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आजादी की विरासत: जहां चाचा नेहरू रहे 4 बार बंधक, इंदिरा गांधी को यहीं से मिली जिंदगी की सीख

Independence Day 2024 Special Pandit Jawaharlal Nehru: देहरादून की पुरानी जेल का परिसर, कोर्ट के सामने का पुराना गेट। इस गेट से थोड़ा आगे जाने पर कुछ सीढ़ियां उतरने के लिए बनाई गई है। बरसात की वजह से जगह-जगह पानी भरा हुआ है।

सीढ़ियों से नीचे उतरते ही दीवारों पर कुछ तस्वीरें नजर आ जाती है। एक बड़ी तस्वीर पर हमारी नजर जाती है। जिसमें गांधी जी और नेहरू जी की आपस में बात करते और हंसते हुए तस्वीर दीवार पर उकेरी गई है। इस बीच बगल में एक बड़ा लोहे का गेट और ऊपर लिखा है नेहरू वार्ड।

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ये नेहरू वार्ड आजादी की विरासत है। जिसे आज भी सुरक्षित रखा गया है। हालांकि इसके हाल उतने अच्छे नहीं है, जितने देश के आज दावे किए जाते हैं। आजादी की विरासत के गवाह नेहरू वार्ड परिसर में वन इंडिया की टीम पहुंची। हमें बताया गया कि नेहरू आजादी के आंदोलन के दौरान चार बार करीब एक साल तक देहरादून जेल में रहे। यहां कई जगह पर काले पत्थरों पर जानकारी दी गई है।

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    आजादी की विरासत: जहां चाचा नेहरू रहे 4 बार बंधक, इंदिरा गांधी को यहीं से मिली जिंदगी की सीख
    Independence Day 2024 Special Pandit Jawaharlal Nehru Ka Jivan Parichay Dehradun News

    चार बार बंधक रहे चाचा नेहरू
    सबसे पहले बाहर काले गेट के ऊपर लिखा है कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान पंडित नेहरु को इस जेल में 1932, 1934, 1935 और 1941 यानि चार बार बंधक बनाकर रखा गया।

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    आजादी की लड़ाई की बड़ी विरासत
    वन इंडिया को नेहरू वार्ड के इतिहास और विरासत के बारे में देहरादून के प्रसिद्ध जानकार और भारत ज्ञान विज्ञान समिति के अध्यक्ष विजय भट्ट ने विस्तार से जानकारी दी। जो कि एक घुमक्कड़ और इतिहास को समझने, संवारने और खोजने में लगे रहते हैं। विजय भट्ट ने बताया कि देहरादून का नेहरू वार्ड भारत की आजादी की लड़ाई का एक बड़ी विरासत को संजोए हुए है।

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    जीवन के वृतांत, यादों को पुस्तक में समाहित किया
    देहरादून की पुरानी जेल में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को चार बार यहां बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान चाचा नेहरू ने यहां करीब एक साल बिताया। आज भी नेहरू वार्ड में उस समय की यादों को सुरक्षित रखा गया है। जिस परिसर में उन्होंने अपने जीवन के वृतांत, यादों को एक पुस्तक और पत्र में समाहित करने की कोशिश की।

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    दुनिया के इतिहास की झलक यहीं लिखी
    उन्होंने बताया कि नेहरू जी ने दुनिया के इतिहास की झलक को यहीं पर लिखा। इसके साथ ही डिस्कवरी आफ इंडिया पुस्तक लिखने की भी प्रेरणा उन्हें यहीं से मिली। इसे नेहरू हेरिटेज सेंटर नाम से भी जाना जाता है। नेहरू आजादी के आंदोलन के दौरान चार बार देहरादून जेल में रहे। वह जेल से बेटी इंदिरा गांधी को पत्र लिखा करते थे। वह अपने एक पत्र में लिखते हैं कि जेल से बर्फ से ढका हिमालय दिखता है। इसी परिसर में नेहरू कदम दर कदम चलते चलते हमेशा कुछ न कुछ लिखते रहते थे। जिसको बाद में उन्होंने एक किताब में संग्रहित किया।

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    पेड़ के नीचे बैठकर लिखे पत्र
    ब्रिटिश हुकूमत के दौरान पहली बार साल 1932 में पंडित नेहरु को इस जेल में भेजा गया था। जिसके बाद 1934, 1935 और 1941 में भी उन्हें यहां कैद किया गया था। इस परिसर में एक पेड़ है, नेहरू ने इस जेल में स्थित पेड़ के नीचे बैठकर ही इस किताब के अधिकांश हिस्से लिखे थे।

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    कुर्सी, मेज और बिस्तर अब भी सुरक्षित
    अपनी किताब डिस्कवरी ऑफ इंडिया में भी पंडित नेहरू ने इस पेड़ का जिक्र किया है। वॉर्ड में पंडित जवाहरलाल नेहरू का शयनकक्ष, पाठशाला,भंडार घर, शौचालय व स्नानघर आज भी है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत एनडी तिवारी ने नेहरू वॉर्ड को हेरिटेज सेंटर बनाने की कवायद शुरू की थी। पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने नेहरू हेरिटेज सेंटर का लोकार्पण किया था।

    सहस्रधारा सबसे ज्यादा पसंद
    नेहरू का उत्तराखंड से काफी जुड़ाव था। जेल के अलावा भी उनका यहां निरन्तर आना जाना रहा है। सहस्रधारा सबसे ज्यादा पसंद था। उन्हें पहाड़ों की रानी मसूरी भी काफी पसन्द थी। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने मसूरी और सहस्रधारा की सैर भी की। तत्कालीन विधायक गुलाबसिंह के आमंत्रण पर नेहरू चकराता भी गए थे जहां उन्होंने प्रकृतिपुत्रों की जनजातीय संस्कृति का करीब से आनन्द उठाया।

    जीवन की चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जानी चाहिए
    भारत ज्ञान विज्ञान समिति के अध्यक्ष विजय भट्ट ने बताया कि पुरानी जेल परिसर में नेहरू वार्ड एतिहासिक स्थल है। इस जेल में जवाहर लाल नेहरू के अलावा एमएल राय, गोविंद बल्लभ पंत भी रहे। उन्होंने कहा कि धरोहर सुरक्षित नहीं है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि यहां एक नेहरू जी के जीवन की चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जानी चाहिए, जिससे हम आने वाली पीढ़ी को इस विरासत के बारे में बता सकें।

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