निरंजनी अखाड़ा: कई बड़े डॉक्टर-इंजीनियर हैं इसमें साधु, IIT और IIM जैसे संस्थानों में देते हैं लेक्चर

हरिद्वार, अप्रैल 16: देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बहुत ज्यादा खौफनाक है, जहां अब रोजाना दो लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या का असर हरिद्वार कुंभ पर भी पड़ा, जहां गुरुवार को निरंजनी अखाड़े ने महाकुंभ से हटने की घोषणा कर दी। ऐसे में अब कुंभ खत्म माना जा रहा है। इस फैसले के बाद लोग निरंजनी अखाड़े के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता है कि इसमें सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोग शामिल हैं।

70 प्रतिशत के पास उच्च शिक्षा

70 प्रतिशत के पास उच्च शिक्षा

आमतौर पर जब हम साधुओं की बात करते हैं तो लोगों के मन में अनपढ़/गंवार वाली छवि आती है, लेकिन निरंजनी अखाड़े की बात अलग है। इसमें सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे साधू हैं, जिसमें डॉक्टर, प्रोफेसर और प्रोफेशनल शामिल हैं। इस अखाड़े के एक संत स्वामी आनंदगिरि नेट क्वालिफाइड हैं। वो पहले आईआईटी खड़गपुर, आईआईएम शिलांग में लेक्चर भी दे चुके हैं। फिलहाल अभी बनारस से पीएचडी कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक इसमें 70 प्रतिशत साधु-संतों ने उच्च शिक्षा पा रखी है। जिसमें डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर शामिल हैं।

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    कब हुई स्थापना?

    कब हुई स्थापना?

    बात करें इतिहास की तो निरंजनी अखाड़े की स्थापना विक्रम संवत 960 कार्तिक कृष्णपक्ष के दिन गुजरात के मांडवी में हुई थी, जहां पर महंत अजि गिरि, मौनी सरजूनाथ गिरि, पुरुषोत्तम गिरि, हरिशंकर गिरि, रणछोर भारती, जगजीवन भारती, अर्जुन भारती, जगन्नाथ पुरी, स्वभाव पुरी, कैलाश पुरी, खड्ग नारायण पुरी, स्वभाव पुरी ने मिलकर अखाड़ा की नींव रखी। हालांकि इसका मुख्यालय प्रयागराज में है। वहीं उज्जैन, हरिद्वार, त्रयंबकेश्वर और उदयपुर में भी अखाड़े ने अपने आश्रम बना रखे हैं।

    33 महामंडलेश्वर हैं शामिल

    33 महामंडलेश्वर हैं शामिल

    हर अखाड़े की तरह निरंजनी अखाड़े में भी महामंडलेश्वर अहम पद होता है। महामंडलेश्वर के चुनाव के लिए वैसे तो कोई खास योग्यता तय नहीं की गई है, लेकिन उनका संन्यासी होना जरूरी है, ताकी वो घर और परिवार से मतलब ना रखें। इसके अलावा उम्र सीमा का भी निर्धारण नहीं किया गया है। हालांकि वेद-पुराणों, रीति-रिवाजों के ज्ञाता को प्रथामिकता दी जाती है। कुछ सालों पहले इस्टेट कारोबारी सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बनाया गया था, जिसके बाद काफी विवाद हुआ। मौजूदा वक्त में 33 महामंडलेश्वर, 1000 के करीब साधु और 10 हजार नागा शामिल हैं।

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