प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने स्पीकर और BJP अध्यक्ष भट्ट पर की कार्रवाई की मांग, जानिए क्यों
उत्तराखंड में प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद भी सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। कांग्रेस ने अब स्पीकर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर भी कार्रवाई की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये मांग की।
आर्य ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य को पहाड़ और मैदान की राजनीति में बांटना चाहता है। आर्य ने कहा कि जिस प्रकार तत्कालीन कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल को उनके पद से हटाया गया है उसी प्रकार विधानसभा अध्यक्ष और महेंद्र भट्ट के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जिस तरीके से विधानसभा में तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री में असंसदीय भाषा का प्रयोग किया वह संसदीय इतिहास में अप्रत्याशित है। जिस तरीके से सदन में तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री ने व्यवहार व भाषा का प्रयोग किया विधानसभा अध्यक्ष को तत्काल उस को रिकॉर्ड से निकालने के आदेश देने चाहिए थे, और उन्हें असंसदीय भाषा के प्रयोग के लिए टोकना और रोकना चाहिए था।
आर्य ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने मंत्री के दुर्व्यवहार पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया और चुपचाप जनता का अपमान सुनती रही आज तक भी विधानसभा की कार्रवाई को जारी नहीं किया गया है यही नहीं सदन के अंदर नेता सदन भी मौजूद थे उन्होंने भी कोई हस्तक्षेप नहीं किया आखिर क्यों सवाल उठता है कि आखिर सरकार की क्या मंशा है यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि अभी तक विधानसभा अध्यक्ष के दुर्व्यवहार के लिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न किया जाना संशय पैदा कर रहा है।
इसी प्रकार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी आंदोलनकारी जनमानस के लिए सड़क छाप शब्द का प्रयोग किया सड़क छाप की क्या व्याख्या है यह भी भाजपा को स्पष्ट करनी चाहिए और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का पद संवैधानिक पद है वह राजनीति से ऊपर उठकर के कार्य करते हैं। राजनीतिक गतिविधियों से उनका कोई लेना-देना नहीं होता है लेकिन जिस तरीके से उत्तराखंड की विधानसभा अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान में प्रतिभा करती हैं।
पार्टी के सदस्य बनती हैं पार्टी के मंचों पर प्रतिभा करती हैं यह सब क्रियाकलाप विधानसभा अध्यक्ष के पद की गरिमा की विपरीत हैं। गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है भाजपा और प्रदेश सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए ,क्योंकि उत्तराखंड राज्य को बनाने में सभी वर्गों का सहयोग है सभी का त्याग है बलिदान है उसे नकारा नहीं जा सकता भाजपा पहाड़ और मैदान में राज्य को बांटना चाहती है।
इसीलिए भाजपा की लीडरशिप अपने तत्कालीन मंत्री विधानसभा अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष के दुर्व्यवहार पर भी मौन धारण किए हुए हैं जिस प्रकार कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल पर कार्रवाई हुई है उसी प्रकार विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पर भी कार्रवाई होनी चाहिए तभी यह संदेश जाएगा कि भाजपा राज्य को समान दृष्टि से देखती है या नहीं।












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