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Timmarsain Mahadev छोटा अमरनाथ या बाबा बर्फानी के दर्शनों को उमड़ा आस्था का सैलाब, जानिए कहां-कैसे करें यात्रा

Timmarsain Mahadev चमोली जिले में स्थित सीमांत क्षेत्र नीती घाटी में 'छोटा अमरनाथ' या बाबा बर्फानी के नाम से विख्यात टिम्मरसैंण महादेव के दर्शनों के लिए इन दिनों आस्था का जनसैलाब उमड़ रहा है। वर्तमान शीतकालीन यात्रा के दौरान प्रतिदिन 500 से 1 हजार श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम आवागमन और सीमांत क्षेत्रों में पुलिसिंग को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पँवार ने नीती घाटी का दौरा किया। भ्रमण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने टिम्मरसैंण महादेव पहुँचकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं से सीधा संवाद किया।

Timmarsain Mahadev massive surge devotees flocked darshan Chhota Amarnath Baba Barfani how where

उन्होंने यात्रियों से यात्रा मार्ग की स्थिति, सुरक्षा और ठहरने की व्यवस्थाओं के बारे में फीडबैक लिया। श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन के अनुभव साझा किए और पुलिस की उपस्थिति पर संतोष व्यक्त किया। आगामी अप्रैल माह में नीती घाटी में एक भव्य 'अल्ट्रा मैराथन' का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है।

इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की महत्ता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा और पुलिस चौकियों की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। मैराथन के रूट और सुरक्षा मानकों को देखते हुए सुराईथोटा और मलारी चौकियों का निरीक्षण किया गया। एसपी चमोली ने स्पष्ट किया कि इस मार्ग पर पड़ने वाली प्रत्येक पुलिस चौकी की भूमिका सबसे अहम होगी।

टिम्मरसैंण महादेव

उत्तराखंड के चमोली जिले की नीती घाटी में स्थित एक पवित्र गुफा है। जिसे प्राकृतिक बर्फ से बने शिवलिंग के कारण 'छोटा अमरनाथ' या 'बाबा बर्फानी' कहा जाता है। यह जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ मंदिर के बर्फ के शिवलिंग की प्रतिकृति है और सर्दियों में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनती जा रही है।

यह समुद्र तल से 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर है।नीती घाटी में स्थित होने के कारण, भारत-चीन सीमा के पास होने के कारण यहां जाने के लिए विशेष परमिट की आवश्यकता होती है।

कैसे पहुंचे-चमोली के जोशीमठ से नीती गांव तक सड़क मार्ग से और फिर गुफा तक लगभग 3 किमी पैदल ट्रेकिंग करनी पड़ती है, जिसके लिए परमिट आवश्यक है।

यात्रा का समय- मुख्य रूप से सर्दियों (दिसंबर-मार्च) में, जब बर्फ का शिवलिंग बनता है और घाटी खुलती है।

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