Uttrakhand:अब देवस्थानम बोर्ड को लेकर खड़ा हुआ नया विवाद, हाईपावर कमेटी के पक्ष से पुरोहित हुए नाराज
हाईपावर कमेटी को लेकर एक बार फिर विवाद, कमेटी के अध्यक्ष मनोहर कांत ध्यानी ने 2 माह में सभी पक्षों से बातचीत कर रिपोर्ट सरकार को सौंपने की बात की
देहरादून, 9 अक्टूबर। उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड को लेकर राज्य सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। देवस्थानम बोर्ड को लेकर बनाई गई हाईपावर कमेटी को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। कमेटी के अध्यक्ष मनोहर कांत ध्यानी ने 2 माह में सभी पक्षों से बातचीत कर रिपोर्ट सरकार को सौंपने की बात की है। इधर तीर्थ पुरोहितों ने कमेटी के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं।पुरोहिताेंं की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर तक का समय दिया हैा जबकि एक माह बीत जाने के बाद भी कोई खास पहल नहीं हो पाई हैा

उच्च स्तरीय समिति ने रखा अपना पक्ष
उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड को लेकर राज्य सरकार की ओर से बनाई गई उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष मनोहरकांत ध्यानी ने सभी पक्षों से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने की बात की है। ध्यानी ने कहा कि एक माह निकल चुका है। अब दो माह में सभी पक्षों की बातों को सुनकर सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगे। ध्यानी ने इस बात के संकेत भी दिए कि बीच का रास्ता तलाशने की कोशिश की जाएगी। ध्यानी के बयान के बाद मीडिया में आई खबरों को लेकर भी पुरोहितों में कन्फ्यूजन हो गया है। एक पक्ष ध्यानी के बयान का सीधा मतलब बोर्ड को भंग न करने का दावा कर रहा है। जबकि दूसरा पक्ष अभी ध्यानी के बयानों को सीधे बातचीत के बाद ही निकालने की बात कर रहा है। ऐसे में कोई भी पक्ष खुलकर ध्यानी के बयानों पर अपना पक्ष रखने से बचते हुए नजर आ रहे हैं। तीर्थ पुरोहितों के सामने अब समस्या चारधाम यात्रा के शीतकालीन कपाट बंद होने को लेकर भी है। तीर्थ पुरोहितों कपाट बंद होने की प्रक्रिया से पहले इसका हल निकालने की कोशिश में जुटे हैं। जिससे यात्रा चालू रहने तक सरकार पर दबाव बनाया जा सके। जबकि सरकार इसे आचार संहिता तक टालने में लगी है। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 30 अक्टूबर तक का समय पुरोहितों से मांगा है। जो कि हल निकलना मुश्किल लग रहा है।
क्या है देवस्थानम बोर्ड, क्यों हो रहा विरोध
उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने 2019 में एक नए बिल को मंजूरी दी। जिसने उत्तराखंड चार धाम श्राइन मैनेजमेंट बिल को रद्द करके चार धाम देवस्थानम बोर्ड बनाया। विधेयक का उद्देश्य बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के चार धामों और 49 अन्य मंदिरों को प्रस्तावित तीर्थ मंडल के दायरे में लाना था। इसको लेकर चारधामों के तीर्थ पुरोहित, हक हककूधारी विरोध कर रहे हैं। तीर्थ पुरोहित पुरानी व्यवस्था को ही लागू रखने की मांग कर रहे हैं।
उत्तराखंड पौराणिक सांस्कृतिक संवर्धन प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष और बद्रीनाथ के पुरोहित आचार्य नरेश आनंद नौटियाल ने कहा कि
उच्च स्तरीय कमेटी के अध्यक्ष मनोहर कांत ध्यानी के बयानों से ऐसा प्रतीत होता है, कि राज्य सरकार ने जो 30 अक्टूबर तक का समय दिया है। वो सिर्फ पुरोहितों को उलझाने के लिए दिया है। सरकार तीर्थ पुरोहितों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। जब तक कमेटी की रिपोर्ट या कोई कार्रवाई होगी। तब तक आचार संहिता लग जाएगी। जिससे एक बार फिर अध्यादेश का मामला लटक जाएगा। तीर्थ पुरोहितों का सरकार के खिलाफ आंदोलन चलता रहेगा।












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