जानिए कौन हैं देवभूमि उत्तराखंड में न्याय के देवता, जो कि पहली बार निकले हैं संदेश यात्रा पर
उत्तराखंड में न्याय के देवता कहे जाते हैं गोलज्यू महाराज
देहरादून, 27 अप्रैल। देवभूमि उत्तराखंड में न्याय के देवता गोलज्यू महाराज की पहली बार संदेश यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यात्रा पूरे 10 दिन तक 22 सौ किमी तक पूरे राज्य में पहुंचेगी और आशीर्वाद देगी। यात्रा का आयोजन अपनी धरोहर संस्था के द्वारा उठाया जा रहा है। इस यात्रा का उद्देश्य उन 22 पौराणिक महत्व के स्थलों की जानकारी आमजनों और खासकर नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। जो कि मंगलवार को पिथौरागढ़ पहुंची। यहां रामलीला मैदान में भव्य कलश यात्रा के साथ गोलज्यू रथ का स्वागत हुआ। इस दौरान उपस्थित लोगों ने गोलज्यू रथ का दर्शन कर सुख, समृद्धि और शांति की कामना की।

करीब 10 दिन में पूरे राज्य में 2200 किमी का लक्ष्य
यात्रा के दौरान आमजनों से राज्य गठन के बाद बदली परिस्थितियों पर भी मंथन किया जा रहा है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार कर केंद्र और राज्य सरकार को सौंपने की तैयारी है। संदेश यात्रा के संयोजक उत्तराखंड पुलिस के रिटायर्ड आईजी और वर्तमान में एसटी आयोग के उपाध्यक्ष गणेश सिंह मर्तोलिया ने बताया कि सोमवार को भगवान शिव के धाम बोन गांव से ध्वज पूजन के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। उन्होंने बताया कि यात्रा करीब 10 दिन में पूरे राज्य में 2200 किमी तक होगी। इस दौरान लोगों को संदेश यात्रा के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी जाएगी। पिथौरागढ़ के सोरगढ़ (रामलीला) मैदान में पहुंची यात्रा का स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।

चौपाल, भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन
इस दौरान भव्य कलश यात्रा निकालकर भगवान गोलज्यू के जयजयकारे लगाए। बाद में रामलीला मैदान में रथ यात्रा में विराजमान भगवान गोलज्यू महाराज की पूजा-अर्चना कर लोगों ने आशीर्वाद लिया। इस दौरान गोलज्यू चौपाल, भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। गोलज्यू संदेश यात्रा के दौरान राज्य के शिल्पकार, मूर्तिकार, लोहार, जगरिये, डंगरिये, लोक गायक, लोक नर्तक, वाद्य यंत्रो को बनाने वाले, बजाने वालों आदि की जानकारी जुटाई जाएगी।

अल्मोड़ा जिले में स्थित चितई गोलू देवता, न्याय के प्रतीक
देवभूमि उत्तराखंड हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक है जहां कई मंदिर हैं और हर मंदिर की अपनी खास बात और मान्यता है। ऐसे ही एक देवता हैं गोलज्यू महाराज या गोलू देवता। उत्तराखंड में गोलू देवता के कई मंदिर हैं, लेकिन इनमें से सबसे लोकप्रिय अल्मोड़ा जिले में स्थित चितई गोलू देवता का मंदिर है। मान्यता है कि यहां भक्तों को न्याय की प्राप्ति होती है, यहां विराजित देवता को न्याय का देवता भी कहा जाता है। अल्मोड़ा से आठ किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ हाईवे पर न्याय के देवता कहे जाने वाले गोलू देवता का मंदिर स्थित है, इसे चितई ग्वेल भी कहा जाता है | मंदिर के अन्दर घोड़े में सवार और धनुष बाण लिए गोलू देवता की प्रतिमा है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण चंद वंश के एक सेनापति ने 12वीं शताब्दी में करवाया था। इस मंदिर के देवता की शरण में आकर न्याय मिल जाता है। गोलू देवता अपने न्याय के लिए दूर-दूर तक मशहूर हैं। इस मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ और घंटियों की आवाज हमेशा सुनाई देती है। इन्हें राजवंशी देवता के तौर पर पुकारा जाता है। गोलू देवता को उत्तराखंड में कई नामों से पुकारा जाता है। इनमें से एक नाम गौर भैरव भी है। गोलू देवता को भगवान शिव का ही एक अवतार माना जाता है। मनोकामना पूरी होने पर












Click it and Unblock the Notifications