उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार की मुश्किलें बढ़ाएगा अपनी ही पुरानी सरकार का ये बड़ा फैसला
चुनाव आते ही फिर से उठने लगी 4 जिलों को बनाने की मांग, बीजेपी के लिए टेंशन की वजह बनी अपनी ही सरकार की घोषण
देहरादून, 25 अगस्त। चुनावी साल में बीजेपी सरकार के लिए मुश्किलें कम होनें का नाम नहीं ले रही है। 2011 में बीजेपी सरकार में मुख्यमंत्री रहे डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने 4 नए जनपदों की घोषणा की थी, लेकिन 10 साल बाद भी नए जिले अस्तित्व में नहीं आ पाए हैं। चुनावी साल में एक बार फिर स्थानीय लोग नए जिलों की मांग करने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अलावा इन क्षेत्रों के विधायक भी पृथक जनपद बनाने की मांग को लेकर विधानसभा में सरकार की मुश्किलें बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

4 में से 3 क्षेत्रों में बीजेपी का प्रतिनिधित्व
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम बात ये है कि जिन 4 जनपदों उत्तरकाशी से यमुनोत्री, गढ़वाल से कोटद्वार, अल्मोड़ा से रानीखेत और पिथौरागढ़ से डीडीहाट की मांग हो रही है, उनमे 3 क्षेत्र से वर्तमान में बीजेपी के ही विधायक चुनकर आए हैं। यमुनोत्री, कोटद्वार, डीडीहाट सीट पर बीजेपी के ही विधायक प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जबकि रानीखेत सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। ऐसे में बीजेपी के सामने चुनाव में जाने से पहले इन विधायकों की साख भी दांव पर लगी है। अगर बीजेपी इन जिलों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं करती तो इन क्षेत्रों में विधायकों को चुनाव के दौरान जनता के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह से विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को इन चारों सीटों पर हार-जीत का गणित भी बिठाने की चुनौती सामने है।
स्थानीय लोगों ने तेज किया आंदोलन
उत्तराखंड में पूर्व में घोषित चार पृथक जनपदों में शामिल यमुनोत्री समेत चारों जनपदों को अस्तित्व में लाने के लिए सभी क्षेत्र में विशाल मशाल जुलूस और विरोध प्रदर्शन किया गया। यमुनोत्री में मशाल जुलूस में संघर्ष समिति के सदस्यों सहित व्यापार मंडल एवं क्षेत्र के बड़ी संख्या में शामिल लोगों ने एक स्वर में उत्तरकाशी जिले की रवांईघाटी यमुनोत्री को अलग जिला बनाने की मांग की। चार पृथक जनपद बनाओ संघर्ष समिति उत्तराखंड के केंद्रीय अध्यक्ष अब्बल चन्द कुमांई ने कहा कि वर्ष 2011 में तत्कालीन सरकार द्वारा उत्तरकाशी से यमुनोत्री, गढ़वाल से कोटद्वार, अल्मोड़ा से रानीखेत और पिथौरागढ़ से डीडीहाट को पृथक जनपद बनाने की घोषणा की थी। लेकिन, आज 10 साल बीतने के बाद भी घोषित उक्त चारों पृथक जनपद अपने अस्तित्व में नही आ पाये हैं। जिससे क्षेत्र के लोगों में सरकार की बेरुखी के कारण भारी आक्रोश है। अब्बल चन्द कुमांई ने बताया कि चारों क्षेत्र की जनता एकजुट होकर इस आंदोलन को लड़ रही है। उन्होंने कहा कि इस विधानसभा सत्र में यदि प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में घोषित पृथक जिलों को अस्तित्व में लाने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो लोगों को आगे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसका खामियाजा सरकार को आगामी विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।
कांग्रेस की मांग, सीमांकन और मुख्यालय हो तय
रानीखेत से कांग्रेस विधायक करन माहरा ने बताया कि क्षेत्र में जनपद की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर गए हैं। उन्होंने कहा कि वे जिलों की मांग को लेकर विधानसभा में भी सवाल उठा रहे हैं। जिसमें सबसे अहम जिले का सीमाकंन और मुख्यालय तय करना भी है। करन माहरा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने चुनावी फायदे के लिए पृथक जिलों की घोषणा तो कर दी लेकिन न तो इसका सीमांकन और नहीं मुख्यालय तय किया जिसको लेकर स्थानीय लोगों में विरोध है। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से तुंरत निर्णय लेने की मांग की। यमुनोत्री विधायक और भाजपा नेता केदार सिंह रावत ने स्थानीय जनता की भावनाओं को देखते हुए नए जिले का समर्थन किया। और विधानसभा में इस मसले पर समर्थन करने की बात की है। लेकिन सवाल ये भी उठ रहा है कि जब 4 में से 3 विधायक सत्ताधारी दल के ही इन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं तो बीजेपी अब तक इस मुद्दे पर कोई फैसला क्यों नहीं ले पाई हैा












Click it and Unblock the Notifications