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89 साल की बुजुर्ग महिला बिना थके बिना रूके कैसे करती है हर बार केदारनाथ की पैदल यात्रा, वायरल 'अम्मा' की कहानी

केदारनाथ यात्रा में हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कोई घोड़े से तो कोई डंडी कंड़ी से। कोई हवाई जहाज से केदारनाथ पहुंचता है तो कोई पैदल ही चल पड़ता है।

केदारनाथ की पैदल यात्रा काफी कठिन है। 18 किमी से भी ज्यादा पैदल यात्रा में कई बार ऐसी परिस्थिति आती है, जब एक तरफ पग डंडी तो दूसरी तरफ खाई होती है। ऐसे में केदारनाथ की पैदल यात्रा आसान नहीं है।

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लेकिन आज हम आपको 89 साल की एक ऐसी बुजुर्ग महिला से मिलवाने जा रहे हैं जो कि कई साल केदारनाथ की पैदल यात्रा कर चुकी हैं।

इस बार भी जब अम्मा पैदल यात्रा कर रही थीं तो उन्हें एक युवक ने अपने कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल किया। इसके बाद से हर कोई अम्मा के बारे में जानना चाहता है। आखिर कैसे 89 साल की उम्र में कोई इस तरह पैदल यात्रा कर सकता है।

उत्तरकाशी के रैथल गांव की प्यार देई 89 वर्ष की बुजुर्ग महिला हैंं। जो कि अब उम्र के ऐसे पड़ाव में है जहां वह कम सुनती हैं और अब उन्हें कम दिखाई देने लगा है। लेकिन जब वह केदारनाथ यात्रा के लिए पैदल चलने लगी तो कई यात्रियों को पीछे छोड़ दिया। बीच रास्ते में जब अम्मा थकने लगी तो बिना आराम किए ही फिर से आगे चलने लगी। इस बीच एक युवक की नजर पड़ी उन्हें लगा अम्मा जी थग गई तो आराम के लिए कहूं। लेकिन अम्मा ने मना कर दिया।

अम्मा ने कहा कि रूक गई तो फिर चलना मुश्किल हो जाएगा। फिर उस युवक ने अम्मा को कपूर सूंघने को दिया। अम्मा कपूर सूंघते हुए आगे बढ़ती गई। इस तरह वह केदारनाथ पहुंच गई। रात केदारनाथ में बाबा के दर्शन के लिए अम्मा एक से डेढ़ किमी लाइन में लगी रही। सचमुच अद्भुत और कमाल है। महादेव की भक्ति और शक्ति।

प्यार देई के बेटे चंद्रमोहन सिंह रावत ने बताया कि उनके पिता मेसत सिंह का 13 साल पहले निधन हो गया। परिवार में मां के अलावा चंद्रमोहन सिंह की पत्नी और तीन बच्चे दो बेटे और एक बेटी है। इसी तरह उनके भाई का परिवार भी हैख्, वे आज भी संयुक्त परिवार में रहते हैं। खेती बाड़ी कर घर चलाते हैं।

चंद्रमोहन की दयारा में छान है, जहां उनकी माता जी ने गाय और अन्य जानवरों को कई सालों तक परिवार की तरह देखभाल की। आज भी उनको किसी तरह की कोई बीमारी नहीं है। हालांकि उम्र के साथ अब कम सुनाई और दिखाई देता है। फिर वह केदारनाथ पैदल चलने की जिद पर अड़ी रही और उनकी पत्नी प्रमिला के सहारे पूरी यात्रा की।

चंद्रमोहन बताते हैं कि उनकी मां का कहना था कि जब तक शरीर को कष्ट न दो तो यात्रा सफल नहीं मानी जा सकती है। तभी तो बाबा का आशीर्वाद मिलेगा। चंद्रमोहन ने कहा कि उनके पिता राज्य आंदोलनकारी थे, लेकिन आज भी उनकी माता को किसी तरह की कोई सरकार से सहायता या पेंशन नहीं मिली है। जिसके लिए वे सरकार से अब गुजारिश कर रहे हैं।

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