पहाड़ पर कब चढ़ेगी ट्रेन, जानिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना का काम कब होगा पूरा, इस वजह से है खास
चार धाम के लिए सबसे अहम और पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना 2026 तक पूरी हो जाएगी। आरवीएनएल का दावा है कि 2026 के अंत तक रेल चलनी शुरू हो जाएगी। सुरंगों की खोदाई का कार्य करीब 70 फीसदी पूर्ण हो गया है। दावा है कि वर्ष 2025 तक सुरंगों की खोदाई का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। आरवीएनएल का दावा है कि 2026 के अंत तक रेल चलनी शुरू हो जाएगी।

रेलवे विकास निगम (आरवीएनएल) से मिली जानकारी के अनुसार मुख्य व सहायक सुरंगों की कुल 213 किमी में से 153 किमी खोदाई हो चुकी है। मुख्य सुरंगों की कुल लंबाई 104 किमी है। जिसमें से 75 किमी की खोदाई हो चुकी है। सभी सहायक सुरंगें हाईवे से जोड़ी जाएंगी। जिससे कि आवश्यकता पड़ने पर यात्रियों को सीधे हाईवे पर निकाला जा सके।
आरवीएनएल के अधिकारियों ने बताया कि उनकी कोशिश है कि जून माह तक पटरी बिछाने का कार्य शुरू कर दिया जाए। परियोजना में कुल 16 रेलवे पुल भी हैं जिनमें से चंद्रभागा, गूलर, लक्ष्मोली व श्रीनगर के रेलवे पुल बन कर तैयार हो चुके हैं। शेष 12 पुलों का निर्माण कार्य भी 50 फीसदी पूर्ण हो चुका है।
परियोजना में कुल 12 स्टेशन हैं। जिनमें से वीरभद्र और योगनगरी रेलवे स्टेशन बन कर तैयार हो चुके हैं। अब 10 स्टेशन बनने हैं। स्टेशन निर्माण के लिए अगस्त तक टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी। बड़े स्टेशनों में श्रीनगर व कर्णप्रयाग शामिल हैं। जनासू व देवप्रयाग स्टेशनों का कुछ हिस्सा टनल के भीतर है। बाकी सभी स्टेशन टनल के बाहर हैं।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना
- परियोजना में कुल 12 स्टेशन हैं।
- देवप्रयाग व जनासू के बीच बन रहीं देश की सबसे लंबी दो सुरंगें
- नवंबर तक पूरा हो जाएगा इन दोनों सुरंगों की खोदाई का कार्य
- यह दो सुरंग देवप्रयाग और जनासू के बीच बन रही हैं।
- दोनों सुरंगों का निर्माण तय समय से पूर्व अक्टूबर व नवंबर 2024 तक हो जाएगा।
- 125 किमी लंबी ब्राडगेज रेल लाइन 17 सुरंगों से करीब 104 किमी का सफर तय करेगी।
- इनमें सिर्फ तीन सुरंग ही ऐसी हैं, जिनकी लंबाई तीन किमी से कम हैं।
- 12 सुरंगों की लंबाई तीन किमी से अधिक है।












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