उत्तराखंड में अजीब सियासत! BJP ही नहीं, कांग्रेस खेमे को भी मोदी का ही 'सहारा', जानिए कैसे
बीजेपी और कांग्रेस मोदी को लेकर ही चुनावी मैदान में
देहरादून, 4 सितंबर। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने चुनावी शंखनाद कर दिया है। बीजेपी ने गढ़वाल क्षेत्र से जनआशीर्वाद यात्रा के जरिए श्रीनगर सीट से अपनी ताकत दिखाई, इसके बाद अब कुमांउ क्षेत्र में 6 सितंबर को बीजेपी शक्ति प्रदर्शन करेगी। इधर कांग्रेस ने तराई क्षेत्र से परिवर्तन यात्रा का आगाज कर दिया है। जिसमें कांग्रेस अपने सभी नेताओं को एक जुटकर आॅल इज वेल का भी मैसेज देकर कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाने में जुट गई है। दोनों दलों ने चुनावी साल में अपनी पूरी ताकत तो झौंक दी है। लेकिन चुनावी रैलियों में स्थानीय मुद्दों को छोड़कर दोनों दल मोदी और केन्द्र सरकार की योजनाओं को लेकर चुनावी मैदान में नजर आ रही है।

बीजेपी और कांग्रेस में ही मुख्य मुकाबला
2022 का विधानसभा चुनाव बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। इसके लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों दल अपने-अपने तरीके से चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। सबसे पहले बात सत्ताधारी बीजेपी की। बीजेपी की सरकार ने उत्तराखंड में साढ़े 4 साल में 3 सीएम देकर केन्द्रीय योजनाओं को ही आगे बढ़ाने का काम किया है। चुनावी साल में सीएम बदलकर भी बीजेपी ने ये साफ किया है कि वे किसी एक चेहरे को लेकर चुनावी मैदान में नहीं जा रहे हैं। इसके लिए मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ना तय है। इसके अलावा राज्य में बीजेपी की सरकार ने कोई बड़े फैसले भी नहीं लिए जिनको चुनावी मुद्दा बनाया जाए। इतना ही नहीं गैरसेंण को मंडल बनाना, देवस्थानम बोर्ड का गठन, भू कानून, कोरोना में फर्जी टेस्टिंग घोटाले जैसे कई मुद्दों पर पार्टी को बैकफुट पर आना पड़ा है। ऐसे में बीजेपी अपनी सरकार के विवादित फैसलों को पीछे धकेलने के लिए जनता के बीच मोदी की छवि को लेकर चुनावी मैदान में हैं। बीजेपी अपने चुनावी रैलियों में इस बात का जिक्र करती हुई नजर आती है कि विपक्षी दल मोदी सरकार को हराने के लिए एकजुट हो रही है। जो प्रचार-प्रसार बंगाल के चुनाव में दिखा वो ही उत्तराखंड में चुनाव में इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है।
मोदी के पोस्टर को लेकर प्रचार कर रही कांग्रेस
अब बात मुख्य विपक्षी कांग्रेस की जो सत्ता में वापसी को हर तरह के प्रयोग करने में जुटी है। इसके लिए पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष के अलावा इतिहास में पहली बार 4 कार्यकारी अध्यक्ष तक बना डाले। लेकिन मुद्दे अब भी किसान बिल, महंगाई और केन्द्र की मोदी सरकार की योजनाएं। कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति की कमान संभाल रहे पूर्व सीएम हरीश रावत लगातार मोदी के चेहरे पर ही राजनीति करते हुए दिख रहे हैं। तराई क्षेत्र में परिवर्तन यात्रा के दौरान भी कांग्रेस मोदी के पोस्टर लेकर प्रचार-प्रसार कर रही है। साफ है कि 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी मोदी के नाम पर ही चुनावी मैदान में नजर आएंगे। बीजेपी मोदी की योजनाओं का बखान करेंगे तो कांग्रेस मोदी सरकार को घेरती हुई नजर आएगी। कांग्रेस के चुनावी रैलियों में 2022 के चुनाव से 2024 लोकसभा चुनाव को भी टारगेट किया जा रहा है।
मैनिफेस्टो तक सीमित रह जाते हैं मुद्दे
उत्तराखंड एक पहाड़ी प्रदेश है। जिसकी मांग पहाड़ की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए की गई। राज्य आंदोलनकारियों ने गैरसेंण में स्थाई राजधानी के अलावा पलायन, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन लड़ा। बीजेपी और कांग्रेस दोनों सत्ता में रहे। लेकिन किसी भी दल ने पहाड़ी राज्य के हिसाब से फैसले नहीं लिए। ऐसे में आज भी पहाड़ी राज्य की समस्याएं पहाड़ जैसी नजर आती हैं। चुनावी मैनिफेस्टो में पहाड़ के मुद्दें होते हैं लेकिन चुनाव में ऐसे मुद्दे गायब हो जाते हैं।
कांग्रेस के महामंत्री संगठन मथुरा दत्त जोशी का कहना है कि
2022 का चुनाव उत्तराखंडियत को लेकर लड़ा जा रहा है। बीजेपी की सरकार ने अपने कार्यकाल में हर वर्ग का शोषण किया है। कांग्रेस रोजगार, किसान, महिलाओं के सम्मान, महंगाई जैसे जनता के जुड़े मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी। मोदी सरकार की योजनाएं भी इसमें शामिल हैं।
बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता शादाब शम्स ने कहा कि
नरेंद्र मोदी देश का चेहरा हैं। उत्तराखंड चुनाव में मोदी जी के साथ ही स्थानीय मुद्दे भी हैं। कांग्रेस महंगाई को लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। लेकिन 2002 से लेकर अब तक जो भी सरकारें आई उसी औसत से महंगाई हर साल बढ़ी हैं। मोदी सरकार ने कोरोना की लहर और लॉकडाउन में भी महंगाई पर लगाम लगाते हुए आर्थिक स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला है।












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