Joshimath sinking: पुनर्वास एवं विस्थापन को लेकर सरकार ने दिए हैं 3 विकल्प, क्या कहते हैं स्थानीय लोग
सरकार की और से तैयार किए गए विकल्प पर जोशीमठ के प्रभावित संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि पहले सरकार जमीन और रेट तय करे। इसके साथ ही जो जिला स्तरीय कमेटी बनाई गई है, उसकी बात को भी शामिल किया जाए।

जोशीमठ क्षेत्र में हो रहे भूधंसाव व भूस्खलन को लेकर पुनर्वास एवं विस्थापन के लिए जिलाधिकारी चमोली ने तीन विकल्प दिए हैं। जो कि अब मंत्रिमंडल के सामने रखे जाएंगे। साथ ही ये भी तय किया गया है कि तकनीकी संस्थाओं की अन्तिम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही प्रभावित परिवारों से प्रस्तावित विकल्पों के अनुसार सहमति प्राप्त की जायेगी। सरकार की और से तैयार किए गए विकल्प पर जोशीमठ के प्रभावित संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि पहले सरकार जमीन और रेट तय करे। इसके साथ ही जो जिला स्तरीय कमेटी बनाई गई है, उसकी बात को भी शामिल किया जाए।
सरकार जोशीमठ मामले में एक नीति लेकर आए
जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती का कहना है कि जो विकल्प प्रशासन लेकर आया है। वो भारत सरकार 2007 पुर्नवास और विस्थापन के अनुसार नहीं है। सरकार को चाहिए कि जोशीमठ मामले में एक नीति लेकर आए। जोशीमठ की भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए नीति तय करे। इन विकल्प में स्थानीय कमेटी के प्रस्ताव नहीं माने गए हैं। जमीन के रेट तय नहीं हैं।
हमें विकल्प नहीं हमारा जोशीमठ चाहिए
डांडो अपर बाजार वार्ड नंबर 6 निवासी आचार्य नरेश आनंद नौटियाल का कहना है कि हमें विकल्प नहीं हमारा जोशीमठ चाहिए। जो सरकार विकल्प की बात कर रहे है। कृषि भूमि और मकान का मुआवजा बद्रीनाथ के तर्ज पर दिया जाए।
ये सारे हवाहवाई विकल्प हैं
प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष जोशीमठ, वार्ड नंबर 6 नैन सिंह भंडारी का कहना है कि जो भी विकल्प सरकार ने दिए हैं वे एक भी सही नहीं है। सरकार ने अब तक न जगह चिह्रित की है और नहीं जमीन,मकान के रेट तय किए हैं। फिर किसी विकल्प पर विचार कैसे किया जा सकता है। ये सारे हवाहवाई विकल्प हैं। जोशीमठ के प्रभावितों को गुमराह करने वाली पॉलिसी है।
जमीनों के मालिकाना हक हमारे पास ही रहे
मनोहरबाग वार्ड नंबर 5 निवासी रोहित परमार ने बताया कि सरकार ने जो तीन विकल्प दिए हैं वो स्पष्ट नहीं हैं। अभी जो मकान का मानक तय किया जा रहा है वह सीपीडब्ल्यूडी के मानक के आधार पर हैं। हमारी मांग है कि जिला स्तरीय कमेटी की डिमांड को पूरा किया जाए। अभी तक जमीन के रेट तय नहीं है। साथ ही हमारी मांग है कि जमीनों के मालिकाना हक हमारे पास ही रहे।
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ये हैं तीन विकल्प
पहले विकल्प में प्रभावित भू-भवन स्वामियों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हुये वन टाईम सेटलमेन्ट किया जायेगा। प्रभावित हुए भूमि/भवन की क्षति के मुआवजे के रूप में वन टाइम सेटलमेन्ट करते हुए भूमि/भवन का निर्धारित मानकों के अनुसार भुगतान किया जाएगा। सम्पूर्ण भुगतान करने से पूर्व संबंधित प्रभावित की भूमि /भवन की रजिस्ट्री राज्य सरकार के पक्ष में की जानी होगी।
दूसरे विकल्प के तहत प्रभावित भू-भवन स्वामियों को प्रभावित भूमि के सापेक्ष गृह निर्माण के लिए निश्चित अधिकतम क्षेत्रफल 100 वर्ग मी0 तक की भूमि प्रदान की जायेगी तथा प्रभावित भवन का मुआवजा दिया जायेगा। प्रभावित भू-भवन स्वामियों को 100 वर्ग मी0 से अधिक की भूमि होने पर शेष भूमि का मानकों के अनुसार भुगतान किया जायेगा। प्रभावित भूमि/भवन स्वामियों का संपूर्ण भुगतान करने से पूर्व व गृह निर्माण के लिये निश्चित अधिकतम क्षेत्रफल 100 वर्ग मी0 तक की भूमि आवंटित करने से पूर्व संबंधित आपदा प्रभावित की भूमि/भवन की रजिस्ट्री राज्य सरकार के पक्ष में की जानी होगी।
तीसरे विकल्प के तहत प्रभावितों के पुनर्वास हेतु चिन्हित स्थान पर अधिकतम 75 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की सीमा तक की भूमि पर भवन निर्माण कर दिया जायेगा। यदि प्रभावित आवासीय भवन/भूमि का मूल्यांकन प्रदान किये जा रहे भूमि/आवास से अधिक है तो शेष धनराशि का भुगतान प्रभावित को किया जायेगा। प्रभावित भूमि भवन के सापेक्ष अधिकतम 75 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की सीमा तक की भूमि पर भवन निर्माण कर आवंटित करने से पूर्व संबंधित आपदा प्रभावित की भूमि/भवन की रजिस्ट्री राज्य सरकार के पक्ष में की जानी होगी।












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