Jagdeep Dhankhar इस्तीफे से एक माह पहले यहां कार्यक्रम के दौरान बिगड़ा था स्वास्थ्य, जानिए क्या हुई थी तकलीफ
Jagdeep Dhankhar उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे में उन्होंने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और डॉक्टर की सलाह का पालन करने का जिक्र किया।
दिनभर राज्य सभा की कार्रवाई में सक्रिय होने के बाद देर शाम अचानक हुए इस्तीफे को लेकर कई तरह की चर्चा भी हो रही है। हालांकि 74 वर्षीय जगदीप धनखड़ बढ़ती उम्र और कई शारीरिक परिशानियों से जूझ रहे थे। एक माह पहले जगदीप धनखड़ की उत्तराखंड दौरे के दौरान भी तबीयत खराब हो गई थी।

बीते 25 जून को तीन दिवसीय दौरे पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ उत्तराखंड आए थे, इस दौरान उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई। कुमाऊं विश्वविद्यालय का कार्यक्रम खत्म होने के बाद जगदीप धनखड़ की अचानक तबीयत खराब हो गई थी।
नैनीताल में कुमाऊं विश्वाविद्यालय स्वर्ण जयंती समारोह कार्यक्रम
नैनीताल में कुमाऊं विश्वाविद्यालय के स्वर्ण जयंती समारोह कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मुख्य अतिथि थे। अपने 45 मिनट के संबोधन में उन्होंने बार-बार कार्यक्रम में उपस्थित 1989 में अपने साथ सांसद रहे डॉ. महेंद्र सिंह पाल का जिक्र किया।
भावुक होकर रोने लगे, स्वास्थ्य बिगड़ गया
कार्यक्रम के बाद मंच से उतरकर उन्होंने डॉ पाल को गले लगाया। पांच मिनट तक पुरानी बातें करते रहे। डॉ पाल बहुत भावुक होकर रोने लगे। बाद में डॉ पाल को गले लगाए हुए ही उप राष्ट्रपति धनखड़ भी रोने लगे। तभी धनखड़ का स्वास्थ्य बिगड़ गया।
डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी
मौके पर चिकित्सकों की टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया। जिसके बाद वे राजभवन को रवाना हो गए। बाद में डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी। पूर्व सांसद महेंद्र पाल ने बताया तब बताया कि, भावुक होने के कारण उनकी थोड़ी तबीयत बिगड़, लेकिन कुछ देर बाद वे नॉर्मल हो गए।
9 मार्च 2025 को सीने में अचानक दर्द और बेचैनी की शिकायत
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ बढ़ती उम्र और कई शारीरिक परिशानियों से जूझ रहे थे। हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जगदीप धनखड़ को 9 मार्च 2025 को सीने में अचानक दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में रखा गया और वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट की निगरानी में उनका इलाज हुआ। हालांकि 12 मार्च को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। जिसके बाद से डॉक्टर्स ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी। ऐसे में माना जा रहा है कि जगदीप धनखड़ डॉक्टर्स की सलाह को नजरअंदाज नहीं कर सके।












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