कार्तिक स्वामी मंदिर: तमिलनाडु के प्रसिद्ध मंदिरों के शिवाचार्यों ने की विशेष पूजा,जानिए मंदिर क्यों है खास

रुद्रप्रयाग जिले के क्रौंच पर्वत पर स्थित भगवान कार्तिक स्वामी मंदिर में 108 बालमपुरी शंख से पूजा, हवन और दक्षिणा वर्त से स्वामी कार्तिकेय का भव्य जलाभिषेक किया गया है।

कार्यक्रम में तमिलनाडु से आए मुख्य पुजारी माईलम एथेनम, कूनमपट्टी एथेनम, कौमारा मुत्त एथेनम और श्रृंगेरी मुत्तू सहित तमिलनाडु के प्रसिद्ध 6 मंदिरों के शिवाचार्यों ने दिव्य पूजा-अर्चना की।

Karthik Swamy Temple rudraparayg Murgan Swami Shivacharyas famous temples Tamilnadu performed puja

तमिलनाडु से पुजारियों का भव्य स्वागत किया गया और ड्रोन कैमरे के माध्यम से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई। भगवान कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तर भारत का एकमात्र मंदिर है, जहां पर भगवान कार्तिकेय बाल्य रूप में विराजमान हैं।

कार्तिकेय भगवान की दक्षिण भारत में मुरगन स्वामी के नाम से विशेष रूप से आराधना की जाती है, यहां पर उनके बहुत अनुयायी हैं। कार्यक्रम में तमिलनाडु से आए मुख्य पुजारी माईलम एथेनम, कूनमपट्टी एथेनम, कौमारा मुत्त एथेनम और श्रृंगेरी मुत्तू सहित तमिलनाडु के प्रसिद्ध 6 मंदिरों के शिवाचार्यों ने दिव्य पूजा-अर्चना की।

रुद्रप्रयाग जिले के जिलाधिकारी सौरभ गहरवार ने कहा कि कार्तिकेय स्वामी मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि कार्तिकेय मंदिर पर्यटन के मानचित्र पर उभरकर आए, इसके लिए पर्यटन की दृष्टि से इसे विकसित किया जा रहा है। इसी बीच पद्मश्री शिवमणि और उनके साथियों ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी गुरुजनों और अतिथियों को भी सम्मानित भी किया गया।

मान्यता है कि एक बार भगवान शिव ने गणेश और कार्तिकेय की परीक्षा ली और कहा कि जो पूरे ब्रह्मांड की सबसे पहले परिक्रमा करके वापस आएगा, उसकी पूजा सभी देवी-देवाओं में की जाएगी। पिता की आज्ञा के बाद कार्तिकेय ब्रह्मांड का चक्कर लगाने निकल गए, लेकिन भगवान गणेश ने मां पार्वती और पिता शिव के चक्कर लगाकर कहा कि आप ही मेरे लिए पूरा ब्रह्मांड हैं।

जब कार्तिकेय ब्रह्मांड की परिक्रमा करके वापस आए, तो देखा कि उनसे पहले गणेश वहां खड़े हैं। भगवान गणेश को श्रेष्ठ पद मिलने के बाद भगवान कार्तिकेय ने अपनी मां पार्वती से नाराज होकर यहां पर तपस्या की थी। इसके बाद वो दक्षिण भारत चले गए। दक्षिण भारत में कार्तिकेय की मुरगन के रूप में पूजा की जाती है।

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