उत्तराखंड: त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद कौन बनेगा मुख्यमंत्री ? दौड़ में आगे ये 5 नाम
देहरादून। देहरादून। उत्तराखंड बीजेपी में चार दिन के सियासी घमासान के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 4 बजे राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। अब राज्य में नये मुख्यमंत्री के चयन की तैयारी तेज हो गई है। राज्य के पर्यवेक्षक रमन सिंह और दुष्यंत गौतम राजधानी देहरादून में जमे हुए हैं। सीएम के इस्तीफा देने के बाद पर्यवेक्षकों की देख रेख में विधायक दल की बैठक हमें नया सीएम चुना जाएगा। त्रिवेंद्र सिंह रावत के पद छोड़ने के साथ ही इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि उत्तराखंड का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा ?

धन सिंह रावत
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद उत्तराखंड की कुर्सी के सबसे प्रमुख दावेदारों में धन सिंह रावत का नाम सबसे आगे है। त्रिवेंद्र कैबिनेट में उच्च शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धन सिंह रावत को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का करीबी माना जाता है। इसके साथ ही उन्हें संघ का आशीर्वाद भी प्राप्त है। जमीनी नेता के रूप में अपनी पहचान रखने वाले धन सिंह रावत भाजपा को इस वजह से भी मुफीद हैं क्योंकि राज्य में अगले वर्ष ही चुनाव होने हैं। इसके साथ ही उनके नाम पर सीएम त्रिवेंद्र को भी सहमति देने में आसानी होगी जो धन सिंह के पक्ष में जा रहा है। हालांकि दूसरे दावेदार भी हैं।
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सतपाल महाराज
त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह लेने के लिए जो नाम खूब चर्चा में है वह सतपाल महाराज का है। सतपाल महाराज एक धर्मगुरु हैं और एक विशेष वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ है। 2016 में यही मार्च का महीना था जब हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार को गिराने की कोशिश हुई थी और कांग्रेस के कई विधायकों ने बगावत कर दी थी। उस समय सतपाल महाराज कांग्रेस में थे और उनकी पत्नी अमृता रावत विधायक थीं। सतपाल महाराज की यही कांग्रेसी पृष्ठभूमि उनकी और सीएम की कुर्सी के बीच बाधा बन सकती है।

अनिल बलूनी
धन सिंह और सतपाल महाराज के साथ एक और नाम चर्चा में है वह अनिल बलूनी का है। बलूनी इस समय उत्तराखंड से भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं। अनिल बलूनी की खासियत यह है कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का वरदहस्त प्राप्त है जो दूसरे दावेदारों पर भारी पड़ सकता है। राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहे बलूनी को पार्टी अब तक राज्य की राजनीति से अलग केंद्रीय भूमिका में अधिक जिम्मेदारी देती रही है लेकिन मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम भी तेजी से बना हुआ है। त्रिवेंद्र सिंह रावत की केंद्रीय नेताओं से मुलाकात के बाद बलूनी के साथ बैठक से इसको और बल मिला है।

अजय भट्ट
नैनीताल से सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का नाम भी एक वर्ग से रेस में सामने आ रहा है। अजय भट्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को लोकसभा चुनाव में पटखनी दी थी जिससे उनका कद बढ़ा हुआ है। लेकिन 2017 में चुनाव के बाद भी वह दावेदार थे लेकिन विधायक दल से उनका नाम खारिज हो चुका था। साथ ही उत्तराखंड का जातीय समीकरण भी उनके हक में नहीं है। उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल और कुमाऊं के साथ ही ब्राह्मण और क्षत्रिय संतुलन भी साधा जाता रहा है। उत्तराखंड बीजेपी के अध्यक्ष कुमाऊं से हैं और ब्राह्मण हैं जबकि त्रिवेंद्र सिंह रावत क्षत्रिय और गढ़वाली। अगर पार्टी अजय भट्ट को सीएम बनाती है तो सीएम और अध्यक्ष दोनों पद कुमाऊं में पहुंच जाएंगे जो अगले साल होने वाले चुनाव में गढ़वाली मतदाताओं की नारजगी बन सकते हैं।

रमेश पोखरियाल निशंक
अगर पार्टी राज्य के विधायकों के अलावा दूसरे नेता को सीएम की कुर्सी पर बिठाना चाह रही होगी तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का नाम भी आ सकता है। संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले निशंक पहले भी राज्य की कमान संभाल चुके हैं।












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