यूक्रेन से अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर उत्तराखंड लौटे छात्रों को सता रही भविष्य की चिंता, सरकार से की ये मांग

उत्तराखंड लौटे छात्रों को अब अपनी भविष्य की चिंता सताने लगी

देहरादून, 7 अप्रैल। रूस-यूक्रेन युद्ध ​की वजह से अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर उत्तराखंड लौटे छात्रों को अब अपनी भविष्य की चिंता सताने लगी है। छात्रों ने राज्य सरकार से अपनी ट्रेनिंग पूरी कराने की मांग की है। जिसके लिए प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में ट्रेनिंग पूरी करने की भी मांग उठने लगी है। जिसको लेकर यूक्रेन से लौटे छात्र और उनके परिजन सीएम पुष्कर सिंह धामी से भी मुलाकात कर चुके हैं।

 Leaving their studies from Ukraine in the middle, the students who returned to Uttarakhand are worried about the future, this demand from the government

लोन लेकर भेजा था विदेश
यूक्रेन में डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले छात्र अपनों के बीच सकुशल लौट तो आए लेकिन अब ऐसे छात्रों को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी हैं। इन छात्रों को अब अपने समय और पैसे दोनों बेकार होने का डर सताने लगा हैं। इनमें अधिकतर छात्र ऐसे हैं। जिनके परिजनों ने अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बैंक से कर्ज ले रखा है। साथ ही कुछ परिजनों ने अपनी मेहनत का पूरा पैसा बच्चों की पढ़ाई में लगा दिया है। अब परिजन इस बात को लेकर चिंतित है कि उनके बच्चों का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया है। देहरादून निवासी अर्चित गोयल भी कीव, यूक्रेन के बोगोमोलेट्स नेशनल मेडिकल यूनि​वर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। जो कि अभी फोर्थ इयर के स्टूडेंट्स थे। अर्चित मार्च में ​ही उत्तराखंड आए। अब उन्हें भविष्य की चिंता सताने लगी है। उन्होंने बताया कि उनका अभी दो साल की पढ़ाई बची थी। परिजनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर बच्चों के भविष्य को देखते हुए कुछ समाधान निकालने की मांग की है। उन्होंने बताया​ कि मुख्यमंत्री ने भी उन्हें आश्वासन तो दिया है। लेकिन केन्द्र सरकार इसको लेकर क्या पॉलिसी बना रही है। इस पर भी सबकी निगा​हें टिकी हुई है। हालांकि उत्तराखंड के छात्र चाहते हैं कि उन्हें प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में ट्रेनिंग देने की किसी योजना का लाभ मिले।
भारत सरकार का क्या है कहना
यूक्रेन से लौटे छात्रों को विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के दिए बयान से भी काफी राहत मिली है। विदेश मंत्री का कहना है कि किसी भी छात्र का भविष्य खराब नहीं होगा। यूक्रेन सरकार ने फैसला किया कि चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के संबंध में (छात्रों के लिए) छूट दी जाएगी। तीसरे वर्ष के मेडिकल छात्रों के लिए KROK 1 परीक्षा अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए स्थगित कर दी गई। छात्रों को एसटीडी की आवश्यकता के पूरा होने के आधार पर अगले शैक्षणिक वर्ष में पास करने की अनुमति होगी। 6 वें वर्ष के छात्रों के लिए, KROK 2 नामक एक परीक्षा है।

यूक्रेन में क्यों पढ़ने जाते हैं छात्र
उत्तराखंड की तुलना में यूक्रेन में फीस कई गुना कम है। जिस कारण मजबूरन बच्चों को दूसरे देशों में मेडिकल की पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है। यूक्रेन में मेडिकल की फीस सालाना 4 लाख रुपए तक है। जबकि उत्तराखंड में निजी मेडिकल कॉलेज में ये फीस 17 से 20 लाख तक बैठती है। यूक्रेन से लौटे छात्र और उनके परिजनों का कहना है कि अगर उत्तराखंड में मेडिकल की पढ़ाई सस्ती हो जाए और सीटें बढ़ जाए तो मेडिकल की पढ़ाई के लिए रसिया, चायना आदि देशों में जाने की जरूरत ही क्यों पड़ेगी।

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