Pushkar Singh Dhami: लखनऊ के ND Hostel के कमरा नंबर 119 में रहते थे धामी, अक्सर मेस में बनाते थे दाल-चावल

देहरादून, 23 मार्च। उत्तराखंड के दूसरी बार सीएम बने पुष्कर सिंह धामी का यूपी की राजधानी लखनऊ से बहुत ही गहरा रिश्ता रहा है। दरअसल धामी ने राजनीति का ककहरा यहीं से सीखा था। आपको बता दें कि पुष्कर सिंह धामी लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और यहीं वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े थे। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो धामी ने राजनीति में प्रवेश अपने छात्र जीवन से ही कर दिया था इसके पीछे कारण जनसेवा था।

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    ND Hostel के कमरा नंबर 119 में रहते थे धामी

    ND Hostel के कमरा नंबर 119 में रहते थे धामी

    बेहद ही सरल स्वभाव के और पढ़ने में बेहद मेधावी रहे धामी अपने नेचर की वजह से पूरे विश्वविद्यालय में मशहूर थे। धामी लखनऊ के ND Hostel के कमरा नंबर 119 में रहते थे। उनके करीबी और उनके साथ विवि में पढ़ चुके लोगों ने बताया कि सादा जीवन और उच्च विचार रखने वाले धामी अक्सर जब मेस में खाना खत्म हो जाता था तो खुद ही मेस की रसोई में जाकर दाल-चावल और चोखा बना देते हैं, जिसे वो अपने मित्रों और अन्य छात्रों संग बैठकर बड़े चाव से खाया करते थे।

     'धामी की याददाश्त काफी अच्छी है'

    'धामी की याददाश्त काफी अच्छी है'

    उनके करीबी बताते हैं कि धामी की याददाश्त काफी अच्छी है, वो जिनसे एक बार मिल लेते हैं तो वो उनका चेहरा और नाम भूलते नहीं हैं। अपने छात्र जीवन में धामी ने कई आंदोलनों में भाग भी लिया।

    धामी के पिता सेना में रह चुके हैं

    आपको बता दें कि लखनऊ विश्वविद्यालय से मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध में स्नानकोत्तर, स्नातक और एलएलबी करने वाले पुष्कर सिंह धामी का जन्म 16 सितंबर 1975 उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की डीडीहाट तहसील के एक गांव में हुआ था। उनके पिता सेना में सूबेदार रह चुके हैं।

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

    अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद

    उन्होंने सरकारी स्कूल में ही अपनी शिक्षा पूरी की और फिर इन्होंने लखनऊ विवि में दाखिला ले लिया। वो उत्तराखंड बनने से पहले ही राजनीति में आ गए थे। वो साल 1990 से लेकर साल 1999 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता रहे। इसके बाद उन्होंने साल 2008 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

     उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री

    उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री

    लेकिन जब उत्तराखंड बना तो धामी ने खटीमा का रूख किया। वो इसके बाद उत्तराखंड के लगातार दो बार 2002 से 2008 तक प्रदेश अध्यक्ष बने। 2012-2017 और 2017-2022 तक खटीमा से विधायक रहे। 3 जुलाई 2021 को, उन्होंने तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद पहली बार उत्तराखंड के 10 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। वे 45 वर्ष की आयु में उत्तराखंड के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे।

    दूसरी बार उत्तराखंड के सीएम बनने का गौरव मिला

    उनके नेतृत्व में इस बार भाजपा ने उत्तराखंड में सत्ता वापसी की है , भाजपा को 70 सीटों में से 47 सीटें मिलीं हैं ,इस जीत के साथ ही भाजपा ने दोबारा से सत्ता में वापसी करने वाली पहली पार्टी बन गई है तो वहीं खटीमा से इस बार चुनाव हारने के बावजूद धामी फिर से सीएम बने हैं और वो जनरल बीसी खंडूड़ी के बाद दूसरे राजनेता हैं जिन्हें दूसरी बार उत्तराखंड के सीएम बनने का गौरव प्राप्त हुआ है।

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