Shri Krishna Janmashtami : राधा श्रीकृष्ण मंदिर, शिव-राधा और पार्वती-कृष्ण के रूप में विराजमान, ये है रहस्य
हरिद्वार के कनखल में स्थित राधा श्रीकृष्ण मंदिर में शिव राधा के रूप में और पार्वती कृष्ण भगवान के रूप में विराजमान हैं।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भक्तों में जबरदस्त उत्साह है। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त इस खास त्यौहार के लिए अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। साथ ही जन्माष्टमी पर हर कोई भगवान श्री कृष्ण के मंदिर में जाकर माथा जरुर टेकते हैं। ऐसा ही एक अनोखा मंदिर उत्तराखंड के हरिद्वार में है। जो कि कुछ खास रहस्यों को लिए हुए है।

हरिद्वार हिंदूओं की आस्था का प्रतीक है यहां भगवान शिव से लेकर कई हिंदू देवी देवताओं के मंदिर है। हरिद्वार के कनखल में स्थित राधा श्रीकृष्ण मंदिर में शिव राधा के रूप में और पार्वती कृष्ण भगवान के रूप में विराजमान हैं। मान्यता है कि अविवाहित अगर सच्चे मन से 40 दिन तक मंदिर में भगवान राधा कृष्ण की पूजा करता है तो विवाह में आ रही बाधा दूर होती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार हरिद्वार ब्रह्मा जी के पुत्र राजा दक्ष की नगरी थी और यहीं भगवान कृष्ण राधा के साथ कनखल में भी विराजते हैं। इस मंदिर का निर्माण लंढौरा रियासत की महारानी ने कराया था। जिसके बाद महारानी की सभी परेशानियां दूर हो गई थीं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार लंडौरा रियासत की महारानी धर्मकौर काफी धर्मप्रिय थीं, वह अपने बेटे की वजह से काफी परेशान रहती थीं। एक बार तीर्थ यात्रा के दौरान वह मथुरा और वृंदावन पहुंचीं, जिसके बाद उन्होंने एक कृष्ण मंदिर बनाने की इच्छा जताई।
मान्यता है कि तब भगवान श्री कृष्ण उनके सपने में आए और कहा कि वह गंगा के किनारे हरिद्वार के कनखल में उनका मंदिर बनवाएं। इसके बाद महारानी धर्मकौर ने कनखल में राधाकृष्ण का यह मंदिर बनवाया। इस मंदिर को सिद्ध और जागृत मंदिर माना जाता है। राधाकृष्ण मंदिर में साल भर वक्त पहुंचते हैं, लेकिन माघ मास की अष्टमी के दिन से मंदिर में पूजा की चालीसा शुरू की जाए तो उसका विशेष महत्व होता है।












Click it and Unblock the Notifications