पीएम के केदारनाथ दौरे को लेकर बवाल जारी, गर्भ गृह के प्रसारण और जूते पहनकर परिक्रमा करने पर कांग्रेस हमलावर
केदारनाथ विधायक ने खडे किए सवाल
देहरादून, 8 नवंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी के केदारनाथ दौरे से भाजपा ने अपने राजनीतिक हित साधने की कोशिश की है। मोदी के मंदिर में पूजा करने के दौरान गर्भ गृह का सीधा प्रसारण और मंदिर प्रांगण में जूते पहनकर परिक्रमा करने के प्रकरण पर कांग्रेस जमकर हमलावर है। कांग्रेस के चुनाव अभियान की कमान संभाल रहे पूर्व सीएम हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने पीएम दौरे को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि केदारनाथ धाम के गर्भगृह से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पूजा का लाइवप्रसारण हमारी धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने वाला कृत्य है। उन्होंने कहा कि पीएम ने धाम से अपने राजनीतिक हित साधने का काम किया है भाजपा को इस कृत्य के लिए देशवासियों से क्षमा मांगनी चाहिए।

केदारनाथ विधायक ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी जी के जूते के साथ केदारनाथ जी की परिक्रमा करने के पीछे मंदिर के प्रांगण को खत्म कर उसे फुटबॉल के मैदान जैसा बनाना है। रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जूता पहन कर केदारनाथ जी के मंदिर की परिक्रमा करने और नंदी जी की पवित्र मूर्ति के पास जाने की सभी हिंदु धर्मावलंबियों ने आलोचना की है। रावत ने कहा कि केदारनाथ मंदिर में अब कोई भी मंदिर के दरवाजे तक जूता लेकर जाता है। आखिर क्या कारण है कि बेहद भक्ति भाव से केदारनाथ मंदिर के दर्शन करने आने वाले यात्री पवित्र परिसर में जूता लेकर जाने का दुस्साहस कर रहे हैं या अनजाने में गलती कर रहे हैं। मनोज रावत ने कहा कि इसके पीछे भी नरेन्द्र मोदी के निर्देशन में केदारनाथ मंदिर के वास्तु और प्रांगण में की गई छेड़खानी सबसे बड़ा कारण है। मनोज रावत का कहना है कि 2017 के बाद भाजपा सरकार ने क्या छेड़खानी की ? 2013 की आपदा से पहले श्रद्धालु अपने जूते मंदिर के प्रांगण के बाद 9 सीढ़ियों के नीचे खोलते थे याने किसी भी हालत में केदारनाथ जी के मंदिर के प्रांगण में जूते नही जाते थे। अब मंदिर के प्रांगण का आकार फुटबॉल के मैदान के बराबर होने के कारण प्रांगण की कोई सीमा रेखा नही है न ही बाउंडरी है न ही गेट। इसलिए मंदिर के दरवाजे तक जूते जाते हैं।
हरदा ने मूर्ति के अनावरण को लेकर किए सवाल खड़े
पूर्व सीएम हरीश रावत पीएम के दौरे से लेकर अब तक लगातार हमलावर हैं, हरीश रावत ने कहा है कि केदारनाथ में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर मैं विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। रावत ने कहा कि हमारी सरकार ने शंकराचार्य जी के समाधि स्थल का चयन, शंकराचार्य जी की ही परामर्श पर किया था। जो कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। हरीश रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने दूसरे स्थान को चयनित किया, मूर्ति का भी स्वरूप बदला, हमें उसमें कोई एतराज नहीं है। हरीश ने कहा कि सरकार को आदि गुरु शंकराचार्य की मूर्ति का अनावरण करने के लिए किसी शंकराचार्य जी के आशीर्वाद के साथ ही प्रारंभ होना चाहिए था, कोई शंकराचार्य जी वहां पर उपस्थित रहते, साधु-महात्मा, महामंडलेश्वर के समूह से वो काम करवाया जा सकता था, आदि शंकराचार्य जी को भी अच्छा लगता और यदि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य जी के साथ भाजपा कुछ परहेज रखती है क्योंकि वो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी हैं, तो फिर आप कोई भाजपा मॉडल के शंकराचार्य जी को ही बुला लेते, उनसे ही करवा लेते। हमारे लिए तो साधु वेश में जो भी है, वो देवता स्वरूप है। साफ है कि कांग्रेस पीएम मोदी के दौरे को लेकर चुनावी साल में हर फैसले को राजनीति से जोड़ने की कोशिश में जुटी है।












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