दिल्ली में बन रहे केदारनाथ मंदिर को लेकर गरमाई सियासत,भाजपा- कांग्रेस के अपने अपने तर्क, ये है विवाद की वजह
केदारनाथ की तर्ज पर दिल्ली में बन रहे मंदिर को लेकर उत्तराखंड में सियासत गरमा गई है। मंदिर के शिलान्यास को लेकर कांग्रेस समेत कई संगठनों ने इसकों लेकर चिंता जताई है।
सोशल मीडिया मेें भी दिल्ली में केदारनाथ की तर्ज पर मंदिर बनने को लेकर कई सामाजिक संगठन से जुड़े लोग आपत्ति जता रहे हैं। जिसके बाद मामला गरमा गया है और तूल पकड़ता जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को दिल्ली स्थित बुराड़ी, हिरंकी में श्री केदारनाथ मंदिर का भूमि-पूजन कर मंदिर का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि इस मंदिर से शिव भक्तों और सनातन संस्कृति की आस्था को बल मिलेगा।
मंदिर के शिलान्यास को लेकर कांग्रेस समेत कई संगठनों ने इसकों लेकर चिंता जताई। भाजपा का कहना है कि दिल्ली मे भगवान केदारनाथ के प्रतीकात्मक मन्दिर को लेकर कांग्रेसियों की चिंता राजनीति से प्रेरित है या उन्हे सनातन या पौराणिक समझ कम है। भाजपा के मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा कि दिल्ली अथवा कहीं भी प्रतीकात्मक मन्दिर बनने से किसी भी ज्योतिर्लिंगों का महत्व कम नही होता।
पुराणों मे 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है और किसी प्रतीकात्मक मन्दिर के बनने से कुछ भी बदलाव असंभव है। उन्होंने कहा कि देश मे कई प्रतीकात्मक मंन्दिर हैं और आस्थावान लोग वहां सदियों से पूजा अर्चना करते आये हैं। इससे सनातन धर्मालंबी आहत नही बल्कि राहत महसूस करेंगे। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि एक प्रतीकात्मक मन्दिर को सेंटर और शाखा कहने वालों को पहले सनातन के बारे मे समझना होगा।
मन्दिर कोई व्यावसायिक संस्थान नही जिसे सेंटर या शाखा से संबोधित किया जाय। उन्होंने कांग्रेस द्वारा सदबुद्धि यज्ञ को आडंबर बताते हुए कहा कि इन कथित धर्मध्वजा के रखवाले उस समय सनातन के अपमान पर हंस रहे थे जब कांग्रेस समर्थित वकील कोर्ट मे भगवान को काल्पनिक बता रहे थे। तब उन्होंने कोई विरोध प्रदर्शन और न ही किसी तरह से अपने हाईकमान के सामने विरोध जताया।












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