ब्रॉन्ज नहीं हमारे लिए गोल्डन है....शूटिंग एकेडमी में साथी ट्रेनर ने बताया कैसा रहा मनु भाकर का संघर्ष

Paris Olympics 2024 Manu Bhakar: मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। मनु भाकर ने इसके लिए काफी संघर्ष किया है।

देहरादून स्थित जसपाल राणा शूटिंग एकेडमी में मनु ने शूटिंग की ट्रेनिंग ली। जिस दौरान मनु ने एकेडमी से ट्रेनिंग ली उसी दौरान वहां छत्तीसगढ़ से आई श्रुति भी शूटिंग की बारीकियां सीखने पहुंची।

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आज जब मनु ने दो पदक जीत लिए हैं तो एकेडमी में उनके साथ ट्रेनिंग लेने वाले सभी खिलाड़ी काफी खुश नजर आ रहे हैं। श्रुति ने वन इंडिया से मनु के संघर्ष को लेकर विस्तार से बातचीत की है।

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    ब्रॉन्ज नहीं हमारे लिए गोल्डन है,शूटिंग एकेडमी में साथी ट्रेनर ने बताया कैसा रहा मनु भाकर का संघर्ष

    सालों का संघर्ष और कड़ी मेहनत
    हर किसी खिलाड़ी का सपना होता है कि ओलंपिक में वह पदक जीतकर देश का नाम रोशन करे। इसके लिए सालों का संघर्ष और कड़ी मेहनत करनी होती है। इसके बाद अगर किसी का सपना पूरा हो तो वह अपने सारे संघर्षों को भूलकर बस उस गोल्डन पल को याद करता है।

    छत्तीसगढ़ से आई श्रुति भी सीख रही गुर
    जब वह पदक को पालेता है। कुछ इसी तरह की भावनाएं अब मनु के एकेडमी में शूटिंग की ट्रेनिंग ले रहे खिलाड़ियों में नजर आ रही है। देहरादून से हजारों किमी दूर छत्तीसगढ़ से आई श्रुति भी देश के लिए पदक जीतने की इच्छा रखती हैं।

    हमारे लिए वह विजेता हैं
    ये मायने नहीं रखता कि मनु ने कौन सा पदक जीता है। हमारे लिए वह विजेता हैं। श्रुति बताती हैं कि मनु घंटों प्रैक्टिस करती रहती थी। जब भी वे शूटिंग रेंज में ट्रेनिंग के लिए आती, अपना पूरा फोकस निशाने पर रखती थी। उनका व्यवहार भी बहुत मिलनसार रहा है। मनु का संघर्ष और मेहनत ही है कि आज वे दो पदक जीतकर आई हैं।

    कुछ पल और पदक का फासला
    उन्होंने कहा कि हमें आगे भी उम्मीद है कि वे देश के लिए कुछ ओर भी अच्छा करेंगी। श्रुति ने बताया कि कैसे चंद सेकेंड और कुछ मिनट में एक खिलाड़ी को अपना गोल या यूं कहें कि निशाना सही जगह पर लगाना होता है। इसके लिए कई सालों की मेहनत होती है।

    पदक मिलने से आई नई ऊर्जा
    श्रुति ने कहा कि अब मनु के पदक जीतने के बाद एकेडमी में आने वाले सभी खिलाड़ियों, ट्रेनर को एक नई ऊर्जा के साथ फिर से अपने अपने टारगेट को सेट करने में जुट गए हैं। साथ ही हर कोई देश के लिए कुछ करने की सोच के साथ अपना 100 प्रतिशत देना चाहता है।

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