Uttarkashi में धराली का सोमेश्वर मंदिर, तबाही में बचा एक मात्र मंदिर, बचाई 200 से ज्यादा जानें, क्या है इतिहास

Uttarkashi Dharali temple: उत्तरकाशी के धराली गांव में 5 अगस्त को प्राकृतिक आपदा से आई बाढ़ ने पूरा गांव तबाह कर दिया। जिसने कई घरों, होम स्टे और होटल और बाजार की तस्वीर ही मिटा दी। धराली गांव की आज की तस्वीर देखें तो इसमें कुछ ​गिने चुने घर और एक मंदिर ही नजर आ रहा है। जो कि धराली का प्राचीन सोमेश्वर देवता का मंदिर है।

ये मंदिर 200 सालों से भी पुराना बताया जा रहा है। हालांकि 20 से 25 साल पहले मंदिर का जीर्णोद्धार भी किया गया। जो तबाही धराली गांव में आई, उसमें ये मंदिर ही नहीं बचा बल्कि इस मंदिर के साथ कम से कम 200 जिंदगियां बच गई। आइए जानते हैं कैसे।

Someshwar temple Dharali Uttarkashi only survived devastation saved 200 lives how what history

मुखबा गांव के निवासी और गंगोत्री मंदिर समिति के पूर्व सचिव मानेंद्र सेमवाल ने बताया कि भटवाड़ी ब्लॉक और हर्षिल घाटी में लगभग हर गांव में सोमेश्वर देवता का मंदिर है। जो कि शिव का रूप माना जाता है। इस पूरी बेल्ट में स्थानीय लोग सोमेश्वर देवता को पूजते हैं और रक्षक मानते हैं। धराली गांव में भी सोमेश्वर का प्राचीन मंदिर है। जिसमें भगवान सोमेश्वर की मूर्ति और डोली की पूजा की जाती है। जो कि मुखबा गांव की तरह ही लकड़ी का बना हुआ है।

5 अगस्त को दिन में हार दूधू मेले का आयोजन

मंदिर में 5 अगस्त को दिन में हार दूधू मेले का आयोजन हो रहा था। मेले में पूरे गांव के 200 से ज्यादा लोग इकट्टठा हुए थे। जिस समय मलबा आया उसी समय पूजा चल रही थी लेकिन चंद सेकेंडो में सैलाब आया और सबकुछ तबाह कर दिया। इस बीच मंदिर बच गया और मंदिर में इकट्ठा 200 से ज्यादा लोग बच गए। उन्होंने बताया कि जिस पहाड़ी से सैलाब आया उसी पहाड़ी पर पौन किमी पर एक नाग मंदिर भी है। वह भी सुरक्षित है। जो हार दूध मेला होता है, वह नाग देवता को ग्रामीण अपने गायों के पहले दूध को चढ़ाने के उपलक्ष में होता है।

सैकड़ों लोगों की जान बच गई

सभी ध्याणियां, बहुयें और परिवार के लोग सोमेश्वर देवता के मंदिर में इकट्ठा होकर दूध एकत्रित करते और भगवान को समर्पित करते हैं। इस पंरपरा से भी कई लोगों की जान बच गई। मंदिर तो बचा ही सैकड़ों लोगों की जान बच गई। सेमवाल बताते हैं कि उनके बुजुर्गों ने बताया कि धराली, हर्षिल मुखबा, और मार्केन्डेय में कल्प केदार समेत 240 मंदिर हुआ करते थे।

240 मंदिर थे

वर्तमान में धराली का कल्प केदार ही एक मात्र मंदिर इनमें से बचा था। जो कि खुदाई में निकला था। यहां सड़क से नीचे मंदिर और शिवलिंग के आसपास पूरा पानी ही पानी रहता था। आज भी 1850 की धराली की फोटो गंगोत्री मंदिर समिति के पास उपलब्ध है। लेकिन इस आपदा में आई मलबा मंदिर से करीब 50 फीट उपर तक पहुंचा हुआ है। जहां तक खोदना और पहुंचना फिलहाल आसान नहीं है।

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