चुनावी साल में उत्तराखंड में खेल पर भी होगा 'खेला', खेल जगत को अब खेल नीति का इंतजार
चुनावी साल में खेल नीति पर सीएम का फोकस, खिलाडियों को मिल सकती है बडी सौगात
देहरादून, 30 अगस्त। उत्तराखंड में चुनावी साल में राज्य की धामी सरकार हर वर्ग को रिझाने में जुटी है। खेल दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों में भी सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खेल जगत और खिलाड़ियों को भी कई सौगात दी है। साथ ही सीएम ने राज्य में खिलाड़ियों के व्यापक हित में बेहतर खेलनीति बनाने की भी घोषणा की है। सीएम ने कहा कि इससे हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में प्रदेश का नाम रोशन कर सकें। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सीएम बनने के बाद से खेल नीति बनाने को कई बार बात की है। ऐसे में चुनावी साल में खेल जगत से जुड़े लोगों को भी उम्मीदें बढ़ गई है।

न सुविधाएं न उचित सम्मान
पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद से खेल जगत से जुड़े लोग खेल नीति की मांग करते आ रहे हैं।इसके पीछे उत्तराखंड में खेलों को लेकर सुविधाओं का अभाव और खिलाड़ियों को सम्मान न मिलना है। उत्तराखंड के युवा राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का नाम रोशन कर चुके हैं। हरिद्वार की वंदना कटारिया टोक्यो ओलंपिक में हैट्रिक लगाकर पहली भारतीय महिला होने का खिताब अपने नाम कर इतिहास रच चुकी हैं। लेकिन खेल से जुड़ी सुविधाओं और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाएं न होने से कई प्रतिभाओं को आगे आने का मौका नहीं मिल पा रहा है। जिससे बार-बार खेल नीति की मांग उठ रही है। हालात ये हैं कि देहरादून में करीब ढाई सौ करोड़ की लागत से बना राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम भी बदहाल स्थिति में है। 2016 में पूर्व सीएम हरीश रावत की सरकार के दौरान इस स्टेडियम का उद्घाटन किया था। स्टेडियम उत्तराखंड में क्रिकेट प्रेमियों और प्रतिभाओं की सुविधाओं के लिए बनाया गया था लेकिन स्टेडियम के हालात बदहाल हो गए हैं।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व हीरा सिंह बिष्ट का कहना है कि
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में खिलाड़ियों और खेल के लिए गंभीरता से काम होना चाहिए। इसके लिए बजट पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है। राज्य सरकार खेल नीति को लेकर गंभीर नहीं है। जब हम खिलाड़ियों को सुविधाएं और स्टेडियम तक नहीं दे पा रहे हैं। तो कोरी घोषणाओं से कुछ नहीं होने वाला है। उत्तराखंड के बच्चे अपने हुनर से ही खेल के क्षेत्र में अपना और स्टेट का नाम रोशन कर रहे हैं। खिलाड़ियों को हरियाणा की तर्ज पर सुरक्षा, सुविधा और नौकरी मिलनी चाहिए। ये सब खेल नीति से ही संभव हो पाएगा।
खिलाड़ियों को सीएम की सौगात-
-प्रदेश में 8 वर्ष से 14 वर्ष तक की आयु के 50-50 बालक बालिकाओं को उनकी खेल प्रतिभा के अनुसार चिन्हित कर उन्हें प्रति वर्ष मुख्यमंत्री खिलाड़ी उन्नयन छात्रवृत्ति दी जाएगी।
-खिलाड़ियों का दैनिक भत्ता बढ़ाकर 225 रुपए किया जायेगा।
-उधमसिंह नगर में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित किया जाएगा।
-नेशनल गेम्स में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को उत्तराखंड राज्य परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा।
-महाविद्यालयों ,व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 5 प्रतिशत का उत्कृष्ट खिलाड़ी खेल कोटा दिया जाएगा।
-नेशनल गेम्स के पदक विजेताओं को भी एशियन, कॉमनवेल्थ,वर्ल्ड, ओलंपिक पदक विजेताओं की तरह सरकारी सेवा दी जाएगी।
-खिलाड़ियों के प्रदर्शन में उत्कृष्टता लाने के लिए वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक तकनीक को सुनिश्चित करने के लिए 'खेल विज्ञान केंद्र' की स्थापना राज्य खेल विकास संस्थान में की जायेगी।
-ओलंपिक खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों की प्रतिभागिता सुनिश्चित करने के लिए कोच की व्यवस्था की जाएगी।
-महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज देहरादून में 'स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी' बनाए जाने का प्रयास किया जाएगा।
-नेशनल गेम्स, एशियन, कॉमनवेल्थ,वर्ल्ड,ओलम्पिक में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को खेल दुर्घटनाओं , खेल इंजरी एवं अन्य खेल आकस्मिकताओं के दृष्टिगत बीमा ,आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
-राज्य में खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र द्वारा स्पोर्ट्स कांपलेक्स, खेल अकादमी, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए 'मेजर ध्यानचंद निजी क्षेत्र खेल प्रतिभागिता प्रोत्साहन कोष की स्थापना की जाएगी।
-राष्ट्रीय,अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने के लिए खिलाड़ियों को यात्रा मार्ग व्यय, स्पोर्टस किट्स इत्यादि की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
-टेबल टेनिस के खिलाड़ियों के लिये अलग से हॉल की व्यवस्था की जायेगी।












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