Raksha bandhan 2025: तुलसी, अपराजिता, बेल, सुगंध हर्बल से तैयार सीड राखियां, पहनने के बाद ऐसे बनाएं हर्बल पौधा
Raksha bandhan 2025 रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में धूमधाम शुरू हो गई है। बाजार में आकर्षक ईको फ्रेंडली सीड राखियों की धूम नजर आ रही है। जो कि पर्यावरण अनुकूल बीज से राखी तैयार की गई है। इस राखी की खासियत ये है कि इसमें तुलसी, अपराजिता, बेल एवं अन्य सुगंध हर्बल प्लांट के सीड से राखियां तैयार की गई है।
ये राखियां बाद में गमले में भी रौपी जा सकती है, जिससे एक सुंदर हर्बल पौधा तैयार किया जा सकता है। देहरादून प्रशासन ने स्कूली बच्चों को सीड राखियां बांटकर सेव एनवायरनमेंट का संदेश दिया है। रक्षाबंधन के लिए देहरादून महिला स्वयं सहायता समूहों ने पर्यावरण के अनुकूल खास सीड राखियां तैयार की है।

ये राखियां न केवल भाई-बहन के पवित्र बंधन का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी एक रचनात्मक और सकारात्मक परिवर्तन लाने की पहल है। तुलसी, अपराजिता, बेल, अश्वगंधा, सूरजमुखी एवं कई अन्य सुगंध हर्बल प्लांट के बीजों को इन राखियों में पिरोया गया है। रक्षाबंधन के बाद इन राखी को गमले में रोप देने से सुंदर हर्बल पौधा जन्म लेगा। महिला समूहों द्वारा निर्मित इको फ्रेंडली बीज राखियों की बाजार में धूम मची है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु आयुष विभाग देहरादून ने बीज राखी वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बीज राखियों का अनावरण करते हुए स्कूली बच्चों को राखियां वितरित की और सभी को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं भी दी।
सीडीओ ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहनों के अटूट प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर इन सुंदर ईको फ्रेंडली सीड राखियों को बांधे। कार्यक्रम के दौरान सीड राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया गया।
जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी ने कहा कि सीड राखी' ऐसी राखी है जिसमें प्राकृतिक बीज संलग्न किए गए हैं। रक्षाबंधन के बाद इस राखी के कागज को मिट्टी में दबाया जा सकता है, जिससे कुछ ही समय में एक नया हर्बल पौधा अंकुरित होगा।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों, युवाओं और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करना है। देहरादून ऋषिकेश में भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के अंतर्गत मोहिनी स्वयं सहायता समूह, हरिओम स्वयं सहायता समूह सहित 09 महिला समूहों द्वारा ईको फ्रेंडली राखियां तैयार की जा रही है।












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