Uttarakhand Student Union Elections: यूनिवर्सिटी,कॉलेज और लिंग्दोह कमेटी के बीच फंसा छात्र राजनीति का भविष्य
2 साल से नहीं हुए उत्तराखंड में छात्र संघ चुनाव
उत्तराखंड के 119 महाविद्यालयों और 5 राज्य विश्वविद्यालयों में पिछले दो साल से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। कोविडकाल में चुनाव न होने के कारण छात्र संघ चुनाव लटकते गए। अब एक छात्र संगठनों ने भूख हड़ताल कर छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। इस मामले में सरकार और विश्वविद्यालय आमने सामने आ चुके हैं।

छात्र संगठन आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर चुकी
उत्तराखंड सरकार इसे यूनिवर्सिटी और कॉलेज के बीच का मामला बताकर टालने का प्रयास कर रही है। लेकिन छात्र संगठन अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर चुकी है। लेकिन इस सबके बीच एक नई बहस ये छिड़ी है कि क्या अब इस सत्र में चुनाव कराए जा सकते हैं। दरअसल उत्तराखंड में कॉलेज और यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव कराने के लिए लिंग्दोह समिति की सिफारिशें लागू की जाती हैं। ऐसे में अगर लिंग्दोह समिति की सिफारिशें मानी जाती हैं तो फिर चुनाव कराने का समय निकल चुका है। हालांकि छात्र संगठनों का दावा है कि राज्य सरकार चाहे तो चुनाव कभी भी कराए जा सकते हैं।

उत्तराखंड के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में 2019 के बाद छात्र संघ चुनाव नहीं हुए
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद 2007 से देश के सभी विश्वविद्यालयों में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के आधार पर ही छात्र संघ चुनाव कराने की बात कही गई। उत्तराखंड के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में 2019 के बाद छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। कोविड की वजह से न कॉलेज खुले और नहीं चुनाव कराए जा सके। अब जबकि सब कुछ सामान्य है तो छात्र संगठन चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए कॉलेजों में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। डीएवी में छात्रों ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। लेकिन अब तक इस मुद्दे पर कोई एकजुट राय नजर नहीं आ रही है।

प्रशासनिक नियंत्रण न होने की बात कर पल्ला झाड़ रही यूनिविर्सटी
प्रदेश के अशासकीय कॉलेज एचएनबी गढ़वाल यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड हैं। जबकि अन्य कॉलेज श्रीदेव सुमन यूनिवर्सिटी से संबंद्ध है। यूनिविर्सटी कॉलेजों पर प्रशासनिक नियंत्रण न होने की बात कर पल्ला झाड़ रही है। जबकि कॉलेजों का कहना है कि यूनिवर्सिटी ही तारीख देगी। इस बीच सबसे बड़ी समस्या लिंग्दोह कमेटी की सिफारिशों का पालन करना है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्, सबकी अपनी राय
विश्वविद्यालय का महाविद्यालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है। 2019 में भी इसको लेकर आदेश जारी किया गया था। ऐसे में छात्र संघ की तारीखों का ऐलान करने का विश्वविद्यालय को अधिकार नहीं है।
डॉ पीपी ध्यानी, कुलपति, श्री देव सुमन विश्वविद्यालय
छात्र संघ चुनाव कराने के लिए हमें विश्वविद्यालय की परमिशन चाहिए। हमें चुनाव कराने में कोई परेशानी नहीं है। लेकिन इसके लिए हमें आदेश का इंतजार है।
डॉ वी सी पांडेय, प्राचार्य, डीबीएस कॉलेज

छात्र संघ चुनाव विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के बीच का मामला
छात्र संघ चुनाव कराने के लिए लिंग्दोह कमेटी की सिफारिशों का पालन करना होता है। ये न्यायालय का भी आदेश है। छात्र संघ चुनाव विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के बीच का मामला है। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है।
डॉ देवेन्द्र भसीन, पूर्व प्राचार्य डीएवी कॉलेज
छात्र संघ चुनाव कराने के लिए विश्वविद्यालय के नोटिफिकेशन की आवश्यकता होती है। साथ ही लिंग्दोह कमेटी की सिफारिशें माननी होती है। एकेडमिक सत्र शुरू होने के 45 दिन के बीच में छात्र संघ चुनाव कराना होता है।
प्रो बी ए बौड़ाई, पूर्व अध्यक्ष, प्रिंसिपल काउंसिल

छात्रों की भूख हड़ताल जारी रहेगी
जब तक सरकार छात्र संघ चुनाव कराने का निर्णय नहीं ले लेती तब तक छात्रों की भूख हड़ताल जारी रहेगी। पहले भी लिंग्दोह समिति की सिफारिशों के बिना भी छात्र संघ चुनाव सम्पन्न हुए हैं।
सुमित कुमार, छात्र नेता, डीएवी कॉलेज
हम छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले 4 से ज्यादा संगठन डीएवी कॉलेज में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जब तक हमें उच्च शिक्षा मंत्री या सरकार लिखकर चुनाव की तारीख नहीं देती तब तक हम यहां से नहीं उठेंगे। हम छात्र संघ चुनाव कराकर रहेंगे।
अंकित बिष्ट, एनएसयूआई संगठन












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