीक्षा की रिपोर्ट तैयार करने के बाद अब राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडेय और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेंगे।

प्रत्याशियों से बंद कमरे में लिया गया फीडबैक
प्रदेश में कांग्रेस की हार पर दो दिन तक समीक्षा बैठक की गई है। सोनिया गांधी के निर्देश पर राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडेय और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने सभी प्रत्याशियों के सामने हार के कारणों पर खुलकर बात की। इसके बाद सभी को एक-एक कर सुना गया। जो कि बंद कमरे में हुई है। बैठक में प्रत्याशियों ने पार्टी में नेताओं की गुटबाजी को भी हार की वजह माना है। जिसका इशारा हरीश रावत और प्रीतम सिंह खेमा प्रमुख वजह बताई गई है। साथ ही सबसे ज्यादा समीक्षा में मुस्लिम यूनिवर्सिटी का मुद्दा छाया रहा। पार्टी के नेताओं ने चुनाव के समय उठाए गए मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मामले से पार्टी को नुकसान को प्रमुख वजह माना है। मीडिया को दी गई जानकारी में खुद अविनाश पांडेय ने पोलराइजेशन का जिक्र किया। जिससे कांग्रेस को नुकसान होने का दावा किया गया है। इसके साथ ही मोदी फैक्टर और कोरोना काल में लोगों को मुफ्त राशन के कारण पार्टी को सबसे बड़ा नुकसान होने की भी बात बैठक में सामने आई। पार्टी के कई प्रत्याशियों और विधायकों ने टिकट वितरण में देरी और टिकट में हुए बदलाव को भी प्रमुख कारण माना है। जिसके कारण पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही नेताओं की आपसी खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप को लेकर भी पार्टी के कुछ प्रत्याशियों ने खुलकर एक दूसरे के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है। इसके साथ ही चुनाव बाद कार्यकारी अध्यक्ष रहे रणजीत रावत के बयान को भी पार्टी ने गंभीरता से लिया है। जिस पर कार्रवाई करने का दावा किया जा रहा है। रणजीत रावत ने पूर्व सीएम हरीश रावत पर पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगाया है।
रिपोर्ट के बाद होगी जिम्मेदारी तय
दो दिन तक देहरादून में मंथन करने के बाद अब राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडेय और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव हाईकमान को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। जिसके बाद सीनियर नेताओं के भविष्य का भी फैसला होना है। माना जा रहा है कि हार की जिम्मेदारी भी पार्टी तय कर सकती है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का इस्तीफा पहले ही पार्टी ले चुकी है। लेकिन गोदियाल समर्थकों का दावा है कि एक बार फिर पार्टी उन्हें फिर से कमान सौंप सकती है। जिसके लिए कई सीनियर नेता अभी से लॉबिंग में जुटे हैं। पार्टी को अब प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का चयन करना है। जिसको लेकर विधायक और सीनियर नेता लॉबिंग करने में जुटे हैं। इस सूची में प्रीतम सिंह, यशपाल आर्य, तिलकराज बेहड़, भुवन कापड़ी, राजेन्द्र भंडारी, सुमित ह्रदयेश समेत कई विधायक कतार में बताए जा रहे हैं। जो कि पार्टी की हार की समीक्षा के बाद ही तय हो पाएगा। इस बीच पार्टी के सीनियर नेताओं की जुबानी जंग भी बंद हो गई है। जिसको लेकर हाईकमान की ओर से भी सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं।












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