उत्तराखंड में सबसे पहले सामने आएगा कांग्रेस का चुनावी मैनिफेस्टो, दिखेगी 'हरदा' की झलक

उत्‍तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस जुटी तैयारियों मेंं

देहरादून, 26 अगस्त। विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टो को लेकर भी कसरत शुरू कर दी है। कांग्रेस ने जनता के पास जाकर और ऑनलाइन सर्वे के जरिए चुनावी मुद्दे शामिल करने की बात की है। लेकिन कांग्रेस पार्टी की इस पहल से पहले चुनाव अभियान की कमान संभाल रहे हरीश रावत पहले ही सोशल मीडिया और संवादों के जरिए अपने चुनावी मैनिफेस्टो को जनता के सामने रख चुके हैं। अब सवाल ये उठता है कि क्या कांग्रेस के मैनिफेस्टो में हरीश रावत की छाप नजर आएगी या फिर कांग्रेस का मैनिफेस्टो हरीश रावत के मैनिफेस्टो से कुछ अलग होगा।

The election manifesto of Congress will be the first to come out in Uttarakhand, a glimpse of Harda will be seen

पार्टी जुटी मैनिफेस्टो तैयार करने में
उत्तराखंड में चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस पार्टी ने मैनिफेस्टो को लेकर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने सभी बड़े नेताओं से लेकर आम जनता के सुझावों की रिपोर्ट को तैयार 10 सितंबर तक सौंपने की बात की है। इसके अलावा सर्वे और अन्य माध्यमों से भी जनता के सुझावों को शामिल करने की बात की जा रही है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने बताया कि कांग्रेस गांव और जमीनी कार्यकर्ता तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनने के बाद ही सुझावों को शामिल करेगी। इसके लिए जनता और सर्वे दोनेां माध्यमों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि जनता के लिए जो मैनिफेस्टो तैयार हो रहा है। उसमें जनता की समस्या और सुझाव होने चाहिए।

सोशल मीडिया पर नजर आ रही हरीश रावत के मैनिफेस्टो की झलक
कांग्रेस पार्टी एक तरफ जनता के मुद्दों को मैनिफेस्टो में शामिल करने का दावा कर रही है दूसरी तरफ प्रदेश में कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति की कमान संभाल रहे पूर्व सीएम हरीश रावत चुनावी पोस्टर जारी करने के अलावा आए दिन अपने चुनावी विजन को जनता के सामने लाने में जुटे हैं। ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के मैनिफेस्टो में हरीश रावत की छाप होगी। हरीश रावत ने हिंदुत्व कार्ड खेलने के अलावा बेरोजगारी, महिला अपमान, भ्रष्टाचार, दलबदल, कुशासन, महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और ठप्प पड़ा विकास जैसे मुद्दों को अपना चुनावी विजन बताया है। साथ ही श्री गणेश के नाम पर चुनावी मैदान में आने की बात की है। जिससे साफ है कि हरीश रावत पहले ही अपना चुनावी मैनिफेस्टो तैयार कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी जिस मैनिफेस्टो बनाने में जुटी है। वह हरीश रावत के विजन से कितना अलग होगा ये देखना दिलचस्प होगा।

गणेश पोस्टर विवाद में बीजेपी के तीनों सीएम को घसीटा
हरीश रावत के श्री गणेश पोस्टर पर छिड़ा विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हरीश रावत ने अब भाजपा के सब नेताओं को चुनौती देकर कहा है कि क्या जय श्री गणेश का उद्घोष कहीं से भी आपत्तिजनक है? और यदि गणेश गोदियाल जय गणेश का उद्घोष करके भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कुशासन, महंगाई जैसे प्रश्नों पर संघर्ष, प्रहार करते हुए दिखाई देते हैं तो बीजेपी में इतनी बौखलाहट क्यों है। हरीश रावत ने इस पूरे प्रकरण में बीजेपी सरकार के तीनों सीएम को घसीटते हुए कहा कि गणेश गोदियाल इतफाक है कि भगवान श्री गणेश जी का जो नाम है, उनके माता-पिता ने शायद उनके स्वभाव को देखकर वही नाम उनको दिया। हरीश रावत ने बीजेपी के तीनों सीएम पर तंज कसते हुए कहा कि यदि कोई त्रिवेंद्र है और त्रिवेंद्र जैसा काम न करे, कोई तीरथ है तीरथ जैसा काम न करे, कोई पुष्कर है तो वो चारधाम यात्रा प्रारंभ न कर सके। हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर- हर महादेव और श्री गणेश दोनों नारे के साथ चुनावी मैदान में डटकर मुकाबला करेगी। बता दें कि हरीश रावत ने गणेश गोदियाल का एक चुनावी पोस्टर जारी किया है जिसमें गणेश गोदियाल को श्रीगणेश के अवतार में दिखाया गया है। जिसके बाद से बीजेपी और कांग्रेस में ​जुबानी जंग छिड़ी है।

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