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देश का पहला गांव माणा, जानिए घूमने और फिरने के साथ क्या-क्या है देखने लायक, कितना आएगा खर्चा?

उत्तराखंड का माणा गांव देश का पहला गांव बन गया है। चमोली जिले में स्थित माणा गांव पौराणिक संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता दोनों का अद्भुत संगम है। बद्रीनाथ से सिर्फ 3 किमी दूर माणा गांव सबसे अच्छा पर्यटक केंद्र है।

 Mana first village of the country know what is worth seeing visiting how much will it cost tourist

उत्तराखंड का सीमांत गांव माणा देश का पहला गांव बन गया है। चमोली जिले में स्थित माणा गांव पौराणिक संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता दोनों का अद्भुत संगम है। बद्रीनाथ से सिर्फ 3 किमी दूर माणा गांव सबसे अच्छा पर्यटक केंद्र है। यह सरस्वती नदी के तट पर है और यह लगभग 3219 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह गांव हिमालय की पहाड़ियों से घिरा हुआ है। जो​ कि स्वर्ग की अनुभूति कराता है।

देहरादून से माणा किराया करीब 750 रुपए

देहरादून से माणा की दूरी 319 किलोमीटर की है। और नज़दीकी रेल नेटवर्क हरिद्वार से माणा की दूरी 275 किलोमीटर दूर है। देहरादून से माणा बस और टैक्सी से आसानी से पहुंचा जा सकता है। जिसका किराया करीब 750 रुपए है और बद्रीनाथ धाम से माणा का किराया 50 रुपए पर सीट है।

माणा गांव में होम स्टे की सुविधा

माणा गांव में होम स्टे की सुविधा मिल जाती है। जहां ठहरने का करीब 2 हजार रुपए तक एक रात का किराया है। माणा में सीमित ही रुकने का विकल्प है। ऐसे में बद्रीनाथ धाम आकर होटल और धर्मशाला आसानी से मिल जाती है।

नदी पर आज भी शिलाओं का पुल

माणा गांव का इतिहास पांडवों से जुड़ा है। मान्यता है कि सरस्वती नदी से रास्ता न मिलने पर भीम ने दो बड़ी शिलायें उठाकर नदी के ऊपर रखीं और पुल का निर्माण कर दिया। आज भी उस स्थान पर सरस्वती नदी बहती है जो आगे जाकर अलकनंदा में मिल जाती है। नदी पर आज भी शिलाओं का वो पुल बना हुआ है। इस पुल को 'भीमपुल' के नाम से जाना जाता है। जहां पर्यटक देखने जरुर जाते हैं।

'हिंदुस्तान की आखिरी दुकान', चाय की दुकान

माणा गांव में ही देश की आखिरी दुकान ​भी सबसे प्रसिद्ध है। इस दुकान पर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा हुआ है 'हिंदुस्तान की आखिरी दुकान'। ये चाय की दुकान है। इस क्षेत्र में घूमने आने वाले पर्यटक इस दुकान की चाय जरूर पीते हैं और इसके सामने तस्वीर खिंचवाते हैं। इस क्षेत्र से कुछ दूरी पर चीन की सीमा शुरू हो जाती है। इस गांव में करीब 60 मकान हैं और 400 लोगों की आबादी यहां रहती है। ज्यादातर घर लकड़ी से बने हैं।

गणेश गुफा, व्यास गुफा भी देखने लायक

गांव के आसपास तमाम जड़ीबूटियां दिख जाती हैं। इन सबके अलावा यहां गणेश गुफा, व्यास गुफा भी देखने लायक है। कहा जाता है कि इसी गुफा में बैठकर गणपति ने महाभारत लिखी थी। . यहां सरस्वती और अलकनंदा नदियों का भी संगम देखने को मिलता है। साथ ही यहां कई प्राचीन मंदिर और गुफाएं भी हैं, जिन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ रहती है।

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