Joshimath sinking: जोशीमठ के दरकने और दरारों के पीछे क्या है 2 जनवरी की रात का सच, जानिए क्यों​ छिड़ी नई बहस

जोशीमठ भू धंसाव को लेकर हर कोई चिंतित है। स्थानीय लोगों की चिंता की एक वजह दो जनवरी की रात को भी माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि 2 जनवरी की रात में कुछ हलचल महसूस हुई थी।

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जोशीमठ में भू धंसाव और जगह-जगह दरारें आने की वजह को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। अभी जो भी स्थानीय लोगों के आरोप और रिपोर्ट सामने आई हैं, उसमें एक बड़ी चर्चा 2 जनवरी की रात को लेकर है। जोशीमठ के कई हिस्सों में एक वर्ष से ज्यादा समय से दरारें आ रही हैं। इसरो की एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें बताया गया था कि जोशीमठ हाल के वर्षों में करीब 2 सेमी प्रति वर्ष की रफ्तार से धंसा है। हालांकि हालांकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने जोशीमठ भू-धंसाव की सेटेलाइट तस्वीरें हटा दी हैं। इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की ओर से सैटेलाइट इमेज जारी की गई थी। इसको लेकर भी कई तरह की चर्चा है।

2 जनवरी की रात में कुछ हलचल महसूस हुई थी

2 जनवरी की रात में कुछ हलचल महसूस हुई थी

जोशीमठ भू धंसाव को लेकर हर कोई चिंतित है। स्थानीय लोगों की चिंता अपने भविष्य को लेकर है। इसके लिए जो भी हालात बने हैं, उस पर भी बहस छ़िड़ी हुई है। स्थानीय लोगों की चिंता की एक वजह दो जनवरी की रात को भी माना जा रहा है। जो कि मीडिया से भी साझा कर रहे हैं। कुछ लोगों ने बताया कि 3 जनवरी की सुबह जब जोशीमठ के लोग घरों से बाहर निकले तो हालात बदले हुए थे। लोगों का कहना है कि 2 जनवरी की रात में कुछ हलचल महसूस हुई थी। पहले लोगों को लगा कि किसी तरह का भूकंप का झटका तो नहीं लेकिन अब तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं है।

 स्थानीय लोगों में ये चर्चा, शायद कोई विस्फोट किया था

स्थानीय लोगों में ये चर्चा, शायद कोई विस्फोट किया था

अधिकतर लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी ने जमीन के अंदर शायद कोई विस्फोट किया था। इसके साथ ही स्थानीय लोगों में ये चर्चा है कि टनल में 2016 से फंसी टीबीएम यानी टनल बोरिंग मशीन को निकालने के लिए ये विस्फोट किया जा सकता है। जोशीमठ की तबाही के लिए इस टीबीएम को भी जिम्मेदार माना जाता रहा है। टीबीएम एक भारी भरकम मशीन होती है। इस मशीन से मुख्य टनल बनाई जाती है। उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट ने बताया कि वह 3 दिनों तक जोशीमठ में रहे, त्रिलोचन भट्ट का कहना है कि इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से बात की तो ये बात सामने आई है।

मशीन अब तक फंसी हुई

मशीन अब तक फंसी हुई

त्रिलोचन भट्ट का कहना है कि तपोवन-विष्णुगाड परियोजना की मुख्य टनल बनाने वाली ये टीबीएम सबसे पहले 2009 में हेलंग से करीब 3 किमी आगे फंस गई थी। इस जगह से अब भी 200 लीटर प्रति सेकेंट पानी निकल रहा है। शुरुआत में लंबे समय तक यहां से 700 लीटर प्रति सेकेंड पानी का रिसाव हुआ था। टीबीएम फंसने के बाद ठेकेदार कंपनी एल एंड टी ने ठेका वापस ले लिया। इसके हिन्दुस्तान कंस्टक्शन कंपनी ने इस परियोजना की टनल बनाने का ठेका लिया। एचसीसी से काफी प्रयास के बाद टीबीएम को निकालकर कुछ आगे बढ़ाया गया। लेकिन 2012 में यह मशीन फिर फंस गई। दूसरी बार भी काफी प्रयास करने के बाद मशीन निकाली गई। तीसरी बार 2016 में फिर से मशीन फंस गई और अब तक फंसी हुई है।

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    सरकार को चाहिए कि हर मामले में पार​दर्शिता लानी चाहिए

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    उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि इस समय आपदा की स्थिति है। जिसके लिए हर कोई जिम्मेदार है। ऐसे में आम आदमी को जागरुक होना चाहिए। सरकार को चाहिए कि हर मामले में पार​दर्शिता लानी चाहिए। जिससे लोग जागरुक हो और स्थिति की वास्तविकता सामने आनी चाहिए।

     इसरो की रिपोर्ट, जोशीमठ में 12 दिन में ही 5.4 सेंटीमीटर जमीन धंस गई

    इसरो की रिपोर्ट, जोशीमठ में 12 दिन में ही 5.4 सेंटीमीटर जमीन धंस गई

    हाल ही में इसरो की रिपोर्ट में बताया गया ​था कि जोशीमठ में 7 महीने में 9 सेंटीमीटर जबकि 12 दिन में ही 5.4 सेंटीमीटर जमीन धंस गई है। रिमोट सेंसिंग सेंटर के सेटेलाइट मैप के आधार पर इसरो ने ये जानकारी दी कि शीमठ में भू धंसाव की प्रक्रिया पिछले कुछ महीनों से चल रही है, जो पिछले कुछ दिनों में और भी तेज हुई है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से नवंबर 2022 के बीच जोशीमठ में करीब 9 सेंटीमीटर तक भूमि धंसाव हुआ, जबकि 27 दिसंबर 2022 से 8 जनवरी 2023 के बीच 12 दिन में ही 5.4 सेंटीमीटर से भी ज्यादा भूमि धंसाव हो गया। चौंकाने वाली बात यह भी है कि भूधंसाव की यह प्रक्रिया 2180 मीटर (करीब 6500 फीट) से भी अधिक ऊंचाई तक है। हालांकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने जोशीमठ भू-धंसाव की सेटेलाइट तस्वीरें हटा दी हैं।

    इमेज हटाने को लेकर भी कई तरह की बहस

    इमेज हटाने को लेकर भी कई तरह की बहस

    इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की ओर से सैटेलाइट इमेज जारी की गई थी। इसरो की ओर से जारी की सैटेलाइट तस्वीरें से पता चल रहा था कि जोशीमठ शहर 27 दिसंबर से 8 जनवरी के बीच 5.4 सेमी नीचे धंसा है। 12 दिनों के अंदर शहर 5.4 सेंटीमीटर नीचे चला गया। इसरो की रिपोर्ट बताती है कि मिट्टी धंसने से जोशीमठ में आर्मी हेलीपैड और नरसिंह मंदिर भी प्रभावित हुआ है। धंसने का केंद्र 2180 मीटर की ऊंचाई पर जोशीमठ-औली रोड के पास स्थित है। हालांकि इमेज हटाने को लेकर भी कई तरह की बहस छिड़ी हुई है।

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