SC ने भ्रामक विज्ञापनों के मामले में स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को दी राहत,जानिए क्या है मामला
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापनों के मामले में स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ अवमानना का मामला बंद कर दिया।
पतंजलि आयुर्वेद के खिलाफ भ्रामक विज्ञापनों को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने 2022 में एक याचिका दायर की थी. ये अवमानना का मामला उसी याचिका से जुड़ा हुआ था।

पतंजलि उत्पादों को लेकर चलाए गए भ्रामक विज्ञापनों और दवाओं को लेकर किए गए दावों को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इस तरह बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को बड़ी राहत मिल गई है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 2022 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसमें मॉडर्न मेडिसिन के खिलाफ रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद की अपमानजनक टिप्पणियों का जिक्र किया गया था। याचिका में कहा गया है कि जीवनशैली संबंधी विकारों और अन्य बीमारियों के चमत्कारिक इलाज का वादा करने वाले पतंजलि के विज्ञापनों ने 'ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम', 1954 और 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स', 1954 के तहत कानून का उल्लंघन किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पतंजलि से समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद पतंजलि ने इसको लेकर माफीनामा प्रकाशित किया था।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने नवंबर 2023 से मई 2024 तक घटित घटनाओं के क्रम को देखते हुए कहा कि न्यायालय का मानना है कि प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं स्वामी रामदेव और बालकृष्ण के न्यायालय से माफी मांगने से पहले न्यायालय को दिए गए वचनों का उल्लंघन किया। लेकिन बाद में भी, न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगने के बाद, उन्होंने सुधार करने के लिए कदम उठाने के प्रयास किए हैं। पीठ ने कहा कि उन्होंने ना केवल अपने हलफनामे में व्यक्तिगत रूप से अपने आचरण के लिए खेद व्यक्त किया बल्कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित विज्ञापनों के माध्यम से भी अपनी माफी को प्रचारित किया।












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