kashipur firing case : सीमेंट बजरी की छोटी दुकान से बन गया खनन का सिंडिकेट, एक लाख के इनामी zafar ali की कहानी
एक लाख का इनामी बदमाश, यूपी का जफर है खनन माफिया
kashipur firing case जिस खनन माफिया जफर के चक्कर में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पुलिस आमने सामने आ चुकी है। वह खनन के काले कारोबार का बड़ा सिंडिकेट माना जाता है। जिसके उत्तर प्रदेश में बड़ा नेटवर्क माना जाता है। जफर डिलारी के कांकरखेड़ा का रहने वाला है। जिस पर मुरादाबाद पुलिस ने एक लाख का इनाम घोषित कर रखा है। जफर ने कुछ साल पहले दिल्ली के जामिया विश्वविद्यालय से एमए किया था।

जफर के 15 से अधिक डंपर चल रहे
जफर सालों पहले मुरादाबाद ठाकुरद्वारा मार्ग पर अपने भाइयों के साथ सीमेंट, बजरी की छोटी सी दुकान चलाता था। इसी दौरान जफर खनन माफिया के संपर्क में आया और अवैध खनन का काला कारोबार में संलिप्त हो गया। जफर ने खनन से काफी संपत्ति अर्जित की है। कारोबार बढ़ता देख जफर ने डंपर खरीदने शुरू कर दिए। बताया जाता है कि आज जफर के 15 से अधिक डंपर चल रहे हैं। एसडीएम और खनन अधिकारी से मारपीट के बाद से जफर के डंपर एरिया में नहीं दिखे। जफर के खिलाफ वर्ष 2005 में मारपीट का केस दर्ज हुआ था। इसके अलावा ठाकुरद्वारा थाने में दो केस दर्ज हैं। एसडीएम और खनन अधिकारी से मारपीट के मामले में जफर का एक भाई शामिल था। नबी मोहम्मद पर 50 हजार का इनाम था। पुलिस ने उसे भी कुछ दिन पहले ही गिरफ्तार किया था। जफर इस कदर प्रशासनिक अमला पर हावी था कि वह एसडीएम को बंधक बनाकर खनन गाड़ी छुड़ा ले गया था।
दोनों भाई जफर और नबी खनन माफिया, नबी ने पिछले दिनों कोर्ट में सरेंडर कर दिया था
बीते 13 सितंबर को एसडीएम और खनन अधिकारी को बंधक बनाने के मामले में जफर मुख्य अभियुक्त के रूप में शामिल रहा। यूपी क्षेत्र में तेजी से दी गई दबिश के बाद जफर ने बार्डर पार कर काशीपुर के कुंडा में बचने के लिए शरण ले रखी थी। मुहम्मद तैय्यब की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों भाई जफर और नबी फरार चल रहे थे। नबी ने पिछले दिनों कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। जफर अभी भी फरार था। जिसे दबोचने के लिए यूपी पुलिस काशीपुर तक पहुंच गई लेकिन इस दौरान बड़ा कांड हो गया। जिसके बाद से खनन माफिया फरार है।












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