उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब इस फैसले से लगाया मास्टरस्ट्रोक, एक तीर से साधे कई निशाने

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस कर्मियों की 4600 ग्रेड पे मांग पर किया बडा ऐलान

देहरादून, 22 अक्टूबर। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनावी साल में पुलिसकर्मियों की लंबित मांग पूरी करते हुए बड़ा दांव खेला है। सीएम धामी ने 2001 बैच के पुलिस कर्मियों को 4600 ग्रेड पे देने की घोषणा की है। पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम ने सीएम ने ऐलान कर पुलिस कर्मियों की एक बड़ी मांग पूरी कर दी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि 2001 बैच के पुलिस कर्मियों को 4600 ग्रेड पे दिया जाएगा, जबकि अन्य की मांग पर वेतन विसंगति कमेटी विचार करेगी। साफ है​ कि सीएम के इस दांव से पुलिसकर्मियों के परिजनों की नाराजगी भी दूर हो गई साथ ही आंदोलन भी खत्म हो गया। इसके साथ ही सीएम ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति का भी ख्याल रखते हुए तकनीकी रुप से मामले को सुलझाने के लिए सबसे बेहतर फॉर्मूला अपनाया है।

कुछ को लाभ, दूसरों की जगी आस

कुछ को लाभ, दूसरों की जगी आस

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर अपनी सूझबूझ और राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देते हुए पुलिसकर्मियों के ग्रेड पे के मामले को सुलझाया है। बीते मार्च से पुलिसकर्मियों के ​परिजन ग्रेड पे की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। जिनकी मांग 4600 ग्रेड पे ही थी। 4600 ग्रेड पे 20 साल की अवधि पर दिया जाता है। तकनीकी तौर पर इससे अभी 2001 बैच के करीब 1500 पुलिस कर्मी ही प्रभावित हो रहे थे, इस कारण उनकी मांग पूरी हो गई है। अन्य पुलिस कर्मियों के लिए भी सीएम ने रास्ता खोलते हुए उनकी आस ​को कायम रखा है।

मार्च से चल रही थी लड़ाई

मार्च से चल रही थी लड़ाई

उत्तराखंड 2000 में अस्तित्व में आया। जबकि 2001 में सिपाहियों की पहली भर्ती 2001 में हुई। इस भर्ती के दौरान ग्रेड पे 2000 था और पदोन्नति का स्लैब 8वें वर्ष, 12वें वर्ष और 22वें वर्ष में प्रावधान रखा गया। जब पहला बैच पदोन्नति के पास पहुंचा तो नियम में बदलाव कर दिया गया। जिसके बाद पदोन्नति का स्लैब 10 वर्ष, 20 वर्ष और 30 वर्ष कर दिया गया। जिससे पुलिसकर्मियों के परिजनों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। मार्च में आंदोलन की रुपरेखा पहली बार सार्वजनिक हुई। पिछले माह पुलिसकर्मियों के परिजनों ने सड़कों पर उतरकर देर रात तक ​विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बिना आंदोलनकारियों ने अपना ​प्रदर्शन जारी रखा। देर रात डीजीपी अशोक कुमार मौके पर आए और सीएम के आश्वासन के बाद आंदोलन को खत्म करवाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यभार संभालते ही कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की। जो कि इस पूरे प्रकरण को देख रही है। आंदोलन के समय भी सरकार की और से ये आश्वासन दिया गया कि कमेटी की रिपोर्ट में भी ग्रेड पे बढ़ाने पर स​हमति बनी है। हालांकि मुख्यमंत्री ने 2001 बैच के पुलिसकर्मियों को सौगात देकर दूसरे पुलिसकर्मियों को भी उम्मीद बंधाई है।

विपक्ष को करा दिया चुप

विपक्ष को करा दिया चुप

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनावी साल में एक और मास्टरस्ट्रोक खेला है। इससे पहले सरकारी कर्मचारियों के हित में भी सीएम कई बड़े फैसले ले चुके हैं। लेकिन पुलिसकर्मियों का मुद्दा तकनीकी रूप से ज्यादा फंसा हुआ था। जिसे सुलझाने के लिए सीएम ने बीच का फॉर्मूला निकाला है। सीएम की इस सूझबूझ से विपक्ष को भी इस मुद्दे पर राजनीति करने का मौका नहीं मिल पाया है। हर बार सरकार को घेरने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी ट्वीट कर पुलिसकर्मियों और उनके कुटुंबीजनों को ग्रेड-पे के संघर्ष में विजय के लिए बधाई दी है। हरीश रावत ने कहा कि अंततः गलत निर्णय को झुकना पड़ा। साफ है कि इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए विपक्ष के पास ज्यादा कुछ बचा नहीं है। जबकि आंदोलन के समय पुलिसकर्मियों के परिजनों के साथ कई राजनीतिक संगठन विरोध में शामिल रहे हैं।

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