Kedarnath Yatra में श्रद्धालु की मौत, शव के लिए हेली सर्विस नहीं, DM खुद उड़ गए! बेटे का रोते हुए वीडियो Viral

Kedarnath Yatra Heart Attack Case: केदारनाथ यात्रा 2026 के पहले दिन ही जो दर्दनाक घटना हुई, वह न सिर्फ एक परिवार की जिंदगी बर्बाद कर गई, बल्कि उत्तराखंड प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिया। गुजरात के वडोदरा से आए 60 वर्षीय श्रद्धालु दिलीप भाई माली का केदारनाथ धाम पहुंचते ही हार्ट अटैक से निधन हो गया।

उनका बेटा हेमंत माली पिता के शव को नीचे लाने के लिए घंटों हेलीकॉप्टर की गुहार लगाता रहा। आरोप है कि रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने DGCA की NOC न होने का हवाला देकर मना कर दिया। वहीं, खुद डीएम अपनी टीम के साथ उसी हेलीकॉप्टर से उड़ गए।

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हेमंत ने अपना दर्द बयां करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वह बार-बार कह रहा है कि अगर NOC नहीं थी तो डीएम साहब कैसे उड़े? सुबह हेलीपैड पर पहुंचा शव दोपहर 12:30 बजे तक धूप में पड़ा रहा। आखिरकार देर से हेलीकॉप्टर मिला। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा है, बल्कि चारधाम यात्रा जैसे पवित्र आयोजन में प्रशासनिक उदासीनता और दोहरे मापदंड का जीता-जागता उदाहरण बन गई है। आइए विस्तार से जानते हैं...

Kedarnath Yatra के पहले दिन की त्रासदी, खुली सरकारी दावों की पोल

केदारनाथ यात्रा बुधवार (22 अप्रैल 2026) को शुरू हुई। गुजरात से परिवार सहित दर्शन करने पहुंचे दिलीप भाई माली को धाम पहुंचते ही स्वास्थ्य बिगड़ गया। वे बेहोश हो गए। हेमंत माली ने तुरंत इमरजेंसी नंबर 100 पर फोन किया, लेकिन मदद में देरी हुई। मजबूरन उन्होंने पीठू (पोर्टर) की मदद से पिता को अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की टीम ने शव को हेलीपैड भेज दिया और कहा कि हेलीकॉप्टर से नीचे पहुंचा दिया जाएगा। लेकिन हेलीपैड पर पहुंचते ही परिवार की मुश्किलें बढ़ गईं। हेमंत ने बताया कि शव दो घंटे से ज्यादा समय तक धूप में पड़ा रहा।

हेमंत ने मुख्यमंत्री से लेकर डीएम विशाल मिश्रा तक से संपर्क किया। डीएम ने शुरुआत में आश्वासन दिया कि आधे घंटे में इंतजाम हो जाएगा। बाद में उन्होंने कहा कि एक टीम शव को नीचे ले जाएगी। हेमंत ने जवाब दिया कि मुझे शव गुजरात ले जाना है, 5-6 घंटे पैदल उतरने में शव की हालत क्या हो जाएगी? हेमंत का आरोप है कि डीएम ने आखिरी जवाब दिया कि 'DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) की अनुमति नहीं है, खुद बात कर लो। और फिर अपनी टीम के साथ हेलीकॉप्टर में बैठकर रवाना हो गए।

बेटे का वायरल वीडियो: 'मेरे पिता की लाश के लिए क्यों नहीं मिली हेली?

हेमंत माली का भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वे भावुक होकर कह रहे हैं कि पहले दिन यात्रा शुरू हुई और मेरे पिता चले गए। मैंने डीएम से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन NOC का हवाला दिया गया। अगर NOC नहीं थी तो डीएम साहब अपनी टीम के साथ कैसे उड़ गए? क्या अधिकारियों और आम श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग नियम हैं?

उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार अजित सिंह राठी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर इस वीडियो के साथ पोस्ट लिखा कि केदारनाथ यात्रा के पहले ही दिन जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था। डीएम रुद्रप्रयाग का रवैया बेहद गैरजिम्मेदाराना और अमानवीय था। पोस्ट में हजारों लोगों ने कमेंट करके प्रशासन की आलोचना की।

DGCA NOC का मुद्दा: दोहरे मापदंड के आरोप

डीएम विशाल मिश्रा ने शव के लिए हेलीकॉप्टर देने से इनकार करते हुए DGCA की अनुमति न होने का हवाला दिया। लेकिन सवाल उठ रहा है कि अगर NOC नहीं थी तो डीएम खुद हेलीकॉप्टर से कैसे उड़े? क्या सरकार ने अधिकारियों के लिए एक नियम और आम नागरिकों-श्रद्धालुओं के लिए दूसरा नियम बना रखा है?

यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं पहले से ही सीमित और महंगी होती हैं। मौसम, सुरक्षा और DGCA नियमों के चलते अक्सर देरी होती है। लेकिन एक मृत श्रद्धालु के शव को घंटों इंतजार करवाना और फिर खुद उड़ जाना। यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा माना जा रहा है।

केदारनाथ यात्रा का संदर्भ: श्रद्धा के साथ सुरक्षा की चुनौती

हर साल लाखों श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचते हैं। यात्रा मार्ग कठिन है, ऊंचाई, मौसम परिवर्तन और स्वास्थ्य जोखिम आम हैं। हार्ट अटैक जैसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन बार-बार होती हैं। प्रशासन हर साल हेलीकॉप्टर सेवाएं, मेडिकल टीम और इमरजेंसी प्रोटोकॉल का दावा करता है।

लेकिन इस घटना ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया। क्या हेलीकॉप्टर सेवाएं सिर्फ VIP और अधिकारियों के लिए हैं? क्या मृत श्रद्धालु के परिवार को इंतजार क्यों करवाया गया? क्या DGCA नियमों में शव परिवहन के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं है?

Who Is Rudraprayag DM Vishal Mishra (IAS): कौन हैं रुद्रप्रयाग के DM विशाल मिश्रा?

विशाल मिश्रा का जन्म 10 जुलाई 1992 को उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने 2017 में UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया 49वीं रैंक हासिल की और 2018 बैच के उत्तराखंड कैडर के IAS अधिकारी बने। उनकी शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने HBTU कानपुर से इंजीनियरिंग की और फिर IIT कानपुर से वॉटर रिसोर्सेस में M.Tech किया।

टेक्निकल एजुकेशन होने की वजह से उन्हें खास तौर पर जल प्रबंधन, बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाएं में एक्सपर्ट माना जाता है। यही वजह है कि उन्हें जल संरक्षण और बड़े प्रोजेक्ट्स में अहम जिम्मेदारियां दी गईं। करियर की बात करें तो उन्होंने उधम सिंह नगर में मुख्य विकास अधिकारी, जीएमवीएन में प्रबंध निदेशक, और जल जीवन मिशन व नमामि गंगे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा अल्मोड़ा जैसे जिलों में भी उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं।

13 फरवरी 2026 से वह रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, जो केदारनाथ जैसे संवेदनशील क्षेत्र को भी कवर करता है। यहां उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, खासकर पर्यटन और आपदा प्रबंधन के मामलों में। अगर विवादों की बात करें, तो अब तक उनके करियर से जुड़ा कोई बड़ा या आधिकारिक तौर पर साबित विवाद सामने नहीं आया है। हालांकि, केदारनाथ और हेली सर्विस जैसे मुद्दों पर कभी-कभी सोशल मीडिया में चर्चा जरूर होती है, लेकिन इनकी कोई पक्की पुष्टि नहीं हुई है। कुल मिलाकर, विशाल मिश्रा एक ऐसे IAS अधिकारी हैं जो टेक्नोलॉजी और प्रशासन को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं और जिनका फोकस रिजल्ट देने पर रहता है।

अब क्या हो रहा है?

घटना के बाद रुद्रप्रयाग प्रशासन ने शव को नीचे पहुंचाने का इंतजाम किया। परिवार अब शव को गुजरात ले जाने की तैयारी में है। सोशल मीडिया पर KedarnathYatra और DMVishalMishra जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग CM पुष्कर सिंह धामी और PMO से न्याय की मांग कर रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने यात्रा की तैयारियों का दावा किया था, लेकिन पहले दिन की इस घटना ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शव ले जाने पर DGCA और एयर नियम क्या कहते हैं?

Kedarnath Yatra से जुड़े मामलों में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या शव को तुरंत हेलीकॉप्टर से ले जाना जरूरी होता है। यहां सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि DGCA (Directorate General of Civil Aviation) का काम केवल विमानन सुरक्षा और संचालन को विनियमित करना है, न कि यह तय करना कि किसे हेलीकॉप्टर में प्राथमिकता दी जाए।

एयर या हेलीकॉप्टर से शव ले जाने को आम यात्री की तरह नहीं देखा जाता। इसे कार्गो की तरह संभाला जाता है। यानी इसके लिए पहले से अनुमति, स्लॉट और सही प्रक्रिया जरूरी होती है। DGCA यह सुनिश्चित करता है कि फ्लाइट सुरक्षित तरीके से प्रचालन हो और सभी नियमों का पालन हो। इस प्रक्रिया में कुछ जरूरी दस्तावेज होते हैं, जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, शव-संरक्षण प्रमाण पत्र, ताबूत सीलिंग प्रमाण पत्र और कई मामलों में पुलिस NOC। इन सभी कागजों के बिना शव को एयर ट्रांसपोर्ट से ले जाना संभव नहीं होता।

सबसे अहम बात Embalming यानी शव का रासायनिक संरक्षण है। इसके बिना एयर ट्रांसपोर्ट की अनुमति नहीं मिलती। साथ ही शव को पूरी तरह सील्ड और एयरटाइट ताबूत में रखना जरूरी होता है, ताकि सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य बनी रहे। Kedarnath जैसे हाई-एल्टीट्यूड इलाकों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। यहां हेलीकॉप्टर सीमित होते हैं और प्राथमिकता जिंदा मरीजों केबचाव या मेडिकल इमरजेंसी को दी जाती है। ऐसे में शव को ले जाने में देरी होना आम बात है, क्योंकि पहले पूरी प्रक्रिया और अनुमति पूरी करनी होती है। सीधी बात यह है कि कोई ऐसा नियम नहीं है जो हर स्थिति में तुरंत हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने को अनिवार्य बनाता हो। यह पूरी तरह प्रक्रिया, दस्तावेज और स्थानीय प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करता है।

संवेदना की कमी या सिस्टम की खामी?

यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा का सवाल है। केदारनाथ जैसी पवित्र यात्रा में एक मृतक के शव को घंटों इंतजार करवाना और डीएम का खुद उड़ जाना, यह अमानवीय लगता है। हेमंत माली का वीडियो सिर्फ एक बेटे की पीड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम से पूछे गए सवाल है कि क्या एक आम श्रद्धालु की मौत पर भी प्रशासन उतना संवेदनशील नहीं जितना VIP मूवमेंट पर? प्रशासन को अब जवाब देना होगा। यात्रा जारी है, लेकिन यह घटना याद दिलाती है कि श्रद्धा के साथ-साथ संवेदना और जिम्मेदारी भी जरूरी है।

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