Pitru Paksha 2024: शिव से लेकर पांडवों तक को मिली यहां पाप से मुक्ति,पितरों का मोक्ष धाम
Pitru Paksha 2024 हिंदू धर्म में श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों पितृ, पितृलोक से मृत्यु लोक में अपने वंशजों से सूक्ष्मरूप में मिलने आते हैं। श्राद्ध पक्ष में पिंड दान का विशेष महत्व बताया गया है। उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम को मोक्ष धाम कहा गया है।
बद्रीनाथ धाम में ब्रह्मकपाल तीर्थ में पितरों की मुक्ति के लिए पिंड दान किया जाता है। अलकनंदा नदी के तट पर ब्रह्माजी के सिर के आकार की शिला आज भी विद्यमान है। स्कन्द पुराण के अनुसार इस पवित्र स्थान को गया से आठ गुना अधिक फलदाई पितृ कारक तीर्थ कहा गया है।

मान्यता है कि यहां विधिपूर्वक पिंडदान करने से पितरों को नरक लोक से मोक्ष मिल जाता है। साथ ही परिजनों को भी पितृदोष मुक्ति मिल जाती है। जिस वजह से ब्रह्मकपाल को पितरों की मोक्ष प्राप्ति का सर्वोच्च तीर्थ कहा गया है।
ग्रंथों में उल्लेख है कि ब्रह्मकपाल में पिंडदान करने के बाद फिर कहीं पिंडदान की जरूरत नहीं रह जाती। पुराणों के अनुसार ब्रह्माजी जब स्वयं के द्वारा उत्पन्न सरस्वती के सौंदर्य पर मोहित हो गए तो शिवजी को भयंकर क्रोध आ गया और उन्होंने अपने त्रिशूल से ब्रह्माजी का पांचवां सिर धड़ से अलग कर दिया। ब्रह्मा का यह सिर शिव के त्रिशूल पर चिपक गया और उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप भी लग गया।
ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शिव कई तीर्थ गए, लेकिन उन्हें ब्रह्म हत्या से मुक्ति नहीं मिली। मान्यता है कि ब्रह्माजी का पांचवां सिर उनके हाथ से वहीं गिर गया। जिस स्थान पर वह सिर गिरा,वही स्थान ब्रह्मकपाल कहलाया और इसी स्थान पर शंकरजी को ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली।
एक अन्य कथा के अनुसार श्रीमदभागवत महापुराण में उल्लेख है कि महाभारत के युद्ध अपने ही बंधु-बांधवों की हत्या करने पर पांडवों को गोत्र हत्या का पाप लगा था। गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए स्वर्गारोहिणी यात्रा पर जाते हुए पांडवों ने ब्रह्मकपाल में ही अपने पितरों को तर्पण किया था।












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